गैरसैंण में आंदोलनकारियों पर वाटर कैनन! UKD ने सरकार को घेरा, उठाए बड़े सवाल

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गैरसैंण में आंदोलनकारियों पर वाटर कैनन! UKD ने सरकार को घेरा, उठाए बड़े सवाल
गैरसैंण में आंदोलनकारियों पर वाटर कैनन! UKD ने सरकार को घेरा, उठाए बड़े सवाल

सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा। गैरसैंण में अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन देने जा रहे उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के कार्यकर्ताओं पर वाटर कैनन के इस्तेमाल को लेकर दल ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है। बुधवार को अल्मोड़ा स्थित जिला कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूकेडी संरक्षक काशी सिंह ऐरी ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों और शांतिपूर्ण विरोध की संवैधानिक भावना के विपरीत बताते हुए कहा कि जनता की जायज मांगों को सुनने के बजाय आंदोलनकारियों पर बल प्रयोग करना उचित नहीं है। उन्होंने पुलिस की ओर से सड़क अवरुद्ध किए जाने के कारण आम नागरिकों और मरीजों को हुई परेशानी पर भी सवाल उठाते हुए प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग की।


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यूकेडी संरक्षक काशी सिंह ऐरी ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को अपनी समस्याओं और मांगों को सरकार के सामने रखने तथा शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने का अधिकार प्राप्त है। ऐसे में अपनी मांगों को लेकर आगे बढ़ रहे कार्यकर्ताओं पर वाटर कैनन का इस्तेमाल करना गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि जनता की आवाज को दबाने के बजाय सरकार को उसकी समस्याओं को सुनना चाहिए और उनका समाधान निकालने की दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए।

गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग फिर उठाई

प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐरी ने कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल गैरसैंण विधानसभा सत्र के दौरान राज्य के महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों को लेकर ज्ञापन देने जा रहा था। इन मांगों में गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी घोषित करना, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना, मूल निवास लागू करना और राज्य में सशक्त भू-कानून बनाना प्रमुख रूप से शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि ये केवल किसी राजनीतिक दल की मांगें नहीं हैं, बल्कि उत्तराखंड की पहचान, यहां के युवाओं के भविष्य और मूल निवासियों के अधिकारों से जुड़े अहम विषय हैं। राज्य गठन के पीछे जिन अपेक्षाओं और आकांक्षाओं ने लोगों को एकजुट किया था, उनमें रोजगार, स्थानीय संसाधनों पर अधिकार और क्षेत्रीय हितों की सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं। ऐसे में इन सवालों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

पुलिस कार्रवाई के साथ सड़क अवरुद्ध करने पर भी उठाए सवाल

काशी सिंह ऐरी ने पुलिस की कार्रवाई के दौरान सड़क अवरुद्ध होने से आम लोगों को हुई परेशानी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सड़कें आम नागरिकों की आवाजाही का प्रमुख माध्यम हैं। यदि किसी प्रशासनिक कार्रवाई के कारण आम लोगों को आवागमन में दिक्कत होती है और मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ती है, तो इस स्थिति की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।

उन्होंने सवाल किया कि जब आम नागरिक अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरते हैं, तब प्रशासन उनके खिलाफ कार्रवाई करता है, लेकिन जब प्रशासनिक स्तर पर ही सड़क अवरुद्ध होने से लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, तो इसकी जवाबदेही कौन लेगा? उनके अनुसार, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ आम जनता की सुविधाओं और आवश्यक आवागमन का ध्यान रखना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।

जनहित के मुद्दों पर संघर्ष जारी रखने का ऐलान

यूकेडी संरक्षक ने कहा कि सरकार को आंदोलनकारियों की मांगों को गंभीरता से सुनना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति और शांतिपूर्ण विरोध के लिए स्थान होना जरूरी है। मांगों का समाधान संवाद और सकारात्मक पहल के माध्यम से निकाला जाना चाहिए, न कि बल प्रयोग के जरिए लोगों को पीछे हटाने का प्रयास किया जाना चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड क्रांति दल गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने, स्थानीय युवाओं को रोजगार दिलाने, मूल निवास लागू करने और सशक्त भू-कानून की मांग सहित राज्यहित से जुड़े मुद्दों पर अपना संघर्ष जारी रखेगा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिलाध्यक्ष दिनेश जोशी, केंद्रीय मंत्री त्रिलोक लटवाल, केंद्रीय मंत्री गिरीश नाथ गोस्वामी, जिला महामंत्री प्रताप सिंह, जिला महामंत्री देवेश जोशी, महानगर अध्यक्ष मोहित साह, महानगर अध्यक्ष युवा वन कंवल, विनय किरोला, दीवान बनोला, गणेश सिंह और सुजीत टम्टा सहित दल के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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