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बनभूलपुरा केस: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, रेलवे की जमीन से हटेगा कब्जा

SSP के नेतृत्व में व्यवस्था नियंत्रण के लिए फ्लैग मार्च

CNE REPORTER, हल्द्वानी (नैनीताल): बनभूलपुरा केस फैसला : हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे की भूमि पर लंबे समय से चले आ रहे अतिक्रमण के मामले में उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि संबंधित भूमि सरकारी है और वहां निवास कर रहे लोग उस पर अपने मालिकाना हक का दावा नहीं कर सकते। हालांकि, मानवीय पक्ष को ध्यान में रखते हुए अदालत ने प्रभावित परिवारों के व्यवस्थित पुनर्वास के निर्देश दिए हैं।

इस संवेदनशील स्थिति को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में सुरक्षा व्यवस्था नियंत्रण हेतु फ्लैग मार्च निकाला गया, ताकि क्षेत्र में शांति और कानून व्यवस्था बनी रहे।

Banbhoolpura Encroachment Case

उच्चतम न्यायालय के आदेश के मुख्य बिंदु

उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए:

  • पुनर्वास प्रक्रिया: प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए पात्र परिवारों की पहचान जिला मजिस्ट्रेट द्वारा की जाएगी।
  • विशेष शिविर का आयोजन: रमजान के पर्व के बाद, 19 मार्च से प्रभावित परिवारों के आवेदन पत्र भरने के लिए 10 दिवसीय विशेष शिविर लगाए जाएंगे।
  • वित्तीय सहायता: जो परिवार विस्थापन के लिए पात्र पाए जाएंगे, उन्हें छह माह तक 2,000 रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
  • बेदखली पर रोक: न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि अप्रैल में होने वाली अगली सुनवाई तक किसी भी व्यक्ति को जबरन हटाया नहीं जाएगा।

न्यायालय की तल्ख टिप्पणी: “जनहित सर्वोपरि”

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि रेलवे की विकासात्मक परियोजनाओं के लिए भूमि की आवश्यकता अनिवार्य है। उन्होंने कहा:

“जब बेहतर सुविधाओं वाले विकल्प उपलब्ध हैं, तो लोग उसी स्थान पर रहने की जिद क्यों कर रहे हैं? विकास परियोजनाओं में रेलवे लाइन का मार्ग जनता तय नहीं कर सकती।”

न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने भी सहमति जताते हुए कहा कि भूमि राज्य सरकार की है और इसका उपयोग कैसे करना है, यह सरकार का विशेषाधिकार है। न्यायालय का प्राथमिक उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि प्रभावित लोगों को राहत मिले और उनका जीवन प्रभावित न हो।


सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस का फ्लैग मार्च

मामले की संवेदनशीलता और 50 हजार लोगों की सुरक्षा को देखते हुए नैनीताल पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल के कुशल नेतृत्व में पुलिस बल ने बनभूलपुरा और आसपास के क्षेत्रों में सघन फ्लैग मार्च किया।

फ्लैग मार्च में शामिल अधिकारी: इस मार्च में नगर मजिस्ट्रेट हल्द्वानी ए.बी. बाजपेय, क्षेत्राधिकारी हल्द्वानी अमित कुमार, प्रभारी निरीक्षक बनभूलपुरा दिनेश सिंह फर्त्याल सहित भारी संख्या में पुलिस और प्रादेशिक आर्म्ड कॉन्स्टेबुलरी (PAC) के जवान मौजूद रहे।

IPS डॉ. मंजूनाथ टी.सी.
IPS डॉ. मंजूनाथ टी.सी.

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की अपील:

“सभी क्षेत्रवासी उच्चतम न्यायालय के निर्णय का सम्मान करें और प्रशासनिक कार्यवाही में सहयोग दें। सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी या अफवाह न फैलाएं। पुलिस डिजिटल और धरातल दोनों स्तरों पर कड़ी निगरानी रख रही है।”


मामले की पृष्ठभूमि: 2007 से अब तक का सफर

बनभूलपुरा का यह विवाद लगभग दो दशकों पुराना है।

  1. 2007-2017: मामला पहली बार उच्च न्यायालय पहुंचा और फिर विभिन्न याचिकाओं के माध्यम से उच्चतम न्यायालय तक गया।
  2. जनवरी 2023: उच्चतम न्यायालय ने मानवीय आधार पर 50 हजार लोगों को अचानक हटाए जाने पर रोक लगा दी थी और सरकार से समाधान मांगा था।
  3. फरवरी 2024: क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के दौरान हिंसा भड़की थी, जिसमें जान-माल का काफी नुकसान हुआ था।

वर्तमान में, रेलवे को अपनी विस्तार योजनाओं के लिए लगभग 30.5 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है, जिसमें राज्य सरकार और रेलवे दोनों की हिस्सेदारी है।


आगे की राह

जिला प्रशासन 20 तारीख से सक्रिय भूमिका में रहेगा। प्रत्येक परिवार के मुखिया को अपने परिवार के सदस्यों का विवरण, निवास की अवधि और पहचान संबंधी दस्तावेज (आधार कार्ड, बिजली बिल आदि) शिविर में प्रस्तुत करने होंगे।

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