अधिवक्ता कल्याण और स्थायी राजधानी पर बड़ा प्रस्ताव
सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर। महात्मा गांधी की कर्मस्थली अनाशक्ति आश्रम, कौसानी शनिवार को उत्तराखंड के अधिवक्ताओं के एक ऐतिहासिक संकल्प का साक्षी बना। उत्तराखंड अधिवक्ता महासंघ के दो दिवसीय महासम्मेलन के दौरान विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक मंथन के बाद ‘कौसानी चार्टर’ जारी किया गया। इस चार्टर के माध्यम से राज्य सरकार के समक्ष अधिवक्ताओं के कल्याण, न्यायिक व्यवस्था को सशक्त बनाने, स्थायी राजधानी के निर्धारण तथा जनहित से जुड़े अनेक अहम मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।

महासम्मेलन में वक्ताओं ने उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन में अधिवक्ताओं की ऐतिहासिक भूमिका को याद करते हुए कहा कि अलग राज्य की स्थापना के लिए अधिवक्ताओं ने लगभग तीन माह तक न्यायिक कार्य का बहिष्कार कर आंदोलन को नई दिशा और मजबूती प्रदान की थी। प्रदेश के विभिन्न जिलों में सम्मेलन, विचार गोष्ठियों और आंदोलनों के माध्यम से अधिवक्ता समाज ने राज्य गठन की लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
मुख्य अतिथि डॉ. महेंद्र पाल ने कहा कि अधिवक्ताओं ने केवल न्यायालयों तक ही अपनी भूमिका सीमित नहीं रखी, बल्कि उत्तराखंड की अस्मिता और अधिकारों की लड़ाई में अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि सरकार अधिवक्ताओं की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस और संवेदनशील पहल करे।
महासम्मेलन में पारित प्रस्तावों के तहत अधिवक्ताओं के लिए कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गईं। इनमें अधिवक्ता कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, अधिवक्ता बीमा राशि में वृद्धि, नवोदित अधिवक्ताओं को प्रोत्साहन भत्ता, वरिष्ठ एवं अस्वस्थ अधिवक्ताओं के लिए सम्मानजनक पेंशन व्यवस्था, महिला अधिवक्ताओं को प्राथमिकता के आधार पर नियुक्तियां तथा अधिवक्ता कल्याण कोष के लिए पृथक बजटीय प्रावधान सुनिश्चित करने की मांग प्रमुख रही।
महासंघ ने राज्य की स्थायी राजधानी के प्रश्न पर भी सरकार से स्पष्ट और समयबद्ध नीति घोषित करने की मांग की। साथ ही तहसील, जिला एवं उच्च न्यायालय स्तर पर अधिवक्ताओं के लिए आधुनिक चैंबर, समृद्ध विधिक पुस्तकालय, डिजिटल सुविधाएं तथा अन्य आवश्यक आधारभूत संसाधन उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया गया।
महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि महात्मा गांधी की कर्मस्थली अनाशक्ति आश्रम से जारी ‘कौसानी चार्टर’ केवल अधिवक्ताओं का दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रदेश की आम जनता की अपेक्षाओं और न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, सुलभ एवं मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकल्प पत्र है। इसमें शासन-प्रशासन के लिए अनेक जनहितकारी सुझाव भी शामिल किए गए हैं।
महासम्मेलन की अध्यक्षता महासंघ के अध्यक्ष गोविंद भंडारी ने की, जबकि संचालन महासंघ के सचिव मोहन भट्ट ने किया।
इस अवसर पर कृष्ण सिंह बिष्ट, सूरज नेगी, प्रदीप टम्टा, भैरव नाथ टम्टा, मोहन चंद्र भट्ट, शेखर लखचौरा, अनिल भाकुनी, दुर्गा मेहता, अवतार सिंह रावत, सुरेंद्र नेगी, मयंक चौबे, ओम प्रकाश तिवारी, अशोक भंडारी सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।



