जालसाज अंकित चौधरी पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार
सस्ता सीमेंट और ‘शर्मा जी’ का मायाजाल !
CNE REPORTER, अल्मोड़ा। साइबर ठगों के जाल में अब केवल आम आदमी ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े कारोबारी भी फंस रहे हैं। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला अल्मोड़ा के दन्या क्षेत्र में सामने आया, जहां एक शातिर ठग ने खुद को सीमेंट कंपनी का बड़े ओहदे वाला अफसर बताकर एक ए-क्लास कांट्रेक्टर (प्रथम श्रेणी ठेकेदार) को लाखों की चपत लगा दी। हालांकि, अल्मोड़ा पुलिस टीम ने पश्चिम बंगाल में छिपे अंतरराज्यीय ठग को न केवल दबोचा, बल्कि ठेकेदार की डूबी हुई पूरी रकम भी बरामद करवा ली।
दरअसल, ठगी की यह पटकथा 30 सितंबर 2024 को लिखी गई थी। दन्या निवासी ए-क्लास कांट्रेक्टर दिलीप सिंह को एक फोन आया। फोन करने वाले ने बड़े आत्मविश्वास के साथ अपना परिचय “शर्मा जी” के रूप में दिया और खुद को सिकंदराबाद (बुलंदशहर) स्थित एक नामी सीमेंट कंपनी का मार्केटिंग मैनेजर बताया। आरोपी ने अपनी बातों के जाल में ठेकेदार को ऐसा उलझाया कि उन्हें विश्वास हो गया कि वे सीधे कंपनी से सस्ता सीमेंट खरीद रहे हैं। मुनाफे के फेर में ठेकेदार ने आरोपी के बताए खाते में 5,20,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए। पैसा मिलते ही “शर्मा जी” का फोन बंद हो गया और सीमेंट की एजेंसी के सारे वादे हवा हो गए।
दर्ज हुई प्राथमिकी, शुरू हुआ पुलिस का ‘ऑपरेशन रिकवरी’
ठगी का अहसास होने के बाद पीड़ित ने 9 अक्टूबर 2024 को साइबर सेल और थाना दन्या में प्राथमिकी दर्ज कराई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अल्मोड़ा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल टीमों का गठन किया। तकनीकी विश्लेषण और सर्विलांस के जरिए पता चला कि ठगी का मुख्य केंद्र उत्तराखंड या उत्तर प्रदेश नहीं, बल्कि हजारों किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल है।
अपर पुलिस अधीक्षक हरबन्स सिंह और क्षेत्राधिकारी अल्मोड़ा बलवंत सिंह के कुशल पर्यवेक्षण में थानाध्यक्ष दन्या दिनेश नाथ महंत व प्रभारी साइबर सेल के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। इस टीम ने कोलकाता के चप्पे-चप्पे को खंगाला और अंततः 21 वर्षीय आरोपी अंकित चौधरी को उसके ठिकाने (86 कैनाल साउथ रोड, कोलकाता) से गिरफ्तार कर लिया।
न्यायालय में कबूला जुर्म, लौटानी पड़ी पूरी रकम
पुलिस की पुख्ता घेराबंदी और विवेचक जानकी भंडारी की प्रभावी जांच के आगे आरोपी के सारे बहाने धरे के धरे रह गए। जब मामला न्यायालय के समक्ष पहुंचा, तो आरोपी ने अपना गुनाह स्वीकार कर लिया। पुलिस के दबाव और कानूनी शिकंजे के चलते आरोपी को ठगी गई पूरी धनराशि 5 लाख 20 हजार रुपये पीड़ित ठेकेदार को वापस करनी पड़ी।
इस हाई-प्रोफाइल ठगी का पर्दाफाश करने और शत-प्रतिशत रिकवरी कराने में प्रभारी निरीक्षक महिला कोतवाली जानकी भंडारी, थानाध्यक्ष दन्या दिनेश नाथ महंत, अपर उपनिरीक्षक पुष्कर सिंह (थाना चौखुटिया), अपर उपनिरीक्षक फिरोज खान (साइबर सेल) और हेड कांस्टेबल धीर सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।



