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अरे छोड़िए सरकार, अपने लिये ही नहीं कर पा रहे व्यवस्था- आम आदमी का क्या होगा

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हल्द्वानी । लगातार बढ़ रहे मरीज और दम तोड़ रही स्वास्थ्य सेवाओं के आरोपों के बीच प्रदेश के सदन में नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के साथ जो कुछ हुआ उससे तो मीडिया व सरकार पर निरंकुशता के आरोप लगा रहे लोगों की बातों को ही बल मिलता है दरअसल स्वास्थ्य खराब होने के बाद डॉ इंदिरा हृदयेश को एसडीएच में भर्ती कराया गया था यहां उन्हें निमोनिया की शिकायत की पुष्टि हुई और डॉक्टरों ने उन्हें भर्ती होने की सलाह दी । साथ ही उनकी कोरोना जाँच के लिये सैम्पल भी भेजे गये थे। लेकिन यह जांच भी सरकारी नहीं प्राइवेट लैब में कराई गई । इसके पहले कि कोरोना की रिपोर्ट आती इंदिरा हृदयेश को उनके परिजन घर ले गए हालांकि उनके एसडीएच में व्यवस्थाओं से असंतुष्ट होने की बात सामने आई लेकिन अब सरकारी प्रवक्ता स्वयं कह रहे हैं, की उन्होने ही इन्दिरा को देहरादून बुलवाया था।डॉक्टर ह्रदयेश ने भी खुद ही कहा है के प्रशासन के प्रवक्ता व कैबिनेट मिनिस्टर मदन कौशिक ने उन्हें फोन कर कर देहरादून बुलाया था, कल दोपहर बाद इंदिरा हरदेश देहरादून के हैलिपैड पहुंचीं, यहां से मैक्स हॉस्पिटल की टीम उन्हें हॉस्पिटल ले गई। उनका उपचार शुरू हुआ लेकिन शाम होते होते इंदिरा के मैक्स में अलग से कक्ष ना मिलने के कारण व्यवस्था से असंतुष्ट होने की बात आने लगी देर रात तक ये खबरें पुष्ट हो गई अलग रूम ना मिलने के कारण ह्रदयेश ने मैक्स हॉस्पिटल छोड़ दिया है, इसके बाद उन्हें आनन-फानन में सरकारी पहल पर सिनर्जी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। यह है 2 दिन से हॉस्पिटल- हॉस्पिटल घूम रही नेता प्रतिपक्ष के साथ बीत रही कहानी का सारांश। पूरी कहानी में एक बात खुलकर सामने आ गई है कि हल्द्वानी से देहरादून तक के हर कदम पर सरकार नेता प्रतिपक्ष के साथ है। लेकिन यह यह भी सत्य है कि सरकार कर भी कुछ नही पा रही। मैक्स में प्रदेश की सबसे अनुभवी नेता को एक अलग से कक्ष भी ना मिलने की पूरी जानकारी सरकारी सरकार और सरकारी तंत्र को थी इंदिरा हरदेश ने खुद ही दावा किया है के शासकीय प्रवक्ता जिलाधिकारी ने मैक्स में लगातार संपर्क करके अलग से पक्ष करने की बात की थी लेकिन मैक्स प्रशासन उन्हें एक कमरा भी ना दे सका। कहती है की इसी से पता चलता है कि सरकार का महामारी काल में कितना इकबाल बुलंद है। इससे पहले प्रदेश में भाजपा के अध्यक्ष और कालाढूंगी क्षेत्र के विधायक बंशीधर भगत के पुत्र विकास भगत भी कोरोना की चपेट में आये थे और उन्हें भी इलाज के लिए हल्द्वानी भर्ती कराया गया था , लेकिन कुछ ही दिन बाद विकास ने खुद को डिस्चार्ज कराकर नोएडा के एक निजी चिकित्सालय में अपने लिए इंतजाम करवा लिया। विकास सत्ताधारी पार्टी के हैं इसलिए उन्होंने इस बात को लेकर कोई सवाल नहीं उठाया लेकिन महामारी काल में सरकारी और निजी चिकित्सालय की व्यवस्था की पोल पूरी तरह से खुलकर सामने आ गई है ।

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