HomeUncategorizedहार को पछाड़ा, शुगर को पछाड़ा: 65 की उम्र में 'मैराथन मैन'...

हार को पछाड़ा, शुगर को पछाड़ा: 65 की उम्र में ‘मैराथन मैन’ बने महिपाल सिंह

ADVERTISEMENTS

नई दिल्ली/गाजियाबाद: क्या डायबिटीज ज़िंदगी की रफ्तार पर ब्रेक लगा सकती है? गाजियाबाद के 65 वर्षीय महिपाल सिंह ने इस सवाल का जवाब अपनी दौड़ती हुई कदमों से दिया है। जिस उम्र में लोग घुटनों के दर्द और दवाइयों के डिब्बों में सिमट जाते हैं, उस उम्र में महिपाल सिंह ने न केवल शुगर को मात दी, बल्कि ट्रैक पर पदक जीतकर दुनिया को बता दिया कि “उम्र सिर्फ एक आंकड़ा है और बीमारी महज एक चुनौती।”

🛑 जब ज़िंदगी ने ली कठिन परीक्षा

साल 2021 की शुरुआत महिपाल सिंह के लिए किसी अंधेरी सुरंग जैसी थी। शरीर में सुस्ती, बेहिसाब प्यास और थकावट ने दस्तक दी। जांच हुई तो पता चला कि शुगर लेवल खतरे के निशान से काफी ऊपर है। मन में डर बैठ गया कि शायद अब ज़िंदगी पहले जैसी नहीं रहेगी। दवाइयां शुरू हुईं, लेकिन मानसिक बोझ कम नहीं हो रहा था।

⚠️ ऋषिकेश: मर्यादा भूली महिला पर्यटक? सरेआम शराब और हाई वोल्टेज ड्रामा!

तपोवन में शराब पीने से रोकने पर हरियाणा की महिला ने बीच सड़क किया हंगामा...

▶ देखें पूरा वायरल वीडियो

⚡ एक मशविरा, जिसने बदल दी तक़दीर

तभी एक परिचित ने उन्हें एक छोटा सा मंत्र दिया— “दवा के साथ दुआ नहीं, दौड़ को अपनाओ।” यह बात महिपाल सिंह के दिल में उतर गई। उन्होंने गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन की अपनी सोसाइटी के पार्क से सफर शुरू किया।

  • शुरुआत: सिर्फ 10-15 मिनट की पैदल चाल।
  • चुनौती: परिवार को डर था कि इस उम्र में दौड़ने से चोट लग जाएगी।
  • संकल्प: डर को पीछे छोड़ महिपाल ने वॉक को जॉगिंग में और जॉगिंग को दौड़ में बदल दिया।

🏅 पार्क से लेकर इंटरनेशनल मैराथन तक का सफर

सोसाइटी के छोटे से ट्रैक से शुरू हुआ यह सफर सड़कों से होता हुआ क्रिकेट ग्राउंड तक जा पहुँचा। महिपाल सिंह के अनुशासन का जादू देखिए:

  1. शुगर पर स्ट्राइक: कुछ ही महीनों में शुगर लेवल न केवल कम हुआ, बल्कि पूरी तरह कंट्रोल में आ गया।
  2. मेडल की चमक: पिछले 4 वर्षों में उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मैराथन में हिस्सा लिया और सीने पर मेडल सजाए।
  3. नई पहचान: आज लोग उन्हें उनके नाम से नहीं, बल्कि ‘फिट दादाजी’ के नाम से जानते हैं।

🌟 डायबिटीज के मरीजों के लिए ‘फिट दादाजी’ का संदेश:

“डायबिटीज से डरकर घर मत बैठिए। शुरुआत 500 मीटर से ही सही, लेकिन कदम बाहर निकालिए। जब आपका पसीना बहता है, तो शुगर खुद-ब-खुद घुटने टेक देती है।”

आज महिपाल सिंह अकेले नहीं दौड़ते। उनकी प्रेरणा से गाजियाबाद के दर्जनों बुजुर्ग अब सुबह-सुबह उनके साथ ट्रैक पर पसीना बहाते हैं। उन्होंने साबित कर दिया है कि अनुशासन और समर्पण के जूते पहनकर आप किसी भी बीमारी की रेस को जीत सकते हैं।


प्रेरणा लें: अगर महिपाल सिंह 65 साल की उम्र में दौड़ सकते हैं, तो आप भी चल सकते हैं। आज ही अपनी सेहत की मैराथन शुरू करें!

ADVERTISEMENTS
🔴 BREAKING: खनन कारोबारी का खौफनाक गुस्सा! रेट विवाद में प्रतिद्वंद्वी का क्या हाल किया? (देखें वीडियो)
Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
RELATED ARTICLES

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments