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OMG : बंदर ले उड़ा वृद्धा का रुपयों से भरा बैग, 06 दिन बाद ऐसे मिला वापस

- सुयालबाड़ी से सीएनई संवाददाता अनूप सिंह जीना की रिपोर्ट -

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✒️ भगवान की भक्त पर अद्भुत कृपा, हर कोई हैरान

God's existence : Monkey took old lady's bag full of money, got it back after six days

जी हां, भगवान सच में होते हैं। इस कलियुग में भी वह अपने भक्त की मदद को दौड़े चले आते हैं। हम बात कर रहे हैं नैनीताल जनपद अंतर्गत सुयालबाड़ी की। जहां बैंक से पैसे निकाल घर लौट रही एक वृद्ध महिला से एक उत्पाती बंदर ने बैग छीन लिया। फिर वह एक पेड़ से दूसरे पर कूदते हुए आंखों से ओझल हो गया। बहुत ढूंढ-खोज के बावजूद वह बंदर व बैग कहीं नहीं मिल पाया। बैग में महिला के दस हजार रुपये व घरेलू सामान भी था। महिला हिम्मत हार चुकी थी और बस रोते हुए अपने प्रभू को पुकारते रही। ठीक छह दिन बात एक चमत्कार हो गया और महिला का रुपयों भरा बैग आज उसे सुरक्षित वापस मिल गया है।

यह है यह विचित्र घटनाक्रम

प्राप्त जानकारी के अनुसार लगभग छह दिन पूर्व सिरसा गांव निवासी सरस्वती देवी (उम्र लगभग 85 साल) पत्नी स्व. प्रेम राम सुयालबाड़ी स्थित नैनीताल-अल्मोड़ा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक पहुंची। जहां आवश्यकता पड़ने पर उसने वृद्धावस्था पेंशन के 10 हजार रुपये अपने बैंक खाते से निकाले और अपने घर लौटने लगी। महिला ने यह रुपये एक थैले में रखे थे। जिसमें उनका कुछ घरेलू सामान व खाने-पीने की वस्तुएं भी थी। महिला चूंकी वृद्धा थी अतएव वह रास्ते में सुस्ताने के लिए एक जगह बैठ गई। इसी बीच एक बंदर अचानक आया और महिला का थैला लेकर भाग निकला। वृद्धावस्था के कारण महिला उस बंदर का पीछा नहीं कर पाई।

वृद्धा को धनराशि लौटाते बालम जीना और नवीन तिवारी
वृद्धा को धनराशि लौटाते बालम जीना और नवीन तिवारी

तलाश में बीत गए पांच रोज, नहीं मिला बैग

महिला ने पूरा घटनाक्रम नैनीपुल पहुंच ग्राम वासियों को बताया। जिसके बाद महिला के बताए गये स्थान व बंदर के संभावित ठिकानों की ढूंढ-खोज हुई। काफी तलाशने के बाद भी वह बंदर और बैग कहीं नहीं मिल पाया। जिसके बाद वृद्ध महिला असहाय होकर बाजार में आकर रोने लग गई। जिसने भी महिला का रोना सुना वह उसकी मदद के लिए आया। बंदर की तलाश होती रही, लेकिन पांच दिन बीतने पर भी बंदर द्वारा ले जाया गया बैग कहीं नहीं मिल पाया। जिसके बाद उहास व हताश यह वृद्धा बस भगवान को पुकारती रही।

आज जैसे यात्रियों के वेष में आए भगवान, मिल गया बैग

बंदर द्वारा वृद्धा का बैग चोरी किये जाने के पांच दिन बीतने के बाद आज एक अद्भुव व अविश्वसनीय घटना हुई। अल्मोड़ा के खोल्टा से आए दो लोग नैनीपुल स्थित एक दुकान में चाय पीने के लिए रुके। इस बीच उन्होंने वहां मौजूद लोगों द्वारा बंदर द्वारा एक असहाय व वृद्ध महिला का बैग चोरी किए जाने की घटना के बारे में सुना। जिसके बाद यात्रियों ने कहा कि उनके पास एक अच्छी क्वाल्टिी का जूम कैमरा है। जिसकी मदद से वह दूरस्त पहाड़ी में महिला का गुम हुआ बैग ढूंढने का प्रयास करेंगे। पर्यटक नैनीपुल के ऊपर पहाड़ पर गए, जहां से उन्होंने अपने जूम कैमरे की मदद से संभावित ठिकानों पर देखना शुरू कर दिया। तभी उन्हें अपने कैमरे में एक स्थान पर पड़े रुपये दिखाई दिए। जिसके बाद जब लोग उस जगह पर गए तो महिला के पूरे 10 हजार रुपये वहां सुरक्षित मिल गए। हालांकि यह बैग खुला था और उसमें रखे बिस्कुट आदि बंदरों ने खा लिए थे।

महिला को सौंपा गए रुपये, हर कोई गदगद

आज ग्राम प्रधान पति सिरसा बालम जीना और सरना निवासी नवीन तिवारी ने सिरसा निवासी सरस्वती देवी को उक्त बैग व दस हजार रुपये सौंपे। बैग व रुपये वापस मिलने पर सरस्वती देवी की आंखों में खुशी के आंसू झलक आए। उन्होंने उस अज्ञात यात्रियों को ढेरों आशीर्वाद दिए, जिनकी बदौलत उन्हें अपने खोए रुपये वापस मिल पाये। इधर

स्थानीय नागरिक इस संपूर्ण घटनाक्रम को दैवीय कृपा मान रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह अल्मोड़ा से आए दो यात्री भगवान के दूत (किसी फरिश्ते) की तरह अचानक मदद को आए और लौट गए। ग्रामीणों ने प्रशासन व वन विभाग से परेशानी का सबब बन चुके बंदरों के आतंक से भी निजात दिलाने की मांग की है।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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