पवित्र अनुष्ठान का साक्षी बना बागेश्वर
CNE REPORTER, बागेश्वर। उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध तीर्थ बाबा बागनाथ और बैजनाथ धाम में सदियों पुरानी पौराणिक परंपरा के अनुसार भगवान भोलेनाथ ‘घृत कमल’ (घी की गुफा) में विराजमान हो गए हैं।
मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आयोजित इस विशेष धार्मिक अनुष्ठान को देखने के लिए स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ देश-विदेश से आए पर्यटकों का भारी जमावड़ा लगा रहा। मान्यता है कि भगवान शिव का यह रूप न केवल दिव्य है, बल्कि एक माह बाद मिलने वाला इसका प्रसाद असाध्य रोगों को दूर करने की शक्ति रखता है।
बागेश्वर स्थित प्रसिद्ध बाबा बागनाथ एवं बैजनाथ धाम में आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब भगवान भोलेनाथ घृत कमल की गुफा में विराजमान हुए। इस दुर्लभ और पौराणिक धार्मिक अनुष्ठान के साक्षी बनने के लिए स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ देश-विदेश से आए पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर परिसर पूरी तरह हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा।
क्या है ‘घृत कमल’ की पौराणिक परंपरा?
हजारों वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के पीछे गहरी आस्था और विशेष विधि जुड़ी है। ‘घृत कमल’ तैयार करने की प्रक्रिया अत्यंत कठिन और धैर्यपूर्ण होती है:
- शुद्धिकरण: सबसे पहले गाय के शुद्ध घी को पानी के साथ बार-बार धोया और पिघलाया जाता है।
- आकार: पिघले हुए घी को ठंडा कर उसे एक गुफा जैसी सुंदर और जटिल आकृति दी जाती है।
- विराजमान: वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच शिवलिंग को इस पवित्र घी की गुफा से पूरी तरह ढक दिया जाता है। इस स्वरूप को ही ‘घृत कमल’ कहा जाता है।
स्वास्थ्य और आस्था का संगम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने संसार के कल्याण के लिए विषपान किया था, जिसकी ऊष्मा को शांत करने के लिए उन्हें घी का लेप लगाया जाता है।
प्रसाद का महत्व: एक महीने तक शिवलिंग पर रहने के बाद इस घी को भक्तों में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। स्थानीय लोगों का अटूट विश्वास है कि इस पवित्र घी का सेवन करने से चर्म रोग और कई अन्य असाध्य बीमारियां ठीक हो जाती हैं।
एक माह बाद बांटा जाएगा पवित्र प्रसाद
धार्मिक परंपरा के अनुसार लगभग एक माह बाद इस पवित्र घी को निकालकर श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा। मान्यता है कि इस प्रसाद का सेवन करने से असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी विश्वास के चलते हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अनुष्ठान का बेसब्री से इंतजार करते हैं।
घृत कमल अनुष्ठान के दौरान बैजनाथ धाम आस्था का ही नहीं, बल्कि धार्मिक पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बन गया। दूर-दराज से आए पर्यटक इस अनोखी परंपरा को देखकर अभिभूत नजर आए। मंदिर क्षेत्र में सुरक्षा और व्यवस्थाओं के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
इस पावन अवसर पर नवीन रावल, रतन सिंह रावल, किशन सिंह रावल, त्रिलोक गिरी, प्रकाश गोस्वामी, दीवान गिरी, सहित अनेक धर्माचार्य एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। वहीं बैजनाथ मेला समिति के अध्यक्ष नवीन ममगाई और गोपाल सिंह नेगी सहित समिति के अन्य पदाधिकारियों ने व्यवस्थाओं का संचालन किया।
आस्था का अनुपम उदाहरण
बाबा बागनाथ एवं बैजनाथ धाम में सम्पन्न हुआ यह घृत कमल अनुष्ठान न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक और पौराणिक विरासत को भी जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि भोलेनाथ की कृपा से यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक इसी श्रद्धा और विश्वास के साथ चलती रहेगी।

