स्थानीय लोगों ने जान जोखिम में डालकर गहरे पानी से निकाला
पुलिस व एसडीआरएफ भी पहुंची
सीएनई रिपोर्टर, सुयालबाड़ी। नैनीताल-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित प्रसिद्ध ढोकाने वॉटरफॉल में शनिवार को उस समय चीख-पुकार मच गई, जब अल्मोड़ा से घूमने और नहाने पहुंचे दो युवकों में से एक अचानक गहरे पानी में समा गया। युवक कुछ देर तक पानी में जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहा। मौके पर मौजूद स्थानीय युवकों की तत्परता से उसे बामुश्किल पानी से बाहर निकाला जा सका। समय पर मदद मिलने से एक बड़ा हादसा टल गया।
जानकारी के अनुसार अल्मोड़ा के एनटीडी मोहल्ले निवासी मयंक तिवारी (23) पुत्र जितेंद्र तिवारी अपने एक साथी के साथ ढोकाने वॉटरफॉल घूमने पहुंचे थे। दोनों युवक जलप्रपात के पानी में नहा रहे थे। इसी दौरान मयंक अचानक पानी के एक गहरे हिस्से में चला गया। देखते ही देखते वह पानी में डूबने लगा और अपनी जान बचाने के लिए छटपटाने लगा।
युवक को डूबता देख मौके पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। हालात की गंभीरता को भांपते हुए स्थानीय निवासी नवीन जीना और उनके एक अन्य साथी तत्काल युवक को बचाने के लिए आगे आए। दोनों ने साहस दिखाते हुए गहरे पानी में पहुंचकर मयंक को बाहर निकालने की कोशिश शुरू की। काफी मशक्कत के बाद वे उसे पानी से बाहर निकालने में सफल रहे।
पानी से बाहर निकाला, तत्काल शुरू किए बचाव के प्रयास
पानी से बाहर निकालने के बाद मयंक की हालत चिंताजनक बताई गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल उसे संभाला और प्राथमिक स्तर पर बचाव के प्रयास शुरू किए। उसके पेट पर दबाव डालकर शरीर में गया पानी बाहर निकालने का प्रयास किया गया। इस बीच मौके पर मौजूद लोगों की मदद से उसे तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी की गई।
स्थानीय निवासी नवीन जीना ने मानवता और तत्परता का परिचय देते हुए युवक को अपनी कार से तत्काल सीएचसी सुयालबाड़ी पहुंचाया। अस्पताल में डॉ. नितिन ने युवक का उपचार किया। समय रहते युवक को अस्पताल पहुंचाए जाने से उसकी जान बच सकी।
सूचना मिलते ही पुलिस और एसडीआरएफ की टीम पहुंची
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस भी सक्रिय हो गई। चौकी इंचार्ज अरुण राणा, कांस्टेबल विजय आगरी तथा एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने घटनास्थल का जायजा लेते हुए घटना की जानकारी जुटाई और सुरक्षा व्यवस्था का भी निरीक्षण किया।
बरसात में और खतरनाक हो जाता है जलप्रपात
ढोकाने वॉटर फॉल क्षेत्र में बड़ी संख्या में पर्यटक और स्थानीय लोग पहुंचते हैं। खासकर बरसात के मौसम में जलप्रपात और उससे जुड़े जलक्षेत्र में पानी का बहाव और गहराई अचानक बढ़ सकती है। ऊपर से शांत दिखाई देने वाला पानी कई स्थानों पर बेहद गहरा होता है, जिससे नहाने वाले लोग खतरे का अंदाजा नहीं लगा पाते।
शनिवार की घटना ने एक बार फिर पर्यटक स्थलों पर बरती जाने वाली सावधानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि इस मामले में स्थानीय युवकों की बहादुरी और समय पर मिली चिकित्सकीय मदद से मयंक तिवारी की जान बच गई। यदि बचाव कार्य में कुछ और देर होती, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी।




