कैंपों में सुरक्षा सख्त, पुनर्वास पर सीधी नज़र !
सीएनई रिपोर्टर, हल्द्वानी बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में उच्चतम न्यायालय के हालिया निर्देशों के अनुपालन में नैनीताल जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पुनर्वास का लाभ देने के लिए क्षेत्र में विशेष शिविर संचालित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में आज वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की टीम ने विभिन्न केंद्रों का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्थाओं और आवेदन प्रक्रिया का जायजा लिया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉक्टर मंजूनाथ टीसी के मार्गदर्शन में पुलिस अधीक्षक हल्द्वानी मनोज कुमार कत्याल ने उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के तत्वावधान में आयोजित विभिन्न शिविरों का निरीक्षण किया। उन्होंने रेलवे स्टेशन हल्द्वानी, अंजुमन इस्लामिया बालिका पूर्व माध्यमिक विद्यालय किदवई नगर, राजकीय प्राथमिक विद्यालय बनभूलपुरा, राजकीय कन्या इंटर कॉलेज बनभूलपुरा, राजकीय इंटर कॉलेज बनभूलपुरा एवं मदरसा नैनीताल पब्लिक स्कूल बनभूलपुरा में स्थापित केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था जांची।

निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक ने वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिविर स्थलों पर अनुशासन बनाए रखना और आम जनता के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य करना प्राथमिकता होनी चाहिए। इस निरीक्षण के दौरान मनोज कुमार कत्याल पुलिस अधीक्षक हल्द्वानी, दिनेश फर्त्याल प्रभारी निरीक्षक कोतवाली बनभूलपुरा, राजकीय रेलवे पुलिस के अधिकारी एवं कर्मचारीगण तथा स्थानीय पुलिस बल उपस्थित रहे।
पुनर्वास प्रक्रिया और स्थानीय चुनौतियां
उच्चतम न्यायालय के आदेश पर 20 मार्च से प्रारंभ हुई इस प्रक्रिया के तहत लगभग 4,365 परिवारों को योजना से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। याचिकाकर्ता इशरत अली के अनुसार, अब तक लगभग 7,000 फॉर्म वितरित किए जा चुके हैं, किंतु जमा होने वाले आवेदनों की संख्या अभी कम है। स्थानीय निवासियों में अपने वर्तमान आशियाने छिनने का भय और दस्तावेजों की कमी एक बड़ी बाधा बनकर उभर रही है।
कई आवेदकों के पास आधार कार्ड, बिजली बिल या अन्य आवश्यक पहचान पत्र उपलब्ध नहीं हैं। इसके अतिरिक्त, फॉर्म भरने की जटिलता के कारण तहसील परिसर में शपथ पत्र (एफिडेविट) बनवाने वालों की भारी भीड़ देखी जा रही है। न्यायालय के निर्देशानुसार, फॉर्म वितरण और जमा करने की यह प्रक्रिया 31 मार्च तक अनवरत जारी रहेगी।
उच्चतम न्यायालय का मानवीय दृष्टिकोण और सहायता
24 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई में उच्चतम न्यायालय ने मानवीय पक्ष को ऊपर रखते हुए कहा था कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के परिवारों को बेघर नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं दी हैं:
- पुनर्वास शिविर: उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को न्यायिक अधिकारियों की देखरेख में शिविर लगाने की जिम्मेदारी दी गई है।
- वित्तीय सहायता: रेलवे और राज्य सरकार संयुक्त रूप से प्रत्येक पात्र परिवार के मुखिया को छह माह तक 2,000 रुपये प्रति माह की ‘एक्स-ग्रेशिया’ (अनुग्रह राशि) सहायता प्रदान करेंगे।
- डोर-टू-डोर अभियान: सामाजिक कार्यकर्ताओं और काउंसलरों के माध्यम से घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने और उनकी पात्रता जांचने के निर्देश दिए गए हैं।
- केस-टू-केस सुनवाई: न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि राहत का लाभ सभी पर समान रूप से लागू न होकर प्रत्येक मामले की पात्रता के आधार पर तय होगा।
बनभूलपुरा प्रकरण: अब तक का घटनाक्रम
यह विवाद दशकों पुराना है, जिसका संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है:
- वर्ष 2007-2016: उच्च न्यायालय द्वारा अतिक्रमण हटाने के बार-बार निर्देश और राज्य सरकार के दावों का खारिज होना।
- वर्ष 2017-2022: मामला पहली बार उच्चतम न्यायालय पहुंचा। बेदखली अधिनियम के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर अमल नहीं हुआ।
- 5 जनवरी 2023: उच्चतम न्यायालय ने 50 हजार लोगों को अचानक हटाने पर रोक लगाते हुए पुनर्वास योजना को अनिवार्य बताया।
- 8 फरवरी 2024: अवैध निर्माण हटाने के दौरान क्षेत्र में हिंसा भड़की, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया।
- 24 फरवरी 2026: उच्चतम न्यायालय ने पात्र परिवारों की पहचान और आवेदन के लिए विस्तृत रूपरेखा तैयार करने का आदेश दिया।
इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई अब 28 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें प्रशासन द्वारा प्रस्तुत पात्रता रिपोर्ट पर विचार किया जाएगा।


