सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा
जिले के भैसियाछाना ब्लाक अंतर्गत गत मंगलवार को एक महिला का स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने से पूर्व आधी राह जंगल में प्रसव होने के मामले को जिलाधिकारी वंदना सिंह ने गंभीरता से लिया है। जिलाधिकारी ने असुविधा के कारण ऐसी घटनाओं अथवा प्रसविता/शिशु की मृत्यु होने की दशा में संबंधित क्षेत्र की आशा, एएनएम व प्रभारी चिकित्साधिकारी जिम्मेदार होंगे। उन्होंने कहा कि असुविधा की स्थिति में प्रसव तिथि से 04 दिन पहले ही गर्भवर्ती को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती करा दिया जाए। (आगे पढ़िये)
गौरतलब है कि भैसियाछाना ब्लाक के पतलचौरा गांव की गर्भवती महिला प्रियंका को गत मंगलवार को प्रसव पीड़ा लगी, तो परिजन उसे अस्पताल ले जाने की तैयारी की, लेकिन उनका गांव निकटवर्ती स्वास्थ्य केंद्र भैसियाछाना पूरे पांच किमी की दूरी पर है। जहां सड़क मार्ग के अभाव में खड़ी चढ़ाई पार कर पैदल जाने की मजबूरी है। लिहाजा एक डोली में उसे लेकर ग्रामीण चले। करीब ढ़ाई किमी तक की खड़ी चढ़ाई के बाद अचानक गर्भवती की प्रसव पीड़ा बढ़ी और उसे मार्ग में डोली से उतारना पड़ा। इसके बाद जंगल से गुजरने वाले इस राह में ही उसका प्रसव हो गया। जिससे काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा। (आगे पढ़िये)
डीएम ने दिए ये निर्देश
मामला संज्ञान में आने के बाद जिलाधिकारी वन्दना सिंह ने मुख्य चिकित्साधिकारी को सख्त निर्देश दिए हैं कि उन क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को आशा व एएनएम के माध्यम से प्रसव तिथि से 04 दिन पहले ही नजदीकी चिकित्सा केंद्र में भर्ती करा दिया जाए, जिन क्षेत्रों में गांव सड़क से दूर हों या जहॉ पर आने-जाने की सुविधा उपलब्ध नहीं हो या सड़क बन्द हो अथवा मार्ग क्षतिग्रस्त हो। जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देश दिये हैं कि यदि किसी परिस्थितिवश गर्भवती महिला चिकित्सालय में प्रसव पूर्व भर्ती नहीं होना चाहती है, तो आशा एवं एएनएम उनसे लिखित में सहमति प्राप्त कर लें और लगातार उनके संपर्क में रहें। उन्होंने कहा कि भविष्य में कोई भी प्रसव जंगल अथवा रास्ते में होते हैं या प्रसव के दौरान गर्भवती माता अथवा बच्चे की मृत्यु होती है या चिकित्सालय तक समय पर नहीं पंहुचती, तो ऐसी स्थिति में सम्बन्धित क्षेत्र की एएनएम, आशा एवं प्रभारी चिकित्सा अधिकारी उत्तरदायी रहेंगे।
सीएनई में पूर्व प्रकाशित संबंधित ख़बर —