युवा शक्ति, मातृशक्ति और विद्यार्थियों ने एक स्वर में किया वंदे मातरम् का सामूहिक गायन
सीएनई संवाददाता, रानीखेत। भारत के ऐतिहासिक राष्ट्रीय गौरव गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर शुक्रवार, 25 सितंबर को रानीखेत में राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय चेतना से ओतप्रोत कार्यक्रम आयोजित किया गया। ‘नमामि मातरम्—वंदे मातरम्’ के तहत आयोजित सामूहिक गायन कार्यक्रम में युवा शक्ति, मातृशक्ति, गणमान्य नागरिकों तथा सरस्वती शिशु विद्या मंदिर विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों ने एक साथ वंदे मातरम् का गायन कर वातावरण को देशभक्ति के भाव से भर दिया।
कार्यक्रम का आयोजन बहुउद्देशीय भवन के खुले प्रांगण में किया गया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार देशभर में आयोजित सामूहिक गायन के साथ रानीखेत में भी ठीक प्रातः 11 बजे वंदे मातरम् का सामूहिक गायन प्रारंभ हुआ। बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने एक स्वर में राष्ट्रीय गीत का गायन किया।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. कौशल बंगारी, छावनी परिषद उपाध्यक्ष मोहन नेगी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला व्यवस्था प्रमुख धर्मानंद जोशी, कैंट प्रधानाचार्य डॉ. बी.सी. पांडेय, दीप भगत, प्रदीप गुप्ता एवं जगदीश अग्रवाल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
इसके पश्चात विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, नई दिल्ली के आह्वान पर आयोजित ‘नमामि मातरम्—वंदे मातरम्’ के राष्ट्रव्यापी सामूहिक गायन कार्यक्रम में सभी ने सहभागिता की।
स्वतंत्रता आंदोलन में वंदे मातरम् की रही महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम में वक्ताओं ने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक महत्व और स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य रमेश बिष्ट, दीप भगत तथा डॉ. बी.सी. पांडेय ने कहा कि वंदे मातरम् भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्रवाद और देशभक्ति की भावना का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया था।
वक्ताओं ने बताया कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम् पहली बार 1896 में कलकत्ता में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में सार्वजनिक रूप से गाया गया था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने भारतीयों में राष्ट्रीय चेतना और स्वाधीनता की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासन के विरोध में भारतीय राष्ट्रवादियों के बीच वंदे मातरम् विशेष रूप से लोकप्रिय हुआ। अंग्रेजी शासन द्वारा इसके गायन पर विभिन्न स्थानों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों ने इसे अपने संघर्ष और राष्ट्रप्रेम के प्रतीक के रूप में अपनाए रखा।
वक्ताओं ने यह भी बताया कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किए जाने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि देश के राष्ट्रीय जीवन में वंदे मातरम् का विशेष और सम्मानित स्थान है।
अतिथियों का किया सम्मान
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की ओर से मुख्य अतिथि एवं उपस्थित गणमान्य नागरिकों का सम्मान किया गया। विद्यालय के प्रधानाचार्य रमेश बिष्ट ने अतिथियों को शॉल ओढ़ाकर एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
स्वच्छता अभियान को लेकर विद्यार्थियों को दिलाई शपथ
कार्यक्रम के दौरान छावनी परिषद की ओर से चलाए जा रहे स्वच्छता जागरूकता अभियान को भी इससे जोड़ा गया। छावनी परिषद के स्वच्छता निरीक्षक अजय प्रताप एवं चंदन कुमार के नेतृत्व में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलाए जा रहे स्वच्छता जागरूकता पखवाड़े के तहत विद्यार्थियों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया।
छावनी परिषद उपाध्यक्ष मोहन नेगी ने विद्यालय के विद्यार्थियों को स्वच्छता के नियमों का पालन करने तथा अपने आसपास स्वच्छ वातावरण बनाए रखने की शपथ दिलाई। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वच्छता को केवल अभियान तक सीमित न रखकर इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय के प्रधानाचार्य रमेश बिष्ट ने कार्यक्रम में उपस्थित मातृशक्ति, युवा शक्ति, विद्यार्थियों, अतिथियों एवं गणमान्य नागरिकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक जिम्मेदारी और अपने गौरवशाली इतिहास के प्रति जागरूकता पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।









