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गरुड़: बंदरों के जबर्दस्त आतंक से बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल

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✍️ मटेना के ग्रामीणों ने उठाई बंदर पकड़ने की मांग
✍️ साग—सब्जी व फसलें चौपट, खेती बचानी मुश्किल

सीएनई रिपोर्टर, गरुड़: बंदरों की समस्या से आजिज आ चुके मटेना के ग्रामीणों ने वन क्षेत्राधिकारी बैजनाथ से बच्चों के स्कूल खुलने से पहले पिंजड़ा लगाए जाने की मांग की है। ग्रामीणों ने वन विभाग से बंदरों के आतंक से निजात दिलाए जाने की मांग की है।

मटेना के क्षेत्र पंचायत सदस्य भोला दत्त तिवारी, ग्राम प्रधान रविशंकर बिष्ट, उप प्रधान नीमा बड़सीला ने वन क्षेत्राधिकारी को भेजे ज्ञापन में कहा है कि एक जुलाई से विद्यालय खुलने वाले हैं। रास्तों में कटखने बंदरों का खौफ बना रहता है। जिससे उन्हें बच्चों की सुरक्षा की चिंता सता रही है। बंदर अब तक कई बच्चों पर हमला कर उन्हें घायल कर चुके हैं। साथ ही बंदरों ने उनकी शाक-सब्जी और फसलें चौपट कर दी है। बंदर भगाने पर लोगों पर हमला भी कर रहे हैं।

बंदरों के आतंक के चलते बच्चों का स्कूल जाना, महिलाओं का खेतों में काम करना और बुजुर्गों का घरों के आंगन में बैठना दूभर हो गया है। बंदरों का झुंड रास्तों में बैठे रहता है और वे राह चलते लोगों पर हमला कर रहे हैं। गांव के कालिका मंदिर से गुजरना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कालिका मंदिर के पास पिंजड़ा लगाकर बंदरों को पकड़ने और वहां पर नियमित एक वन कर्मी को तैनात किए जाने की मांग की। गांव के सामाजिक कार्यकर्ता हेम चंद्र पांडे, फकीरा दत्त बिष्ट, गिरीश खोलिया, ख्याली दत्त जोशी, संजय बड़सीला, कैलाश खुल्बे आदि ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि शीघ्र उनकी मांग नहीं मानी गई तो वे स्कूली बच्चों को साथ लेकर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

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