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अल्मोड़ा की वादियों से सीधे ZEE5 पर: ‘जब खुली किताब’ कल होगी रिलीज

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पंकज कपूर और डिंपल कपाड़िया की फिल्म

अल्मोड़ा-रानीखेत की वादियों में शूटिंग

सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा : उत्तराखंड की हसीन वादियों और देवदार के जंगलों के बीच फिल्माई गई बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जब खुली किताब’ कल, यानी 6 मार्च को ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 (जी5) पर रिलीज होने जा रही है। दिग्गज अभिनेता सौरभ शुक्ला के निर्देशन में बनी यह फिल्म न केवल अपनी कहानी, बल्कि अल्मोड़ा और रानीखेत के स्थानीय कलाकारों की मौजूदगी के कारण भी चर्चा में है।

दिग्गज सितारों के साथ स्थानीय प्रतिभा का संगम

इस पारिवारिक ड्रामा फिल्म में भारतीय सिनेमा के दिग्गज कलाकार पंकज कपूर और डिंपल कपाड़िया मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म की सबसे खास बात यह है कि इसमें उत्तराखंड के स्थानीय रंगकर्मियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का भरपूर अवसर मिला है।

अल्मोड़ा और नैनीताल के प्रमुख कलाकार:

  • अल्मोड़ा से: वरिष्ठ रंगकर्मी गिरीश धवन, कमलेश पांडे, दीवान कनवाल।
  • बाल कलाकार: शिवाय पोखरिया और रक्षित तिवारी ने फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं।
  • लाफ्टर क्लब के सदस्य: जया शाह और विमला बोरा ने फिल्म में लाफ्टर क्लब के सदस्यों का जीवंत किरदार निभाया है।
  • नैनीताल से: अनिल घिल्डियाल, एच.एस. राणा, मदन कुमार, राजेश आर्य और बिजेन्दर कौर जैसे अनुभवी कलाकारों ने अपने अभिनय का जलवा बिखेरा है।

पारिवारिक ताने-बाने पर आधारित है कहानी

वरिष्ठ रंगकर्मी गिरीश धवन ने फिल्म के बारे में जानकारी साझा करते हुए बताया कि ‘जब खुली किताब’ एक पूर्णतः पारिवारिक फिल्म है। इसका ताना-बाना एक परिवार के आपसी रिश्तों, खट्टी-मीठी यादों और जिंदगी के उतार-चढ़ाव के इर्द-गिर्द बुना गया है। फिल्म की शूटिंग मुख्य रूप से अल्मोड़ा और रानीखेत के खूबसूरत लोकेशन्स पर हुई है, जो दर्शकों को पहाड़ की संस्कृति और सुंदरता से रूबरू कराएगी।

“इस फिल्म से स्थानीय कलाकारों को एक बड़ा मंच मिला है। हमें पूरी उम्मीद है कि यह फिल्म दर्शकों के दिलों को छुएगी और एक सफल प्रोजेक्ट साबित होगी।” — गिरीश धवन, रंगकर्मी

पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा

काफी लंबे इंतजार के बाद कल 6 मार्च को रिलीज हो रही इस फिल्म ने उत्तराखंड में फिल्म निर्माण की संभावनाओं को नए पंख दिए हैं। निर्देशक सौरभ शुक्ला ने स्थानीय लोगों को काम करने का अवसर देकर यहाँ की कला और संस्कृति को मुख्यधारा के सिनेमा से जोड़ने का सराहनीय प्रयास किया है।

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