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SSJ विश्वविद्यालय नियुक्तियों पर विवाद: भट्ट ने उठाए गंभीर सवाल

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कुलाधिपति से हस्तक्षेप की अपील

CNE REPORTER, अल्मोड़ा। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय (SSJ) में प्राध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होते ही विवादों के घेरे में आ गई है। युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव, क्षेत्र पंचायत सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल भट्ट ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर अनियमितताओं और भाई-भतीजावाद के गंभीर आरोप लगाते हुए वर्तमान चयन प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोकने की मांग की है।

प्रमुख आपत्तियां और अनियमितताएं

गोपाल भट्ट ने प्रेस को जारी बयान में विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर कई तकनीकी और नैतिक सवाल खड़े किए हैं:

  • अल्प समयावधि और पारदर्शिता का अभाव: विश्वविद्यालय द्वारा 10 फरवरी को विज्ञापन जारी किया गया और आवेदन की अंतिम तिथि 9 मार्च रखी गई। भट्ट का कहना है कि मानकों के अनुसार कम से कम 45 दिन का समय दिया जाना चाहिए था। इतनी जल्दबाजी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाती है।
  • आरक्षण और रोस्टर प्रणाली में धांधली: आरोप है कि अगस्त माह में रोस्टर पर आमंत्रित की गई आपत्तियों को दरकिनार कर दिया गया। अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण मानकों का उचित पालन नहीं किया जा रहा है।
  • भाई-भतीजावाद के आरोप: भट्ट ने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि कुछ विशिष्ट विभागों में प्रशासनिक पदों पर बैठे लोग अपने रिश्तेदारों, भाई-भतीजों और पत्नियों को लाभ पहुँचाने के लिए रोस्टर का दुरुपयोग कर रहे हैं।
  • संविदा और अतिथि शिक्षकों की अनदेखी: वर्षों से विपरीत परिस्थितियों में सेवा दे रहे शिक्षकों के भविष्य पर तलवार लटक रही है। भट्ट ने मांग की कि “वन टाइम सेटलमेंट” के तहत इन अनुभवी शिक्षकों का विनियमितीकरण किया जाना चाहिए।

न्यायिक पेच और प्रशासनिक विफलता

अधिवक्ता गोपाल भट्ट ने ध्यान दिलाया कि वर्तमान में शिक्षकों के विकल्प (Option) से संबंधित मामला उच्च न्यायालय में लंबित है। कुमाऊं विश्वविद्यालय और सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के मध्य शिक्षकों के स्थानांतरण और विकल्प का विषय अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है। ऐसी अनिश्चितता की स्थिति में नई नियुक्तियों की जल्दबाजी समझ से परे है।

“यदि वर्तमान रोस्टर सही है, तो पूर्व की व्यवस्था गलत क्यों थी? और यदि पूर्व की व्यवस्था सही थी, तो वर्तमान में बदलाव का आधार क्या है? विश्वविद्यालय के कुलपति और प्रशासनिक अधिकारियों को इन भ्रष्टाचारपूर्ण विसंगतियों का जवाब देना होगा।” — गोपाल भट्ट, प्रदेश महासचिव, युवा कांग्रेस

कुलाधिपति से हस्तक्षेप की अपील

युवा नेता ने माननीय कुलाधिपति (राज्यपाल) और उच्च शिक्षा विभाग से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि:

  1. नियुक्ति प्रक्रिया पर तब तक तत्काल रोक लगाई जाए जब तक सभी आपत्तियों का निस्तारण न हो जाए।
  2. आरक्षण और रोस्टर की निष्पक्ष जांच की जाए।
  3. कार्यरत अतिथि व संविदा शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए।

भट्ट ने चेतावनी दी है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी हठधर्मिता नहीं छोड़ी और नियुक्तियों में पारदर्शिता नहीं बरती, तो युवा कांग्रेस सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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