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“जैंता एक दिन त आलो ये दुनी में” – रंग लाया जन संघर्ष ! आखिरकार पूरा हुआ करबला—माल सड़क मार्ग का फाइनल सर्वे, क्षेत्र में जश्न का माहौल, पढ़िये पूरी ख़बर….

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अल्मोड़ा। आखिरकार करबला से माल गांव तक बहुप्रतीक्षित 4 किमी सड़क मार्ग का फाइनल सर्वे का काम पूरा हो गया है, जो लगातार चार दिनों तक चला। इस दौरान लोनिवि के तमाम आला अधिकारी व पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य गणेश सिंह बिष्ट मौजूद रहे। सर्वे का काम पूरा होने के बाद कुछ जरूरी औपचारिकताओं के पूरा होने पर उम्मीद है कि सड़क निर्माण का कार्य शुरू हो जायेगा। जिसको लेकर ग्राम सभा में जश्न का माहौल है।
पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य माल गणेश सिंह बिष्ट ने यहां जारी विज्ञप्ति में बताया कि वन विभाग से स्वीकृति मिलने के बाद अग्रिम कार्रवाई शुरू हो सकी। बताया कि इन दिनों हुई भारी बारिश के चलते खेत—खलिहानों में फसल, घास तथा घनी झाड़ियां उग आई हैं। जिस कारण उनके द्वारा पूर्व में करवायी गई सर्वे के नंबर तथा निशान ढूंढने में थोड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ा, लेकिन आखिरकार यह काम पूरा हो ही गया।

सर्वे के दौरान आई एक अड़चन
उन्होंने बताया कि पूर्व में हुई सर्वे में 4 किमी रोड पंचायत घर तक स्वीकृत हुई थी, जबकि फाइनल सर्वे में 300 से 350 मी. सड़क कम पड़ गयी। जिस पर उन्होंने विधायक व विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान से इस बावत चर्चा की। उन्होंने विधायक को अवगत कराया कि पंचायत घर में आंगनबाड़ी स्कूल है, जिसमें छोटे—छोटे बच्चे पढ़ते हैं तथा वहां ग्राम सभा की गई महत्वूपर्ण बैठकें भी हुआ करती हैं। यही कारण है कि पंचायत घर तक सड़क का पहुंचना बेहद जरूरी है। इस पर विस उपाध्यक्ष ने भरोसा दिलाया है कि पूर्व में निर्धारित पंचायत घर तक की गई सर्वे के हिसाब से पंचायत घर तक ही सड़क पहुंचाई जायेगी।

सड़क के अभाव में हुए हृदयविदारक हादसे की याद हुई ताज़ा
गणेश सिंह बिष्ट ने कहा कि आज जहां सड़क का सपना साकार होने जा रहा है, वहीं इसके लिए लगभग 10 से 15 साल तक चला लंबा संघर्ष भी एक इतिहास बन गया है। यदि सड़क पूर्व में बन गई हाती तो ग्राम विकास अधिकारी प्रताप सिंह बिष्ट की यूं दर्दनाक मौत नही हुई होती। उन्होंने बताया कि पांच फिसलने की वजह से वह खाई में जा गिरे थे। उन्हें लहुलुहान हालत में डोली में बैठा खड़ी चढ़ाई के रास्ते मुख्य सड़क तक लाया गया। इसके बाद वह अपनी कार से अस्पताल ले गये, लेकिन देर हो जाने से उन्हें बचाया नही जा सका। उन्हें आज भी याद है कि किसी तरह से उनकी कार की पिछली सीट खून से सन चुकी थी। इस भयानक घटना के बाद उन्हांने कई बार बीडीसी सदन में भी जोर—शोर से सड़क निर्माण के मुद्दे को उठाया था, किंतु पूर्ववर्ती सरकार व जनपदीय नेतृत्व ने इसमें ध्यान नही दिया।

विधायक रघुनाथ सिंह चौहान का बड़ा योगदान
गणेश सिंह बिष्ट ने कहा कि वर्ष 2017 में भाजपा की सरकार बनने के मात्र 100 दिन के भीतर भाजपा विधायक व विस उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान ने अपने वायदे के अनुसार सीएम को अल्मोड़ा आमंत्रित किया। इसक बाद सर्किट हाऊस में हुए कार्यक्रम के दौरान करबला—माल सड़क मार्ग की घोषणा कर दी गई।

छुटपुट विरोधों को भी झेलना पड़ा
गणेश सिंह बिष्ट ने कहा कि सीएम की घोषणा के बाद लोनिवि, वन विभाग और भू—गर्भ विभाग द्वारा अलग—अलग सर्वे हुई। इस दौरान कुछ लोगों के विरोध को देखते हुए एक आम बैठक बुलाई गई। जिसमें शंकाओं का समाधान हुआ और अनापत्ति प्रमाण पत्र लिए गये। 11 से 12 माह तक चली इन सभी कार्यवाहियों के बाद उन्हें विभाग द्वारा कहा गया कि क्षेत्र का कुछ हिस्सा वन पंचायत में आने के कारण सरपंच का अनापत्ति प्रमाण पत्र जरूरी है। जिसके बाद उनके द्वारा सरपंच का निर्विरोध चुनाव कराया गया और गोविंद सिंह निर्विरोध सरपंच बने। तब जाकर वन विभाग को एनओसी दिया गया। इस दौरान भारत सरकार से भी एक बार फाइल वापस आ गई। इसके बावजूद आंखिरकार फाइनल सर्वे का काम पूरा हो सका है।

सर्वे के दौरान यह लोग रहे मौजूद
फाइनल सर्वे के दौरान लोनिवि के अवर अभियंता प्रदीप जोशी, प्रकाश चंद्र पंत एवं सर्वेयर सिंहत आधे दर्जन लोगों की टीम मौजूद रही। इधर क्षेत्रीय नागरिक गोविंद सिंह अधिकारी, दीपक अधिकारी, रतन सिंह, प्रेम सिंह, प्रताप अधिकारी, संजू अधिकारी, नैन अधिकारी, शंकर सिंह, कुंदन सिंह, कै. श्याम सिंह, मनोज, सरपंच गोविंद सिंह, प्रधान राजेंद्र सिंह, गोविंद बिष्ट, सुंदर सिंह, पूरन बिष्ट, मोहन सिंह, दीपक बिष्ट, महेंद्र बिष्ट, संजय बिष्ट, सुनीता बिष्ट, राधा देवी, कमला देवी, मीनू अधिकारी, जानकी बिष्ट आदि तमाम क्षेत्रवासियों ने विधायक रघुनाथ सिंह चौहान व पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य गणेश सिंह बिष्ट का आभार जताया है।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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