HomeUttarakhandNainitalक्वारब डेंजर जोन में मार्च तक पूरा होगा उपचार कार्य

क्वारब डेंजर जोन में मार्च तक पूरा होगा उपचार कार्य

सड़क के नीचे बन रही प्लाडिंग से मिलेगी मजबूती, ऊपर सुरक्षा दीवार भी होगी तैयार

ईई अशोक चौधरी ने किया निरीक्षण, ठेकेदार को गुणवत्ता और सुरक्षा में कोताही न बरतने के निर्देश

सीएनई रिपोर्टर, सुयालबाड़ी। अल्मोड़ा-हल्द्वानी राष्ट्रीय राजमार्ग-109 पर स्थित संवेदनशील क्वारब डेंजर जोन को स्थायी रूप से सुरक्षित बनाने की दिशा में चल रहे कार्यों का रानीखेत राष्ट्रीय राजमार्ग खंड के अधिशासी अभियंता अशोक चौधरी ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों और कार्यदायी संस्था को गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।

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निरीक्षण के दौरान सीएनई संवाददाता अनूप सिंह जीना से बातचीत में अधिशासी अभियंता अशोक चौधरी ने बताया कि क्वारब डेंजर जोन में चल रहा उपचार एवं सुरक्षा कार्य निर्धारित गति से आगे बढ़ रहा है और इसे अगले मार्च तक पूरा किए जाने की संभावना है। उनका कहना था कि विभाग का प्रयास है कि निर्माण कार्य के दौरान आम यात्रियों को न्यूनतम परेशानी हो तथा सड़क पर दुर्घटना और पत्थर गिरने जैसी आशंकाओं को कम से कम किया जा सके।

सड़क के नीचे बन रही प्लाडिंग से क्या होगा फायदा?

क्वारब में सबसे बड़ी चिंता सड़क के धंसने की रही है। इसी को देखते हुए सड़क के निचले हिस्से में जो प्लाडिंग/सुरक्षात्मक संरचना तैयार की जा रही है, उसके संबंध में पूछे जाने पर ईई अशोक चौधरी ने बताया कि इससे सड़क को आवश्यक मजबूती मिलेगी और सड़क के धंसने की संभावना को कम करने में मदद मिलेगी।

पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क के नीचे की जमीन कमजोर होने, लगातार वर्षा, पानी के रिसाव और पहाड़ी के दबाव के कारण सड़क के हिस्से के खिसकने अथवा धंसने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में नीचे की ओर बनाई जाने वाली मजबूत संरचनाएं सड़क के बेस और ढलान को सहारा देने का काम करती हैं। क्वारब जैसे सक्रिय भू-स्खलन क्षेत्र में यह कार्य इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां सड़क की स्थिरता केवल ऊपर से डामरीकरण करने से सुनिश्चित नहीं हो सकती।

सड़क के ऊपर भी बनेगी सुरक्षा दीवार

अधिशासी अभियंता के अनुसार सड़क के ऊपरी हिस्से में भी सुरक्षा दीवार का निर्माण किया जाएगा। इसका उद्देश्य पहाड़ी से आने वाले कंकड़, छोटे पत्थर और मलबे को सीधे सड़क पर गिरने से रोकना है।

क्वारब क्षेत्र में पहले भी पहाड़ी से मलबा और बोल्डर गिरने के कारण यातायात प्रभावित होता रहा है। मई 2026 में स्थिति गंभीर होने पर राष्ट्रीय राजमार्ग-109 के क्वारब लैंडस्लाइड जोन में यातायात तक प्रतिबंधित करना पड़ा था। उस समय प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल कराया था।

बाद में करीब 47-48 दिनों के अंतराल के बाद जुलाई में मुख्य मार्ग पर यातायात फिर शुरू किया गया, हालांकि उस समय भी पहाड़ी से मलबा और बोल्डर गिरने तथा धूल की समस्या बनी रहने की रिपोर्ट सामने आई थी।

ठेकेदार को स्पष्ट चेतावनी—कोताही बर्दाश्त नहीं

ईई अशोक चौधरी ने बताया कि निर्माण कार्य कर रही संस्था को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि गुणवत्ता अथवा सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने कहा कि कार्य ऐसा होना चाहिए जिससे भविष्य में सड़क की स्थिरता बनी रहे और यात्रियों को अनावश्यक खतरे का सामना न करना पड़े। निर्माण के दौरान भी यातायात को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

क्वारब में निर्माण कार्यों को लेकर पूर्व में भी विभागीय स्तर पर ठेकेदारों को नोटिस दिए जाने की स्थिति सामने आ चुकी है। फरवरी 2026 में एनएच खंड रानीखेत की ओर से कार्यदायी संस्था को स्वीकृत कार्यप्रणाली के अनुरूप काम नहीं करने के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी होने की खबर सामने आई थी।

47 दिन तक बंद रहा था मुख्य मार्ग

क्वारब की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मई-जून 2026 में भूस्खलन और उपचार कार्यों के चलते मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी थी। प्रशासन ने उस समय सड़क की सुरक्षा को देखते हुए वैकल्पिक क्वारब बाईपास मार्ग को हल्के यात्री वाहनों और यात्री बसों के लिए उपयोग में लाने की व्यवस्था की थी।

जुलाई में मार्ग दोबारा खुलने के बाद भी क्वारब क्षेत्र में यात्रियों को पूरी तरह जोखिम-मुक्त स्थिति मिलने में समय लग रहा था। ऐसे में वर्तमान उपचार कार्यों का समय पर और गुणवत्तापूर्ण पूरा होना स्थानीय लोगों के साथ-साथ हल्द्वानी, नैनीताल, भवाली, खैरना, अल्मोड़ा, रानीखेत और आगे पहाड़ी क्षेत्रों के बीच आवागमन करने वाले हजारों यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है।

लिंक रोड भी बनी थी वैकल्पिक व्यवस्था का हिस्सा

क्वारब की समस्या को देखते हुए क्वारब-चौंसली लिंक रोड को भी वैकल्पिक यातायात व्यवस्था के रूप में विकसित किया गया है। फरवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार इस वैकल्पिक मार्ग की परियोजना लागत करीब 10.23 करोड़ रुपये बताई गई थी। इसका उद्देश्य क्वारब डेंजर जोन में मुख्य मार्ग पर यातायात दबाव कम करना और आपात स्थिति में वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराना था।

सितंबर 2026 में भी क्वारब क्षेत्र में मुख्य मार्ग और बाईपास के यातायात प्रबंधन को लेकर प्रशासन की ओर से व्यवस्थाएं की गई थीं। भारी वाहनों के संचालन को लेकर भी चरणबद्ध व्यवस्थाएं लागू की गईं।

क्वारब क्यों है इतना संवेदनशील?

क्वारब राष्ट्रीय राजमार्ग-109 का वह हिस्सा है जहां पहाड़ी की भूगर्भीय अस्थिरता के कारण लंबे समय से भूस्खलन और सड़क धंसने की समस्या सामने आती रही है। समस्या केवल सड़क की ऊपरी सतह की नहीं है, बल्कि पहाड़ी के कटाव, जल निकासी, नीचे की जमीन के कमजोर होने और ऊपर से गिरने वाले मलबे सहित कई पहलुओं से जुड़ी है।

इसी कारण वर्तमान कार्य में सड़क के निचले हिस्से को मजबूती देने के साथ-साथ पहाड़ी की तरफ भी सुरक्षा संरचनाएं विकसित की जा रही हैं। विभाग का लक्ष्य केवल क्षतिग्रस्त सड़क को तत्काल ठीक करना नहीं, बल्कि सड़क को अधिक स्थिर और सुरक्षित बनाना है।

अब निगाह मार्च की समयसीमा पर

ईई अशोक चौधरी के निरीक्षण के बाद सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विभाग ने कार्य को अगले मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। यदि कार्य निर्धारित समय और गुणवत्ता के साथ पूरा होता है तो क्वारब डेंजर जोन में बार-बार सड़क धंसने, मलबा आने और यातायात बाधित होने की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम और भूगर्भीय परिस्थितियां निर्माण कार्य के लिए हमेशा चुनौती बनी रहती हैं। इसलिए मार्च तक काम पूरा होने के साथ-साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि निर्माण के बाद बारिश और मानसून के दौरान सुरक्षा संरचनाएं किस प्रकार प्रदर्शन करती हैं।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आम जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और निर्माण एजेंसी को इसी आधार पर काम करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। कार्यदायी संस्था सीसीसी प्राइवेट लिमिटेड है।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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