CNE REPORTER, देहरादून | उत्तराखंड की सियासत में आज का दिन बड़े बदलावों और नई ऊर्जा के संचार का साक्षी बना। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी टीम का विस्तार करते हुए 5 नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया है। देहरादून स्थित राजभवन में शुक्रवार की सुबह ठीक 10 बजे आयोजित एक भव्य समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) गुरमीत सिंह ने इन विधायकों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
इस विस्तार के साथ ही धामी कैबिनेट अब अपनी पूरी क्षमता यानी 12 मंत्रियों के साथ ‘फुल फॉर्म’ में आ गई है।

शपथ लेने वाले ‘धामी के पांच सारथी’
कैबिनेट विस्तार में जिन विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली, उनमें अनुभव और क्षेत्रीय रसूख का अनूठा संगम देखने को मिला है:
- मदन कौशिक (हरिद्वार): पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और कद्दावर ब्राह्मण नेता, जिनका अनुभव सरकार के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
- भरत चौधरी (रुद्रप्रयाग): रुद्रप्रयाग की आवाज को कैबिनेट में मजबूती देने वाले युवा और सक्रिय चेहरा।
- प्रदीप बत्रा (रुड़की): रुड़की से लगातार तीन बार के विजेता, जिनका दबदबा अब शासन स्तर पर दिखेगा।
- खजान दास (राजपुर रोड): दलित चेहरे के रूप में सामाजिक संतुलन साधने की बड़ी जिम्मेदारी।
- राम सिंह कैड़ा (भीमताल): कुमाऊं की राजनीति के अहम खिलाड़ी, जिन्हें उनकी मेहनत का फल मिला है।
सियासी समीकरण: क्षेत्रीय साख और जातीय गणित का ‘कॉम्बिनेशन’
सरकार के इस कदम को महज एक प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ माना जा रहा है। सरकार ने अपने कार्यकाल के चार साल पूरे होने से ठीक तीन दिन पहले यह दांव खेलकर सबको चौंका दिया है।

“यह विस्तार केवल खाली कुर्सियों को भरना नहीं है, बल्कि गढ़वाल से कुमाऊं तक और सामाजिक वर्गों के बीच एक सशक्त संतुलन बनाने का प्रयास है।”
- रुठों को मनाया, दिग्गजों को नवाजा: मदन कौशिक जैसे वरिष्ठ नेताओं को कैबिनेट में वापस लाकर भाजपा ने अपने भीतर के असंतोष को थामने की कोशिश की है।
- रिक्तियों की भरपाई: साल 2023 में चंदन रामदास जी के आकस्मिक निधन और हाल ही में प्रेमचंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद खाली हुए पदों को भरकर धामी ने प्रशासनिक गति को तेज करने का संकेत दिया है।
दिल्ली से देहरादून तक की दौड़ पर लगा विराम
पिछले काफी समय से मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं के चलते विधायकों की देहरादून से दिल्ली तक की दौड़ जारी थी। भाजपा हाईकमान ने बहुत ही सधे हुए अंदाज में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को प्राथमिकता दी है। इस बार गढ़वाल मंडल का दबदबा थोड़ा ज्यादा दिखाई दे रहा है, लेकिन कुमाऊं को भी राम सिंह कैड़ा के जरिए साधे रखा गया है।
निष्कर्ष: क्या ‘वैतरणी’ पार कराएगा यह विस्तार?
2027 की चुनावी वैतरणी को पार करने के लिए भाजपा ने अब अपने सभी मोहरे फिट कर दिए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ कर दिया है कि उनकी टीम अब विकास की ‘डबल इंजन’ रफ्तार के साथ जनता के बीच जाएगी।


