मानसिक अवसाद के चलते उठाया आत्मघाती कदम
पुलिस की तत्परता से बची जान
CNE REPORTER, Haldwani : काठगोदाम स्थित गौला बैराज उस समय चीख-पुकार और अफरा-तफरी का केंद्र बन गया, जब डिप्रेशन (मानसिक अवसाद) से जूझ रहे एक 80 वर्षीय बुजुर्ग ने मौत को गले लगाने के इरादे से बैराज के गहरे पानी में छलांग लगा दी। गनीमत रही कि सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची जल पुलिस ने देवदूत बनकर बुजुर्ग को डूबने से पहले ही सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
घटना शनिवार की है, जब कुसुमखेड़ा निवासी मोहन चंद्र उपाध्याय पुत्र नरोत्तम उपाध्याय ने मानसिक तनाव के चलते गौला बैराज में छलांग लगा दी। प्रत्यक्षदर्शी दीपक भंडारी ने तत्काल इसकी सूचना जल पुलिस को दी। जीवन और मृत्यु के बीच के इन चंद मिनटों में हेड कांस्टेबल प्रताप गड़िया और उनकी पुलिस टीम ने असाधारण फुर्ती दिखाई। पुलिस टीम ने स्थानीय लोगों के सक्रिय सहयोग से तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और बुजुर्ग को सुरक्षित पानी से बाहर निकालकर किनारे पहुँचाया।
रेस्क्यू के बाद पुलिस ने जब बुजुर्ग के परिजनों से संपर्क किया, तो उनके पुत्र यत्तीश उपाध्याय और ममता उपाध्याय मौके पर पहुँचे। परिजनों ने बताया कि मोहन चंद्र उपाध्याय लंबे समय से डिप्रेशन (मानसिक अवसाद) का शिकार हैं और उनका नियमित इलाज चल रहा है। संभवतः इसी बीमारी के कारण उपजी निराशा में उन्होंने यह कदम उठाया। पुलिस ने बुजुर्ग की उचित काउंसलिंग कर उन्हें उनके परिवार के सुपुर्द किया।
इस चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू को सफल बनाने में हेड कांस्टेबल प्रताप गड़िया और पुलिस टीम की विशेष भूमिका रही। पुलिस की इस त्वरित कार्यवाही ने एक अनहोनी को टालते हुए बुजुर्ग को जीवनदान दिया। स्थानीय निवासियों ने पुलिस की इस संवेदनशीलता और अदम्य साहस की भूरी-भूरी प्रशंसा की है।



