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रुद्रपुर : किसानों के साथ नहीं, अम्बानी-अडानी के साथ है मोदी सरकार – भाकपा

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रुद्रपुर। अखिल भारतीय किसान महासभा के बैनर तले आज रुद्रपुर के अम्बेडकर पार्क में मोदी सरकार द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापिस लेने की मांग पर देश भर में चल रहे आंदोलन को तेज करने के मुद्दे पर किसान पंचायत का आयोजन किया गया। किसान पंचायत की शुरुआत 3 दर्जन से अधिक शहीद किसानों को श्रद्धांजलि देने से हुई।

किसान पंचायत को संबोधित करते हुए किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष आनन्द सिंह नेगी ने कहा कि मोदी सरकार खेती-किसानी को अम्बानी-अडानी जैसे कॉरपोरेट के पक्ष में इतनी बेशर्मी से खड़ी है कि दिल्ली बॉर्डर सहित देशभर में पिछले 1 महीने से चल रहे आंदोलन और आंदोलन में शहीद 3 दर्जन से अधिक किसानों की मौत के बावजूद तीनों काले कृषि कानूनों को वापिस लेने को राजी नहीं है। इसके उलट किसान आंदोलन को बदनाम करने के लिए उलटा-सीधा प्रचार कर रही है। साथ ही कई मीडिया चैनलों को भी सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर खबरों पर या तो रोक लगा दी गई या झूठे प्रचार में लगा दिया गया।

उन्होंने कहा कि सरकार कृषि कानूनों को बहुत अच्छा बात रही है लेकिन सच यह है कि कृषि कानूनों के दुष्प्रभाव सामने आ चुके हैं। इन कृषि कानूनों के आने के बाद निजी तौर पर किसानों की फसल खरीदने वाली लॉबी ने धान के फसल की कीमत 1000 रुपये प्रति क्विंटल तक कर दी। जबकि पिछली बार 1600-1700 में खरीद की थी। ऐसे में धान की फसल पैदा करने वाला किसान बहुत घाटे में चला गया है। इन कानूनों के आने के बाद तेल, दलहन, आलू,प्याज, तिलहन जैसी आवश्यक वस्तुओं में महंगाई कई गुना बढ़ गई है। इसके बावजूद मोदी सरकार इन कानूनों के फायदे गिना रही है।

किसान पंचायत को संबोधित करते हुए भाकपा(माले) के राज्य सचिव कॉमरेड राजा बहुगुणा ने कहा कि मोदी सरकार इस देश की सारी संपत्ति को अपने चहेते पूंजीपति अम्बानी-अडानी को सौंप देना चाहती है। कोरोना काल को मोदी की फ़ासीवादी सरकार ने पूंजीपतियों के लिए “आपदा में अवसर ” बना दिया और पहले रेल, बीमा, रक्षा, बैंक जैसी सार्वजनिक उपक्रमों का निजिकरण कर बेच दिया और फिर शिक्षा का निजीकरण करने के लिए नई शिक्षा नीति लायी, फिर मजदूरों के हितों के 44 श्रम कानून खत्म कर दिए और अब खेती-किसानी को अम्बानी-अडानी के लाभ की वस्तु बनाने के लिए तीन कृषि कानूनों को अलोकतांत्रिक तरीके से लागू कर दिया। लेकिन किसानों ने मोदी सरकार को दिखा दिया है कि अगर सरकार जनहित में सरकार नहीं झुकेगी तो किसान भी अपना आंदोलन नहीं छोड़ने वाले। भाकपा (माले) किसानों के पक्ष में पुरजोर तरीके से खड़ी है और किसान आंदोलन को तेज करने में पूरी ताकत लगा देगी।

भाकपा के जिला मंत्री राजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि सरकार इन काले कानूनों को लागू कर सार्वजनिक वितरण प्रणाली को ही खत्म कर देना चाहती है। किसान पंचायत को समर्थन देते हुए ट्रेड यूनियन ऐक्टू के प्रदेश महामंत्री ने कहा कि मजदूर-किसान विरोधी इस सरकार को मजदूर-किसान एकता के दम पर ही झुकाया जा सकता है। किसान पंचायत में किसान आंदोलन का समर्थन करने और उधम सिंह नगर में 1500 किसानों पर थोपे गए मुकदमे की मांग उठाने, तीनों कानूनों को वापिस लेने की मांग, स्वामीनाथन कमेटी की रिपार्ट लागू करने की मांग, प्रस्तावित विद्युत बिल को वापिस लेने की मांग आदि प्रस्ताव पारित किए।

पंचायत को केंद्रीय विकलांग कल्याण परिषद के अध्यक्ष एम सलीम, उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की जिला अध्यक्ष ममता पानू, भाकपा (माले) राज्य कमेटी सदस्य कैलाश पांडेय, श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के सदस्य महेंद्र मौर्य, सी पी अधिकारी, महेश बिष्ट, ऐक्टू नगर कमेटी से रविन्द्र पाल सिंह, ललित मटियाली, किसान महासभा के नैनीताल जिला सचिव राजेन्द्र शाह, महेश बिष्ट आदि ने संबोधित किया। किसान पंचायत में प्रकाश सिंह, नरेंद्र सिंह, मुकेश जोशी, दीपक कांडपाल, धन सिंह, उत्तम दास, गजेंद्र लाल, जयप्रकाश सती, विनोद कुमार, धीरज कुमार, कुलविंदर कौर, गीता प्रेमवती, विमला रौथाण, नीलम, हरीश टम्टा, नैन सिंह कोरंगा, मुबारक शाह, दर्शन सिंह सहित कई अन्य लोग मौजूद थे।

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