एक अन्य महिला की भी ब्रेन-हैमरेज से हो चुकी है मौत
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का मानकनगर इलाका इन दिनों गहन विवाद और शोक में डूबा है। यहां 44 वर्षीय बेकरी संचालक वीरेंद्र यादव ने 6 पन्नों का सुसाइड नोट लिखकर कथित रूप से जहर खाकर आत्महत्या कर ली। परिवार और पड़ोसियों का आरोप है कि जमीन/रैंप को लेकर हुए विवाद में मोहल्ले के ही दंपती ने मोहल्ले के तीन परिवारों के 13 लोगों पर छेड़छाड़ के झूठे मुकदमे दर्ज कराए।

इस विवाद ने न सिर्फ वीरेंद्र की जान ले ली, बल्कि पड़ोस की एक महिला की भी ब्रेन-हैमरेज से मृत्यु हो चुकी है। अब पूरा मोहल्ला पुलिस कार्रवाई और दंपती के कथित दबंग रवैये के खिलाफ खुलकर सामने आ गया है।
जमीन-रैंप विवाद से शुरू हुआ मामला
मानकनगर के मेहंदीखेड़ा क्षेत्र में रहने वाले वीरेंद्र यादव (बेकरी संचालक) और उनके पड़ोसियों के बीच चार साल पहले रैंप और रास्ते को लेकर विवाद शुरू हुआ। परिवार का आरोप है कि मामला कोर्ट में विचाराधीन रहते हुए भी पड़ोसी दंपती ने जबरन निर्माण कार्य किया। विरोध करने पर पूरे परिवार के पुरुषों को छेड़छाड़ के आरोप में नामजद करवा दिया गया।
परिवार का कहना है — “वीरू भैया ने जब आपत्ति की तो हमें झूठे केस में फंसा दिया। हमारी महिलाओं पर गालियाँ दी गईं, और पुरुषों पर छेड़छाड़ का मुकदमा लगवा दिया।”
6 पन्नों का सुसाइड नोट — “लोकलाज और पुलिस की मिलीभगत”
मृतक वीरेंद्र ने मरने से पहले 6 पन्नों का सुसाइड नोट छोड़ा। उसमें लिखा:
- पड़ोसी दंपती द्वारा दर्ज कराया गया छेड़छाड़ का मुकदमा झूठा है।
- कोर्ट से समन आने के बाद उन्हें समाज में बदनामी का डर सताने लगा।
- पुलिस उनकी शिकायत नहीं सुनती और उल्टा आरोपियों का साथ देती है।
- “अगर जेल चले गए तो इज्जत खत्म हो जाएगी, बेटी की शादी कैसे होगी?”
परिवार का कहना है कि यही चिंता उन्हें तोड़ गई।
परिवार की व्यथा — शिक्षा और करियर बर्बाद
मृतक के बेटे अभय यादव ने कहा:
- “पापा रोज कहते थे कि बहन की शादी कैसे करेंगे, लोग कहेंगे कि बाप-भाई छेड़छाड़ करते हैं। मेरी एलएलबी की पढ़ाई छूट गई, बहन की नौकरी चली गई।”
- “मोहल्ले में कैमरे लगे थे, वीडियो में साफ दिखता है कि महिलाएं ही आपस में भिड़ीं। बावजूद इसके पुलिस ने हमारे पूरे परिवार पर केस कर दिया।”
ब्रेन-हैमरेज से एक और महिला की मौत
मोहल्ले के दूसरे परिवार की सदस्य बिट्टो यादव (पत्नी नरेंद्र यादव) भी उसी दंपती के मुकदमे से परेशान थीं। परिवार का कहना है कि लगातार तनाव के चलते उन्हें ब्रेन-हैमरेज हुआ और कुछ ही दिनों में उनकी मौत हो गई।
पड़ोसियों का कहना है कि यह इस मोहल्ले की तीसरी बड़ी घटना है, जिसमें मुकदमों की वजह से किसी की जान गई।
“दंपती पूरे मोहल्ले को परेशान करते हैं” — पड़ोसी
पास में रहने वाली अमृता यादव ने रोते हुए कहा:
- “तीन साल से ये लोग मोहल्ले में गाली-गलौज करते हैं। किसी ने रोका तो झगड़ पड़ते हैं।”
- “मेरे पति पर भी छेड़छाड़ का केस दर्ज कराया, जिससे उन्हें हार्ट अटैक हो गया। इसके बाद आरोपी सुरजीत ताना मारते थे — ‘इस बार बच गए, अगली बार नहीं बचोगे।’”
पुलिस पर पक्षपात के आरोप
परिवार और मोहल्ले वालों का आरोप है कि आरोपी महिला का भाई एसटीएफ में कार्यरत है और पति रेलवे में नौकरी करता है। इसी दबाव में पुलिस एकतरफा कार्रवाई कर रही है।
अभय यादव का कहना है —
“अगर कोई इस दंपती का विरोध करता है तो तुरंत पुलिस आ जाती है। लेकिन जब हमने शिकायत दी तो उल्टा हमें ही झूठे केस में फंसा दिया।”

पुलिस का बयान — “जहर की पुष्टि नहीं, विसरा जांच जारी”
मानकनगर थाना प्रभारी अजीत कुमार ने कहा:
- “मृतक परिवार की तरफ से सुसाइड के कारणों को लेकर तहरीर नहीं दी गई है।”
- “पोस्टमॉर्टम में जहर की पुष्टि नहीं हुई है। विसरा जांच के लिए सैंपल भेजा गया है।”
पुलिस का कहना है कि जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
लखनऊ का यह मामला केवल एक पारिवारिक विवाद नहीं बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली, झूठे मुकदमों की गंभीरता और समाज पर उनके असर का आईना है।
एक ओर जहां 44 वर्षीय बेकरी संचालक की आत्महत्या ने परिवार और मोहल्ले को सदमे में डाल दिया है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी उठ खड़ा हुआ है कि क्या प्रशासन और पुलिस समय रहते निष्पक्ष हस्तक्षेप कर पाती तो क्या दो जानें बच सकती थीं?

