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तेंदुए ने बैल को बनाया था निवाला, साल भर बाद भी नहीं मिला मुआवजा

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पशुपालक ने वन विभाग से लगाई गुहार

सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा। जनपद के धौलदेवी ब्लॉक व तहसील भनोली अंतर्गत ग्राम दशोला बडियार में मवेशीखोर गुलदार (तेंदुए) द्वारा बैल मारे जाने के एक साल बाद भी पशु पालक को मुआवजा नहीं मिला है। मवेशी मारे जाने से ग्रामीण को भारी आर्थिक क्षति हुई, लेकिन उनकी सुध किसी ने नहीं ली।

बताना चाहेंगे कि बीते साल गोशाला के निकट ही तेंदुए ने एक बैल को मार अपना निवाला बना डाला था।​ जिससे पशु पालक को बड़ी आर्थिक क्षति भी पहुंची थी।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार गत 18 अगस्त 2024 को गुलदार का ये हमला हुआ था। पीड़ित ग्रामीण लछम सिंह बिष्ट ने बताया कि उस दिन उन्होंने सभी गाय आदि मवेशी गोशाला में खूटें से एक साथ बांधे थे।

करीब सुबह 4 बजे घर के नीचे वाले खेत में स्थित गोशाला के बाहर गुलदार आ पहुंचा। उसने वहां एक बैल पर हमला कर उस मार डाला। जिसके बाद उसने बैल के कुछ हिस्से का खा भी लिया।

लछम सिंह बिष्ट निवासी दशोला बडियार (थाना क्षेत्र दन्या) ने बताया कि गांव के प्रधान और सरपंच को उन्होंने सारी जानकारी तत्कल दे दी थी। घटना का इतना समय बीत जाने के बावजूद भी मुआवजे की कार्रवाई नहीं हुई है। उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे हैं। उन्होंने वन विभाग से इस मामले में कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल मुआवजा देने की मांग की है।

इधर वन विभाग के संबंधित अधिकारियों का कहना है कि विभागीय स्तर पर पशु हानि पर मुआवजा देने का प्रावधान है। बैल के मारे में जाने पर 37 हजार के लगभग क्षतिपूर्ति हेतु दिया जाता है। बजट प्राप्त होने पर प्रभावितों को मुआवजा दिया जाता है।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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