पिथौरागढ़ की सड़कों पर पैदल चलना भी चुनौती! ‘सरल बात’ ने प्रशासन से मांगा सुरक्षित आवागमन का अधिकार

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पिथौरागढ़ की सड़कों पर पैदल चलना भी चुनौती
पिथौरागढ़ की सड़कों पर पैदल चलना भी चुनौती

फुटपाथ, जेब्रा क्रॉसिंग और स्पीड ब्रेकर की कमी पर उठाए सवाल

मेयर, डीएम और एसपी को सौंपा ज्ञापन, शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन

CNE REPORTER, पिथौरागढ़। पहाड़ की शांत वादियों में बसे पिथौरागढ़ शहर की सड़कों पर आखिर पैदल चलने वाले कितने सुरक्षित हैं? जब फुटपाथ न हों, सड़क पार करने के लिए सुरक्षित जेब्रा क्रॉसिंग का अभाव हो और तेज रफ्तार वाहनों के बीच आम नागरिकों को अपनी जान जोखिम में डालकर रास्ता तय करना पड़े, तो सड़क सुरक्षा के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इसी गंभीर समस्या को लेकर ‘सरल बात’ समूह ने आवाज बुलंद करते हुए नगर की प्रमुख समस्याओं को मेयर, जिलाधिकारी और प्रभारी पुलिस अधीक्षक के सामने रखा। समूह ने तीनों अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और यातायात व्यवस्था में व्याप्त खामियों को दूर करने के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम उठाने की मांग की। अधिकारियों की ओर से प्रतिनिधिमंडल को शीघ्र उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।


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सड़कें वाहनों के लिए ही नहीं, पैदल चलने वालों के लिए भी हों सुरक्षित

‘सरल बात’ समूह के संयोजक मंडल के सदस्य भूपेश सिंह बोरा, चन्द्र प्रकाश पुनेड़ा एवं प्रकाश चंद्र पुनेठा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मेयर महोदया, जिलाधिकारी तथा प्रभारी पुलिस अधीक्षक को संबोधित विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इसमें शहर की सड़क व्यवस्था में पैदल यात्रियों की उपेक्षा, बुनियादी सुविधाओं की कमी और बढ़ते सड़क दुर्घटना जोखिम जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।

समूह का कहना है कि सड़कें केवल वाहनों की आवाजाही के लिए नहीं हैं, बल्कि उन पर पैदल चलने वाले नागरिकों का भी समान अधिकार है। इसके बावजूद शहर के अनेक हिस्सों में पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित स्थान का अभाव उनकी रोजमर्रा की आवाजाही को मुश्किल और जोखिमपूर्ण बना रहा है। तेज रफ्तार से गुजरते दोपहिया वाहन और अन्य गाड़ियां इस समस्या को और गंभीर बना देते हैं।

फुटपाथ से लेकर सीसीटीवी तक, बुनियादी इंतजामों पर सवाल

ज्ञापन में शहर की यातायात व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया। इनमें पैदल यात्रियों के लिए पर्याप्त फुटपाथ की व्यवस्था, सड़क पार करने के लिए जेब्रा क्रॉसिंग, संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों की उपलब्धता तथा वाहनों की गति नियंत्रित करने के लिए आवश्यक स्थानों पर स्पीड ब्रेकर बनाने की मांग शामिल है।

समूह ने रेखांकित किया कि इन सुविधाओं का अभाव केवल अव्यवस्थित यातायात का मामला नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों की सुरक्षा से सीधे जुड़ा प्रश्न है। विशेषकर व्यस्त मार्गों पर पैदल चलने वालों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना और वाहन चालकों की गति पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना आवश्यक है। सड़क सुरक्षा के लिए केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित निगरानी भी जरूरी है।

‘राइट टू वॉक’ को लेकर न्यायिक दृष्टांतों का हवाला

ज्ञापन में पैदल चलने के अधिकार यानी ‘राइट टू वॉक’ को विशेष महत्व देते हुए इसे मूलभूत अधिकारों के समकक्ष मानने से संबंधित न्यायिक दृष्टांतों और विस्तृत वाद-विवरण का उल्लेख किया गया। समूह ने इस विषय को नागरिकों की गरिमा, सुरक्षित आवागमन और सार्वजनिक स्थानों के न्यायसंगत उपयोग से जोड़ते हुए स्पष्ट किया कि पैदल यात्रियों की जरूरतों को नगर नियोजन और यातायात प्रबंधन का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

समूह का तर्क है कि सड़क व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें नागरिकों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए अनावश्यक खतरे न उठाने पड़ें। सुरक्षित पैदल मार्ग, स्पष्ट सड़क चिह्न और नियंत्रित यातायात किसी भी व्यवस्थित शहर की बुनियादी जरूरतें हैं।

लगातार हो रही दुर्घटनाओं पर चिंता, समय रहते कदम उठाने की अपील

पिथौरागढ़ में लगातार सामने आ रही सड़क दुर्घटनाओं को लेकर चिंता जताते हुए ‘सरल बात’ समूह ने संबंधित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से इस मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर लेने का आग्रह किया। समूह ने कहा कि दुर्घटनाओं के बाद कार्रवाई करने के बजाय ऐसे इंतजाम विकसित किए जाने चाहिए, जो दुर्घटनाओं की आशंका को पहले ही कम कर सकें।

इसके लिए संवेदनशील मार्गों की पहचान, यातायात नियमों का कड़ाई से पालन, तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था महत्वपूर्ण है। समूह की मांग है कि इन विषयों पर केवल आश्वासन तक सीमित रहने के बजाय धरातल पर दिखाई देने वाले सुधार किए जाएं, ताकि नागरिकों को वास्तविक राहत मिल सके।

गांधीवादी तरीके से जारी रहेगा जनजागरूकता अभियान

‘सरल बात’ समूह ने स्पष्ट किया कि शहर के बुनियादी नागरिक सवालों को उठाने और उनके समाधान के लिए वह गांधीवादी मूल्यों एवं अहिंसक तरीकों से अपना प्रयास जारी रखेगा। समूह का उद्देश्य नागरिकों को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना तथा संबंधित अधिकारियों का ध्यान जनहित के मुद्दों की ओर आकर्षित करना है।

समूह ने सवाल उठाया कि 21वीं सदी के डिजिटल दौर में, जब विकास और आधुनिक सुविधाओं की बात की जाती है, तब क्या किसी शहर में पैदल चलने के लिए सुरक्षित जगह तक उपलब्ध न होना एक सभ्य, सुसंस्कृत और कानूनसम्मत समाज की पहचान हो सकती है? यह सवाल केवल पिथौरागढ़ की सड़क व्यवस्था तक सीमित नहीं, बल्कि नागरिक सुविधाओं और विकास की प्राथमिकताओं पर भी गंभीर चिंतन की मांग करता है।

ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में परवेज खान, उमेश चंद्र तिवारी, मनोज मखौलिया, योगेन्द्र चंद, ऊषा पंत, लक्ष्मण सिंह बिष्ट, धीरज पटियाल सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन की ओर से दिए गए शीघ्र कार्रवाई के आश्वासन के बाद शहर की सड़क व्यवस्था में कितने ठोस बदलाव सामने आते हैं। ‘सरल बात’ समूह की यह पहल एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि सुरक्षित सड़कें केवल यातायात प्रबंधन का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के जीवन, सम्मान और अधिकारों से जुड़ा जनहित का प्रश्न हैं।

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