बंदरों के आतंक से निजात व नगर आयुक्त की नियुक्ति की कर रहे थे मांग
सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा। नगर क्षेत्र में बंदरों के बढ़ते आतंक और स्थायी नगर आयुक्त की नियुक्ति की महत्वपूर्ण माँग को लेकर अल्मोड़ा नगर निगम के पार्षदों ने उग्र प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन तब स्थगित हुआ जब स्वयं मेयर अजय वर्मा ने धरना स्थल पर पहुंचकर एक महीने के भीतर सभी समस्याओं के समाधान का ठोस आश्वासन दिया। इस प्रदर्शन ने शहर की मूलभूत समस्याओं को एक बार फिर से सुर्खियों में ला दिया है।
दरअसल, अल्मोड़ा शहर लंबे समय से कई समस्याओं से जूझ रहा है, जिनमें मुख्य रूप से आवारा पशुओं, विशेषकर बंदरों का उपद्रव, प्रमुख है। इसके अलावा, नगर निगम में एक पूर्णकालिक और समर्पित नगर आयुक्त की नियुक्ति भी पार्षदों की प्राथमिक माँग रही है, ताकि प्रशासनिक कार्य सुचारू रूप से चल सकें। उनका तर्क है कि जब तक एक स्थायी और सशक्त प्रशासक नियुक्त नहीं होता, तब तक समस्याओं का दीर्घकालिक समाधान संभव नहीं है।
बैठकों और आश्वासनों का सिलसिला
पार्षदों ने जब अपनी माँगें उठाईं, तो जिला प्रशासन भी हरकत में आया। बुधवार को जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने पार्षदों के साथ एक बैठक की थी। इस बैठक में उन्होंने आवश्यक निर्देश जारी किए थे कि सीडीओ और प्रभारी नगर आयुक्त रामजी शरण शर्मा अब प्रतिदिन नगर निगम कार्यालय में बैठेंगे और समय पर निगम के कामकाज निपटाएंगे, भले ही उनके पास अन्य प्रशासनिक कार्य हों। इसके साथ ही, डीएम ने बंदरों की समस्या के स्थायी निवारण के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया था।
मेयर का हस्तक्षेप और धरने का स्थगन
प्रशासनिक बैठकों के बावजूद, पार्षदों का आंदोलन जारी रहा। गुरुवार को जब पार्षद अपनी मांगों पर डटे हुए थे, तब मेयर अजय वर्मा स्वयं धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारी पार्षदों को संबोधित किया और उनकी चिंताओं को समझते हुए एक महीने की समय सीमा के भीतर बंदरों की समस्या के समाधान और नगर आयुक्त की नियुक्ति सहित तमाम नगर की समस्याओं के निवारण का स्पष्ट और लिखित आश्वासन दिया। मेयर के इस हस्तक्षेप और सकारात्मक आश्वासन के बाद, पार्षदों ने फिलहाल अपना धरना प्रदर्शन समाप्त करने का निर्णय लिया।
प्रदर्शन में अपनी एकजुटता दिखाते हुए कई पार्षदों ने हिस्सा लिया। इनमें वैभव पांडे, चंचल दुर्गापाल, मधु बिष्ट, तुलसी देवी, अंजू बिष्ट, रीना टम्टा, मुकेश कुमार, भूपेंद्र जोशी, हेम तिवारी, कुलदीप मेर, दीपक कुमार, अनुप भारती, इंतकाम कुरैशी, प्रदीप कुमार, रोहित कार्की, जानकी पांडे, गीता बिष्ट, कमला किरोला, गुंजन चम्याल, और इंतिखाब आलम कुरैशी जैसे पार्षद शामिल रहे। उनकी सामूहिक आवाज ने शहर की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने के लिए प्रशासन पर दबाव बनाया है।

