उत्तराखंड में काम ठप होने के आसार
सरकार की अनदेखी पर बड़ा फैसला
सीएनई रिपोर्टर, देहरादून/अल्मोड़ा | उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ ने अपनी लंबे समय से लंबित 27 सूत्रीय मांगों के समाधान में लगातार हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्यव्यापी आंदोलन के दूसरे चरण की घोषणा कर दी है। 23 मार्च 2026 से प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया गया है।
उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ कुमाऊं के मंडल अध्यक्ष एसएस डंगवाल ने बताया कि महासंघ ने इस संबंध में उत्तराखण्ड शासन के मुख्य सचिव को विस्तृत पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराया है।
महासंघ के पत्र के अनुसार, विभिन्न मांगों को लेकर पूर्व में कई बार शासन स्तर पर पत्राचार किया जा चुका है। इसमें 16 अक्टूबर 2025, 4 जुलाई 2025, 2 जनवरी 2026 और 22 जनवरी 2026 सहित कई तिथियों पर भेजे गए पत्रों का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा वित्त विभाग और मुख्यमंत्री कार्यालय को भी अलग-अलग पत्रों के माध्यम से समस्याओं से अवगत कराया गया, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
महासंघ ने बताया कि 22 जनवरी 2026 को आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में समस्याओं के समाधान के लिए विस्तृत चर्चा हुई थी और सकारात्मक निर्णय की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई प्रगति नहीं हुई। इससे प्रदेशभर के डिप्लोमा इंजीनियरों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
स्थिति से निराश होकर महासंघ ने 2 फरवरी 2026 से 23 फरवरी 2026 तक प्रथम चरण का आंदोलन चलाया। इस दौरान क्रमबद्ध तरीके से विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए। 23 फरवरी को देहरादून में महासंघ के बैनर तले परेड ग्राउंड से सचिवालय तक रैली निकाली गई और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी सौंपा गया। इसके बावजूद शासन की ओर से कोई संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
महासंघ का आरोप है कि आंदोलन के पहले चरण के बाद भी शासन स्तर पर किसी प्रकार की आवश्यक कार्यवाही नहीं की गई, जिससे कर्मचारियों में असंतोष और बढ़ गया है। महासंघ ने स्पष्ट किया कि लगातार अनदेखी के चलते अब आंदोलन को और तेज करना मजबूरी बन गई है।
इसी क्रम में महासंघ की उच्चस्तरीय समिति की बैठक में दूसरे चरण के आंदोलन का निर्णय लिया गया, जिसके तहत
9 मार्च 2026 से 20 मार्च 2026 तक देहरादून स्थित मुख्यालय पर क्रमिक धरना-प्रदर्शन किया गया और अब आगे 23 मार्च 2026 से प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।
मंडल अध्यक्ष एसएस डंगवाल ने यह भी कहा कि वह आंदोलन और हड़ताल के पक्ष में नहीं है, लेकिन शासन द्वारा समस्याओं की लगातार उपेक्षा और लंबित मामलों पर निर्णय न लेने के कारण उसके पास कोई अन्य विकल्प नहीं बचा है। महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही मांगों का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र रूप दिया जाएगा।


