ठंड से बचने की कोशिश ने छीन ली ज़िंदगियाँ
भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। बीती शाम भिकियासैंण क्षेत्र में ठंड से राहत पाने की एक असावधानी ने दो परिवारों के घरों के चिराग बुझा दिए। जैनल चौराहे के समीप खड़ी एक पिकअप में पैट्रोमैक्स जलाकर सो रहे दो व्यक्तियों की दम घुटने से दर्दनाक मौत हो गई। घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।

सायं लगभग 06:30 बजे पुलिस को सूचना मिली कि जैनल चौराहे के पास वाहन संख्या UP20CT-0048 (पिकअप) में दो व्यक्ति मूर्छित अवस्था में पड़े हैं। सूचना मिलते ही चौकी प्रभारी भिकियासैंण, उपनिरीक्षक संजय जोशी पुलिस बल के साथ तत्काल मौके पर पहुँचे। दोनों को तत्काल 108 एम्बुलेंस की सहायता से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भिकियासैंण लाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया।
प्रथम दृष्टया जाँच में सामने आया कि दोनों व्यक्ति कड़ाके की ठंड से बचने के लिए पिकअप के भीतर पैट्रोमैक्स जलाकर सो गए थे। बंद वाहन में जल रही पैट्रोमैक्स से निकली जहरीली गैस (कार्बन मोनोऑक्साइड) ने धीरे-धीरे उनकी सांसें रोक दीं और उन्हें मौत की नींद सुला दिया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए अपर पुलिस अधीक्षक अल्मोड़ा, हरबन्स सिंह द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण किया गया तथा अग्रिम विधिक कार्रवाई के लिए थानाध्यक्ष भतरौजखान अवनीश कुमार को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
मृतकों का विवरण:
- अलाउदीन पुत्र जलाउदीन, उम्र 42 वर्ष, निवासी ग्राम पीपली अहीर, थाना ठाकुरद्वारा, जनपद मुरादाबाद (उ0प्र0)
- रवि पुत्र गंगा राम, उम्र 30 वर्ष, निवासी ग्राम महमूदपुर कैशो, थाना ठाकुरद्वारा, जनपद मुरादाबाद (उ0प्र0)
दोनों मृतक रोज़गार की तलाश में बाहर आए थे, पर किसी को क्या पता था कि ठंड से बचने की एक कोशिश उनकी आख़िरी रात बन जाएगी। आज उनके घरों में मातम पसरा है और परिजन बेसुध हैं।
सावधानी ही बचाव है: बंद स्थान पर हीटर या पैट्रोमैक्स क्यों है ‘साइलेंट किलर’?
ठंड के मौसम में अक्सर लोग बंद कमरे, टेंट या वाहन के भीतर अंगीठी, हीटर या पैट्रोमैक्स जलाकर सो जाते हैं। यह असावधानी जानलेवा हो सकती है, इसके पीछे के विज्ञान को समझना अत्यंत आवश्यक है:
- कार्बन मोनोऑक्साइड का खतरा: जब किसी बंद जगह पर आग (कोयला, गैस या तेल) जलती है, तो सीमित ऑक्सीजन के कारण कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) गैस बनने लगती है। यह एक रंगहीन और गंधहीन गैस है, जिसका पता नहीं चल पाता।
- ऑक्सीजन की कमी: आग जलने के लिए ऑक्सीजन का उपयोग करती है। बंद कमरे या वाहन में धीरे-धीरे ऑक्सीजन खत्म हो जाती है और कार्बन मोनोऑक्साइड खून में मिलकर ऑक्सीजन के प्रवाह को रोक देती है।
- नींद में ही मौत: कार्बन मोनोऑक्साइड शरीर को सुस्त कर देती है। सोने की स्थिति में व्यक्ति को घुटन का एहसास भी नहीं होता और वह गहरी नींद में ही बेहोश हो जाता है, जो अंततः मृत्यु का कारण बनती है।
अपील: कभी भी बंद कमरे या वाहन में आग जलाकर न सोएं। यदि हीटर का प्रयोग कर रहे हैं, तो वेंटिलेशन (खिड़की या दरवाजा थोड़ा खुला रखना) सुनिश्चित करें।

