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Big Breaking : नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत के बाद शिष्य आनंद गिरफ्तार

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सीएनई रिपोर्टर

गत दिवस अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने उनके शिष्य आनंद गिरि को गिरफ्तार कर लिया है। यह वही आनंद गिरि हैं, जिनको महंत नरेंद्र गिरी ने सात पन्नों के सुसाइड नोट पर अपनी मौत का जिम्मेदार बताया था।

पुलिस और एसओजी टीम देर रात उनके कांगड़ी गाजीवाली स्थित आश्रम पहुंची, जहां आनंद गिरी से एक लंबी पूछताछ का दौर चला। लगभग डेढ़ घंटे तक उनसे तमाम तरह के सवाल किये गये। जिनमें से कुछ का संतोषजनक उत्तर वह नहीं दे पाये। जिसके बाद पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई। हालांकि इससे पूर्व उत्तराखंड पुलिस ने भी उनसे पूछताछ की थी।

ज्ञातव्य हो कि सोमवार को महंत नरेंद्र गिरि का शव बाघम्बरी मठ आश्रम के कमरे में फंदे से लटका हुआ मिला था। शिष्यों ने दरवाजा तोड़कर शव को नीचे उतारा था। पुलिस जांच के दौरान महंत नरेंद्र गिरी के कमरे से लगभग सात पन्नों का एक सुसाइड नोट बरामद हुआ था। यह सुसाइड नोट ही पुलिस जांच की सबसे अहम कड़ी है। जिसमें साफ तौर पर उन्होंने मरने से पूर्व अपने शिष्य आनंद गिरि पर उन्हें परेशान करने की गम्भीर आरोप लगाये हैं।

इसी बीच इस सुसाइड नोट को पढ़ने के बाद पुलिस ने हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या तिवारी और उनके बेटे को भी हिरासत में लिया है। जानकारी यह मिली है कि बीती देर शाम पुलिस उनके कांगड़ी गाजीवाली स्थित आश्रम पहुंची थी। इसके बाद रात करीब साढ़े 10 बजे उत्तर प्रदेश पुलिस की सहारनपुर SOG की टीम आई और बन्द कमरे में पूछताछ के बाद आनंद गिरी को गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई।

इधर हरिद्वार की एसपी सिटी कमलेश उपाध्याय ने बताया यह मामला यूपी से जुड़ा होने के कारण आनंद गिरि को यूपी पुलिस के हवाले किया गया है। इधर आनंद गिरि ने हरिद्वार में जो बयान दिया है उसने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए इसे बड़ी साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि वह महंत गिरि की मौत से स्वयं खासे आहत हैं। यह सब कुछ उन्हें बेवजह फंसाने की सोची—समझी किसी ​साजिश का हिस्सा है। अलबत्ता देखना यह है कि पुलिस जांच अब किस दिशा में आगे बढ़ती है। जल्द ही इस बात का खुलासा होगा कि महंत की संदिग्ध मौत, सुसाइड नोट और शिष्य की गिरफ्तारी केस का अंतिम सत्य है या फिर इसके पीछे कोई बड़ी साजिश है। इधर अखाड़ा परिषद के उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह महंत ने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग भी की है।

इधर सूत्रों का कहना है कि सुसाइड नोट की प्रमाणिकता भी संदेह से परे नहीं है। फोरेंसिक जांच के दौरान हैंडराइटिंग मिलान में साफ हो पाएगा कि सुसाइड नोट अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने ही लिखा या नहीं। फिलहाल फोरेंसिक टीम ने अखाड़ा परिषद अध्यक्ष की हैंडराइटिंग का सैंपल भी एकत्र कर लिया है। हालांकि पुलिस का कहना है कि नरेंद्र गिरि का कमरा अंदर से बंद था, उसे तोड़ा गया। उनका शव जमीन पर पड़ा हुआ था। उनके गले में नायलोन की रस्सी का फंदा भी था। हालात प्रथम दृष्टया आत्महत्या की ओर ही इशारा करते हैं। बावजूद इसके पुलिस के आने से पूर्व ही उनका शव शिष्यों ने उतार दिया था। हालांकि सुसाइड नोट को लेकर एक चर्चा यह भी है कि यह एक वसीयतनामा की तरह क्यों लिखा गया है। आई जी रेंज केपी सिंह के अनुसार मौके से 7 पेज का सुसाइड नोट मिला है। इसमें महंत नरेंद्र गिरि ने वसीयतनामा की तरह लिखा है, इसमें शिष्य आनंद गिरि का भी जिक्र है। नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड नोट में यह जिक्र भी किया है कि किस शिष्य को क्या देना है और कितना देना है ?

संपत्ति को लेकर हुआ था विवाद, बाद में मांग ली थी सार्वजनिक माफी

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि और उनके शिष्य योग गुरू आनंद गिरि के बीच कुछ माह पूर्व विवाद संपत्ति को लेकर हुआ था, हालांकि बाद में इनमें आपस में समझौता हो गया था। उस दौरान आनंद गिरि द्वारा गुरू के पैर पकड़कर मांगी माफी मांगते हुए फोटो सोशल मीडिया, टीवी चैनलों और समाचार पत्रों में वायरल भी हुए थे। उस समय आनंद गिरि ने बताया था कि परिषद के अध्यक्ष नरेन्द्र गिरि के साथ सभी प्रकार के पिछले विवादों को खत्म कर लिया है। उन्होंने कहा था कि गुरू शिष्य परंपरा को बनाये रखने के लिए भवावेश में जो भी गलत बयान दिया उसको वह वापस लेते हैं। उन्होंने कहा था कि अखाड़ा एवं पंच परमेश्वर से भी क्षमायाचना की थी। इधर महंत नरेन्द्र गिरि ने भी सार्वजनिक रूप से उन्हें माफी दे दी थी। जिसके बाद महंत नरेंद्र गिरि ने श्री मठ बाघम्बरी गद्दी एवं बड़े हनुमान मंदिर में आनंद गिरि के आने पर लगाई पाबंदी हटाते हुए उन पर लगाए आरोपों को भी वापस ले लिया था।

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Deepak Manral
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तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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