मर्म चिकित्सा भविष्य की स्वास्थ्य प्रणाली में निभा सकती है अहम भूमिका: प्रो. डॉ. सुनील कुमार जोशी

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मर्म चिकित्सा भविष्य की स्वास्थ्य प्रणाली में निभा सकती है अहम भूमिका: प्रो. डॉ. सुनील कुमार जोशी
मर्म चिकित्सा भविष्य की स्वास्थ्य प्रणाली में निभा सकती है अहम भूमिका: प्रो. डॉ. सुनील कुमार जोशी

नंदीपुरम में अंतर्राष्ट्रीय मर्म विज्ञान एवं मर्म चिकित्सा प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ

भारत सहित विदेशों के 48 प्रतिभागी ले रहे हिस्सा

सीएनई रिपोर्टर, हरिद्वार। भारतीय पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान को आधुनिक समय की आवश्यकताओं के अनुरूप आगे बढ़ाने और मर्म चिकित्सा की उन्नत तकनीकों से चिकित्सकों को परिचित कराने के उद्देश्य से नंदीपुरम, गेंडीखाता में अंतर्राष्ट्रीय मर्म विज्ञान एवं मर्म चिकित्सा प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ हो गया है। पांच दिवसीय इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश-विदेश से आए लगभग 48 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। शिविर के दौरान मर्म चिकित्सा और योग के माध्यम से विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार से जुड़े सिद्धांतों, उन्नत तकनीकों तथा व्यावहारिक पहलुओं पर विशेषज्ञों द्वारा जानकारी साझा की जा रही है।


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कार्यक्रम में पूर्व राजदूत सी. एम. भंडारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं, डॉ. जगदीश भंडारी, डॉ. ए. के. सिंह, डॉ. निधि शुक्ला और स्वामी अनंतानंद जी ने विशिष्ट अतिथि के रूप में सहभागिता की। शिविर का प्रमुख उद्देश्य चिकित्सकों को मर्म चिकित्सा के गहन ज्ञान से अवगत कराने के साथ ही उन्हें इसके व्यावहारिक प्रयोगों का उन्नत प्रशिक्षण प्रदान करना है, ताकि इस पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के ज्ञान का व्यापक स्तर पर प्रसार हो सके।

पश्चिमी देशों में भी बढ़ रही मर्म चिकित्सा और योग के प्रति रुचि

समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व राजदूत सी. एम. भंडारी ने कहा कि पश्चिमी देशों में मर्म चिकित्सा और योग के प्रति लोगों का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रति अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती रुचि इस बात का संकेत है कि इन विधाओं के ज्ञान और अनुभव को दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

उन्होंने बताया कि मृत्युंजय मिशन के संस्थापक डॉ. सुनील कुमार जोशी के साथ मिलकर विश्वविद्यालयों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से अनेक देशों में मर्म चिकित्सा एवं योग के प्रचार-प्रसार के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने इस दिशा में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, प्रशिक्षण और जनजागरूकता को महत्वपूर्ण बताते हुए भारतीय चिकित्सा परंपरा को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयासों की सराहना की।

‘स्वास्थ्य का अधिकार भी शिक्षा और सूचना के अधिकार की तरह सबको मिले’

मर्म चिकित्सा एवं योग के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर चुके तथा उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. डॉ. सुनील कुमार जोशी ने प्रशिक्षण शिविर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस वर्ष आयोजित कार्यक्रम उन्नत स्तर यानी एडवांस लेवल का है। इसमें प्रतिभागियों को मर्म चिकित्सा के सिद्धांतों की गहराई से जानकारी देने के साथ-साथ इसके व्यावहारिक अनुप्रयोगों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

डॉ. जोशी ने मर्म चिकित्सा को भविष्य की चिकित्सा पद्धति बताते हुए कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधाओं और उपचार संबंधी ज्ञान की पहुंच सुनिश्चित करना आवश्यक है। उनके अनुसार, जिस प्रकार शिक्षा और सूचना का अधिकार प्रत्येक व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है, उसी प्रकार स्वास्थ्य का अधिकार भी सभी को मिलना चाहिए।

उन्होंने प्रशिक्षण में शामिल चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे मर्म चिकित्सा के ज्ञान को केवल अपने तक सीमित न रखें, बल्कि इसे समाज के प्रत्येक वर्ग तक सहज, सरल और उपयोगी रूप में पहुंचाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि सभी के लिए स्वास्थ्य की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में मर्म चिकित्सा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

डॉ. जोशी ने यह भी रेखांकित किया कि भारतीय पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान पर आधारित इस पद्धति के वैज्ञानिक अध्ययन, व्यवस्थित प्रशिक्षण और व्यावहारिक उपयोग को प्रोत्साहित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने प्रशिक्षण शिविरों को इस दिशा में ज्ञान के आदान-प्रदान, चिकित्सकीय कौशल के विकास और अनुभवों को साझा करने का प्रभावी माध्यम बताया।

भारत सहित फ्रांस और अमेरिका से पहुंचे प्रतिभागी

पांच दिवसीय इस अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया है। फ्रांस और अमेरिका सहित गुजरात, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, मैसूर और दिल्ली से आए चिकित्सक एवं अन्य प्रतिभागी इस उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हैं।

विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों और पृष्ठभूमियों से आए प्रतिभागियों की उपस्थिति ने शिविर को अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया है। कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को मर्म चिकित्सा के सिद्धांतों, उन्नत तकनीकों और चिकित्सकीय उपयोगों को समझने तथा अपने अनुभवों का परस्पर आदान-प्रदान करने का अवसर मिल रहा है।

पांच दिनों तक चलेगा प्रशिक्षण और ज्ञान-विनिमय का सिलसिला

शिविर के दौरान विशेषज्ञों द्वारा मर्म विज्ञान से जुड़े विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन दिया जा रहा है। प्रशिक्षण की रूपरेखा में सैद्धांतिक जानकारी के साथ व्यावहारिक पक्ष को भी महत्व दिया गया है, जिससे प्रतिभागी मर्म चिकित्सा के विभिन्न पहलुओं को अधिक गहराई से समझ सकें और अपने कौशल को विकसित कर सकें।

पारंपरिक भारतीय चिकित्सा ज्ञान को संरक्षित करने, उसे व्यवस्थित प्रशिक्षण के माध्यम से आगे बढ़ाने तथा समाज में उसके प्रति जागरूकता बढ़ाने की दृष्टि से इस प्रकार के आयोजन महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। शिविर में विभिन्न क्षेत्रों से आए विशेषज्ञों और प्रतिभागियों की सहभागिता से मर्म चिकित्सा के अध्ययन एवं प्रशिक्षण को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

कार्यक्रम में मयंक जोशी, योगेश पांडे, प्रकाश जोशी, दिनेश जी, शत्रुघ्न डबराल, डॉ. बिपिन चंद्र, मुस्कान सामाजिक उत्थान समिति पिथौरागढ़ के सचिव जगदीश कलौनी, चंद्रकांत शर्मा, विवेक चौधरी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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