वैश्विक शैक्षणिक सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
हल्द्वानी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (Uttarakhand Open University – UOU), हल्द्वानी ने उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि जोड़ते हुए “अंतरराष्ट्रीय विज़िटिंग प्रोफेसर फैलोशिप कार्यक्रम” (International Visiting Professor Fellowship Programme) का शुभारंभ किया है। यह पहल विश्वविद्यालय को वैश्विक शैक्षणिक नेटवर्क से जोड़ने और ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ODL) के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस फैलोशिप कार्यक्रम के अंतर्गत ओपन एवं दूरस्थ शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को दो सप्ताह की अवधि के लिए विश्वविद्यालय में आमंत्रित किया जाएगा। इस दौरान संयुक्त शोध परियोजनाएं, अकादमिक संवाद, विशेष व्याख्यान एवं कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, जिससे ज्ञान के आदान-प्रदान को नई गति मिलेगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार फरवरी–मार्च 2026 सत्र में इस कार्यक्रम के पहले कोहोर्ट (Cohort) के तहत एक अंतरराष्ट्रीय विज़िटिंग प्रोफेसर को आमंत्रित किया जाएगा। इस पहल से विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों को वैश्विक शैक्षणिक अनुभवों से सीखने, सह-अध्ययन करने तथा अनुसंधान के नए आयामों की पहचान करने का अवसर प्राप्त होगा।
वहीं, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों से प्रत्यक्ष संवाद, अकादमिक मार्गदर्शन और वैश्विक दृष्टिकोण प्राप्त करने का सशक्त मंच प्रदान करेगा। साथ ही, यह पहल पाठ्यक्रम नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था और विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगी।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहानी ने कहा,
“उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सहयोग के लिए निरंतर प्रयासरत है। अंतरराष्ट्रीय विज़िटिंग प्रोफेसर फैलोशिप कार्यक्रम हमारे अकादमिक समुदाय को समृद्ध करेगा और विश्वविद्यालय को वैश्विक शिक्षा मंच पर एक विशिष्ट पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसे हम सतत अंतरराष्ट्रीय सहभागिता की दिशा में एक मजबूत पहल के रूप में देखते हैं।”
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्यक्रम उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी शिक्षा और अनुसंधान का एक सशक्त केंद्र बनाने में मदद करेगा।

