महिलाओं के हाथ में डेयरी की कमान
सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर। जनपद बागेश्वर में डेयरी क्षेत्र ने विकास की नई इबारत लिखी है। सरकारी योजनाओं के सटीक क्रियान्वयन और पशुपालकों की मेहनत के चलते पिछले कुछ महीनों में जनपद के दैनिक दुग्ध उत्पादन में 34% की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की गई है। दिसंबर माह में जो उत्पादन 1640 लीटर था, वह अब बढ़कर 2200 लीटर प्रतिदिन तक पहुँच गया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिली है।

जनपद में दुग्ध संकलन के नेटवर्क को मजबूती देने के लिए समितियों की संख्या में उल्लेखनीय विस्तार किया गया है। पूर्व में सक्रिय 72 दुग्ध समितियों के मुकाबले अब जनपद में 90 समितियां एवं संग्रहण केंद्र कार्यरत हैं। यह विस्तार न केवल पशुपालकों की पहुंच बढ़ा रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर स्थायी रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहा है।

महिला सशक्तिकरण का बना आधार
बागेश्वर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी इस उपलब्धि का सबसे सशक्त पहलू है। वर्तमान में:
- लगभग 950 महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से दुग्ध समितियों से जुड़ी हैं।
- महिलाएं न केवल उत्पादन, बल्कि समितियों के प्रबंधन और संचालन में भी मुख्य भूमिका निभा रही हैं।
- डेयरी गतिविधियों ने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाकर सामाजिक सशक्तिकरण की नई दिशा दी है।
आधुनिक सुविधाएं और तकनीकी सहयोग
सहायक निदेशक दुग्ध, अनुराग मिश्रा के अनुसार, उत्पादन में इस बढ़ोत्तरी के पीछे आधुनिक विभागीय हस्तक्षेप मुख्य कारण हैं:
- पोषण: उच्च गुणवत्ता वाला पशुआहार, हरा चारा, कैल्शियम और मिनरल मिक्सचर की निरंतर आपूर्ति।
- स्वास्थ्य: पशु चिकित्सकों द्वारा नियमित निःशुल्क जांच और औषधियों का वितरण।
- जागरूकता: ‘स्वच्छ दुग्ध उत्पादन’ गोष्ठियों के माध्यम से स्वच्छता किट का वितरण और आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण।
- प्रोत्साहन: उत्कृष्ट कार्य करने वाले दुग्ध उत्पादकों को पुरस्कृत कर उनका मनोबल बढ़ाना।
अप्रैल 2026 का लक्ष्य: उन्नत नस्ल के पशुओं का होगा वितरण
विभाग अब आगामी वित्तीय वर्ष के लक्ष्यों पर तेजी से काम कर रहा है। अप्रैल 2026 के अंत तक राज्य सेक्टर योजना के तहत उन्नत नस्ल के दुधारू पशुओं के वितरण की तैयारी है:
- 2-पशु यूनिट: कुल 12 इकाइयां स्थापित की जाएंगी।
- 3-पशु यूनिट: जनपद में पहली बार 4 नई इकाइयां शुरू होंगी।
- कुल 16 प्रगतिशील दुग्ध उत्पादकों को इस योजना का सीधा लाभ मिलेगा, जिससे जनपद के दुग्ध उत्पादन लक्ष्य को समय से पहले प्राप्त किया जा सके।


