अनुभवी शिक्षकों पर टीईटी की बाध्यता थोपने का आरोप
आदेश वापस लेने की मांग; समाधान नहीं होने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
CNE REPORTER, हल्द्वानी। राजकीय शिक्षक संघ जनपद नैनीताल के बैनर तले शिक्षकों ने टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग को लेकर रविवार को हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में एकत्रित शिक्षकों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए टीईटी की बाध्यता संबंधी आदेश पर पुनर्विचार करने और उसे वापस लेने की मांग उठाई। शिक्षकों ने कहा कि वर्षों से विद्यालयों में सेवाएं दे रहे अनुभवी शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू करना उनके लिए चिंता का विषय है।

धरना-प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति के समय लागू नियमों और उनकी वर्षों की सेवा को ध्यान में रखते हुए इस मामले का समाधान निकाला जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो विभिन्न शिक्षक संगठनों को एकजुट कर व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
अनुभवी शिक्षकों पर टीईटी की बाध्यता थोपने का आरोप
सभा को संबोधित करते हुए जिला मंत्री, माध्यमिक शिक्षा संघ नैनीताल एनडी पाठक ने कहा कि शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता अनावश्यक रूप से थोपी जा रही है। उन्होंने कहा कि इसी समस्या के विरोध में धरना-प्रदर्शन की शुरुआत की गई है। यदि शिक्षकों की मांगों का समाधान नहीं किया गया तो सभी शिक्षक संगठनों को एक मंच पर लाकर व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित स्तर पर उचित निर्णय लिया जाना चाहिए, ताकि लंबे समय से शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों को अनावश्यक असमंजस का सामना न करना पड़े।
15 से 20 साल से सेवा दे रहे शिक्षकों ने उठाए सवाल
राजकीय शिक्षक संघ नैनीताल के जिला उपाध्यक्ष मदन गोस्वामी ने कहा कि विद्यालयों में 15 से 20 वर्षों से अध्यापन कार्य कर रहे शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू किया जाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि इतने लंबे अनुभव के साथ शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों के मामले में उनकी पूर्व की सेवाओं और नियुक्ति के समय लागू नियमों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
मदन गोस्वामी ने कहा कि टीईटी संबंधी प्रावधान नई भर्तियों में शामिल होने वाले शिक्षकों के लिए लागू किया जाना चाहिए था, लेकिन पूर्व से कार्यरत शिक्षकों के लिए भी इसे अनिवार्य करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने इस मामले में सरकार से हस्तक्षेप कर शिक्षकों को राहत देने की मांग की।
सरकार से आदेश वापस लेने की मांग
मंडलीय संगठन महिला मंत्री गीता गोस्वामी ने कहा कि शिक्षक विद्यालयों में पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। इसके बावजूद उन पर टीईटी की अनिवार्यता संबंधी आदेश लागू किया जा रहा है, जिससे शिक्षकों में असंतोष है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि शिक्षकों की परिस्थितियों और उनकी पूर्व की सेवाओं को ध्यान में रखते हुए इस आदेश पर शीघ्र पुनर्विचार किया जाए और इसे वापस लेने की दिशा में निर्णय लिया जाए।
2007 में नियुक्ति, बाद में लागू हुआ नियम: कावेरी मनराल
अध्यापिका कावेरी मनराल ने अपनी नियुक्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति वर्ष 2007 में हुई थी, जबकि टीईटी संबंधी नियम वर्ष 2010 के बाद लागू हुआ। ऐसे में पहले से सेवा दे रहे शिक्षकों पर बाद में लागू किए गए प्रावधान की अनिवार्यता थोपे जाने को लेकर सवाल उठते हैं।
उन्होंने कहा कि नियुक्ति के समय लागू नियमों के आधार पर शिक्षक वर्षों से अपनी सेवाएं देते आ रहे हैं। ऐसे में उनके मामले पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि पूर्व से कार्यरत शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस समस्या का उचित समाधान निकाला जाए।
मांग पूरी नहीं होने पर व्यापक आंदोलन की चेतावनी
धरना-प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने एक स्वर में टीईटी की अनिवार्यता के मामले में राहत देने की मांग उठाई। वक्ताओं ने कहा कि यह मुद्दा केवल कुछ शिक्षकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षकों का भविष्य और उनकी सेवा संबंधी परिस्थितियां जुड़ी हुई हैं।
शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने के लिए तैयार हैं। यदि संबंधित स्तर पर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो विभिन्न शिक्षक संगठनों को एकजुट कर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
बुद्ध पार्क में आयोजित इस धरना-प्रदर्शन के माध्यम से शिक्षकों ने सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने का प्रयास किया। अब शिक्षकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उनकी मांगों पर सरकार और संबंधित विभाग क्या रुख अपनाते हैं।










