पानी का संकट अब भी बरकरार
भारी बारिश के बावजूद सुचारू हुई विद्युत आपूर्ति
ग्रामीणों ने CNE का जताया आभार
पेयजल लाइन की जिम्मेदारी पर अब भी पसरा असमंजस
सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा। विकासखंड भैसियाछाना के बेलवाल गांव में करीब एक सप्ताह से चल रहे बिजली संकट को लेकर CNE में प्रकाशित खबर का बड़ा असर सामने आया है। खबर प्रकाशित होने के बाद संबंधित विभाग हरकत में आया और गांव की विद्युत व्यवस्था अब सामान्य हो गई है। खास बात यह है कि क्षेत्र में लगातार भारी बारिश के बावजूद फिलहाल बिजली आपूर्ति सुचारू चल रही है। इससे ग्रामीणों ने राहत की सांस लेते हुए जनसमस्या को प्रमुखता से उठाने के लिए CNE का आभार जताया है।
हालांकि, बेलवाल की पूरी समस्या अभी खत्म नहीं हुई है। बिजली संकट का समाधान होने के बावजूद गांव की पेयजल लाइन अब भी दुरुस्त नहीं हो सकी है। नतीजा यह है कि ग्रामीण आज भी अपनी प्यास बुझाने के लिए बरसाती पानी पर निर्भर हैं। मानसून के दौरान बरसाती पानी के इस्तेमाल से ग्रामीणों में डायरिया समेत विभिन्न जलजनित रोगों का खतरा बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

CNE की खबर के बाद जागा विभाग, बिजली व्यवस्था पटरी पर
बेलवाल गांव में लंबे समय से बिजली की समस्या को लेकर ग्रामीण परेशान थे। बार-बार फ्यूज उड़ने और फॉल्ट के कारण विद्युत आपूर्ति बाधित हो रही थी। इसका असर मोबाइल संचार से लेकर बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के घरेलू कामकाज तक पड़ रहा था।
CNE ने ग्रामीणों की इस गंभीर समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर में यह सवाल भी उठाया गया था कि आखिर बार-बार फ्यूज उड़ने के बावजूद स्थायी फॉल्ट को ठीक क्यों नहीं किया जा रहा है।
खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया और विद्युत व्यवस्था को दुरुस्त किया। अब गांव में बिजली आपूर्ति सामान्य बताई जा रही है।
भारी बारिश के बीच भी बिजली का लगातार सुचारू रहना इस बात का संकेत है कि इस बार विभाग ने समस्या को गंभीरता से लिया है।
ग्रामीणों ने CNE की खबर के बाद हुई कार्रवाई पर संतोष जताते हुए कहा कि उनकी आवाज को प्रमुखता से उठाए जाने का परिणाम सामने आया है।
बिजली लौटी, लेकिन पानी कब आएगा?
बेलवाल के ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता अब पेयजल को लेकर है।
बिजली संकट दूर होने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब पेयजल समस्या की ओर भी विभागीय ध्यान जाएगा, लेकिन फिलहाल करीब पांच किलोमीटर लंबी पेयजल लाइन की समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
बिजली की समस्या हल हो गई, लेकिन पानी की समस्या जस की तस है।
गांव में नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं होने के कारण ग्रामीणों को बरसात का पानी इस्तेमाल करना पड़ रहा है। मानसून में पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के पानी में मिट्टी, गाद और अन्य अशुद्धियां आने की संभावना रहती है। ऐसे में लंबे समय तक बरसाती पानी पर निर्भर रहना ग्रामीणों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और अन्य संवेदनशील लोगों में दूषित पानी के कारण डायरिया, पेचिश, उल्टी-दस्त तथा अन्य जलजनित संक्रमण फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब पानी के लिए भी इंतजार
बेलवाल की स्थिति अब एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करती है।
जब CNE में खबर प्रकाशित होने के बाद विद्युत विभाग ने सक्रियता दिखाई और गांव की बिजली व्यवस्था सामान्य हो सकती है, तो पेयजल संकट का समाधान क्यों नहीं हो पा रहा?
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें किसी विभाग पर आरोप-प्रत्यारोप नहीं चाहिए। उन्हें सिर्फ इतना चाहिए कि उनके घरों तक साफ और नियमित पेयजल पहुंचे।
उनका कहना है कि बरसात के मौसम में जब गांव के आसपास पर्याप्त पानी दिखाई देता है, तब भी पीने के पानी के लिए बरसाती पानी पर निर्भर होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
पांच किलोमीटर की लाइन अब भी ‘किसकी?’
पेयजल समस्या का सबसे बड़ा पेंच अभी भी वही है—करीब पांच किलोमीटर लंबी बबुरियानायल-बेलवाल पेयजल लाइन की जिम्मेदारी आखिर किस विभाग की है?
ग्रामीणों के अनुसार वर्षों तक इस लाइन की देखरेख जल संस्थान करता रहा और पेयजल का बिल भी जल संस्थान द्वारा लिया जाता था। बाद में मौखिक रूप से यह बताया गया कि लाइन सिंचाई विभाग को हैंडओवर कर दी गई है।
लेकिन ग्रामीणों के सामने आज भी यह स्पष्ट नहीं है कि इस हस्तांतरण का लिखित रिकॉर्ड क्या है और वर्तमान में लाइन के रखरखाव की जिम्मेदारी किस विभाग की है।
यही असमंजस आज ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन गया है।
विभागीय जिम्मेदारी के बीच प्यास ग्रामीणों की
पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य रमेश सिंह जड़ौत के अनुसार इस समस्या को लेकर करीब तीन माह पूर्व मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत भी की गई थी। इसके बावजूद पेयजल व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका।
ग्रामीणों के अनुसार सिंचाई विभाग की ओर से इसे ग्राम सभा से संबंधित बताया गया, जबकि ब्लॉक स्तर से भी कथित रूप से यह स्पष्ट नहीं किया गया कि पेयजल लाइन उनके अधिकार क्षेत्र में आती है या नहीं।
ऐसे में सवाल फिर वहीं खड़ा है—
जल संस्थान से लेकर सिंचाई विभाग और ब्लॉक तक यदि जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं है, तो बेलवाल के ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
अब स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन भी ले संज्ञान
बिजली व्यवस्था सामान्य होने से ग्रामीणों को निश्चित रूप से बड़ी राहत मिली है, लेकिन पेयजल संकट को अब केवल विभागीय विवाद मानकर नहीं छोड़ा जा सकता।
मानसून अपने चरम पर है और ग्रामीण यदि लगातार बरसाती पानी पीने को मजबूर हैं तो यह स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर जनहित का मामला है।
प्रशासन को चाहिए कि तत्काल मौके पर टीम भेजकर पेयजल लाइन का स्थलीय निरीक्षण कराए, लाइन की वास्तविक स्थिति और स्वामित्व/रखरखाव की जिम्मेदारी स्पष्ट करे तथा ग्रामीणों को तत्काल सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था करे।
साथ ही स्वास्थ्य विभाग को भी क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने की जरूरत है, ताकि दूषित पानी के कारण किसी प्रकार का संक्रमण फैलने की स्थिति पैदा न हो।
ग्रामीणों की मांग—बिजली के बाद अब पानी की बारी
बेलवाल के ग्रामीणों ने कहा कि CNE में खबर प्रकाशित होने के बाद बिजली की समस्या का समाधान होना इस बात का प्रमाण है कि यदि जनसमस्याओं को गंभीरता से उठाया जाए तो व्यवस्था में सुधार संभव है।
अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि पेयजल संकट की खबर भी जिम्मेदार विभागों को जगाएगी।
ग्रामीणों की मांग है कि बरसाती पानी पर उनकी निर्भरता तत्काल समाप्त की जाए, पेयजल लाइन को दुरुस्त किया जाए और भविष्य के लिए उसकी जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से किसी एक सक्षम विभाग को सौंपी जाए।
बेलवाल में बिजली का अंधेरा तो छंट गया, लेकिन प्यास का संकट अभी बाकी है। अब देखना यह है कि प्रशासनिक तंत्र इस दूसरी पुकार पर कितनी जल्दी जागता है।
गत दिवस सीएनई में प्रकाशित खबर —



