DM से लगाई गुहार
सीएई रिपोर्टर, बागेश्वर | जनपद के सेरी गांव में साल 2015 में आई भीषण आपदा का दंश ग्रामीण आज भी झेल रहे हैं। विस्थापन की सुस्त प्रक्रिया और बजट के अभाव ने आपदा प्रभावितों की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। बुधवार को सेरी गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर अपनी व्यथा सुनाई और मानसून से पहले आवास निर्माण के लिए रुकी हुई धनराशि जारी करने की मांग की।
क्या है पूरा मामला?
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे को सौंपे ज्ञापन में बताया कि 2015 की आपदा में गांव का एक बड़ा भू-भाग धंस गया था, जिससे कई परिवार बेघर हो गए थे। लंबे संघर्ष के बाद:
- कुल 26 परिवारों के लिए जमीन और मकान आवंटित किए गए थे।
- 17 मकानों का निर्माण तो पूरा हो गया है, लेकिन उनका अंतिम भुगतान अभी भी शासन स्तर पर अटका हुआ है।
- 09 परिवार सबसे ज्यादा संकट में हैं। इन परिवारों के मकानों का काम आधे से अधिक हो चुका है, लेकिन बजट न मिलने के कारण छत नहीं डल पाई है।
जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर
ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व विभाग की फाइलों और सरकारी लेटलतीफी के बीच ये 9 परिवार अपने जर्जर मकानों में रहने को मजबूर हैं। आगामी मानसून काल को देखते हुए ग्रामीणों में भारी भय व्याप्त है। सितंबर 2024 में प्रस्तावित भूमि की जांच होने और प्रशासन के आश्वासन के बावजूद, अभी तक एक रुपया भी जारी नहीं किया गया है।
“हम बस इतना चाहते हैं कि मानसून की बारिश शुरू होने से पहले हमारे सिर पर पक्की छत हो। हम अपने बच्चों की जान जोखिम में डालकर इन टूटे घरों में नहीं रहना चाहते।” — प्रभावित ग्रामीण
प्रतिनिधिमंडल ने की त्वरित कार्रवाई की मांग
ज्ञापन सौंपने वालों में कांग्रेस जिलाध्यक्ष अर्जुन भट्ट सहित नीमा देवी, भागुनी देवी, सुनीता देवी, रेनगू देवी, मंगली देवी, वंदना देवी, माधवी देवी, प्रताप राम, खीम राम, हरा राम और गोपाल राम आदि शामिल रहे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बजट जारी नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।


