HomeUttarakhandAlmoraजलवायु अनुकूलित प्रजातियां व तकनीकें विकसित करें कृषि वैज्ञानिक: डा. किमोठी

जलवायु अनुकूलित प्रजातियां व तकनीकें विकसित करें कृषि वैज्ञानिक: डा. किमोठी

✍️ विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा का 49वां कृषि विज्ञान मेला
✍️ मेले में लगे दो दर्जन स्टाल, नई प्रजातियों का लोकार्पण, कृषि दर्पण विमोचित

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सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा: कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल, नई दिल्ली के सदस्य डा. शिव प्रसाद किमोठी ने कहा है कि देश में अन्न व बागवानी के क्षेत्र में सराहनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि वे कृषि की जलवायु अनुकूलित प्रजातियां व तकनीकें विकसित करें और कृषक नये कृषि शोध तकनीकों को अपनाना चाहिए। डा. किमोटी आज विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा के कृषि विज्ञान मेले में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।

विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा के प्रयोगात्मक प्रक्षेत्र हवालबाग में आज ‘सुपोषित भारतः सशक्त भारत’ थीम पर आधारित 49वां कृषि विज्ञान मेला आयोजित हुआ। जिसमें मुख्य अतिथि कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल, नई दिल्ली के सदस्य डा. शिव प्रसाद किमोठी ने संस्थान के संस्थापक प्रो. बोसी सेन एवं श्रीमती गर्टयुड इमर्सन सेन को नमन करते हुए संस्थान के शोध कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से अन्न, बागवानी, दुग्ध एवं मत्स्य उत्पादन में सराहनीय वृद्धि हुई है। तभी देश अपनी अन्न आवश्यकताओं को पूर्ण करने के साथ ही कृषि उत्पादों को निर्यात करने में सक्षम हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज कृषि उत्पादन केन्द्रित की जगह आमदनी केन्द्रित हो गयी है। इसलिए कृषकों को नई शोघ तकनीकों को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए प्रयास करना चाहिए। इसके लिए कृषकों को आगे आना होगा। उन्होंने कृषि विज्ञानियों से कहा कि वे जलवायु परिवर्तन के दृष्टिगत जलवायु अनुकूलित प्रजातियों एवं तकनीकियों का विकास करें। तभी सभी कृषि आधारित संस्थानों के प्रयासों से देश आजादी के शताब्दी वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बन सकेगा।

इससे पहले संस्थान के निदेशक डा. लक्ष्मीकान्त ने मुख्य अतिथि सहित अन्य अतिथियों व कृषकों का स्वागत करते हुए संस्थान की स्थापना तथा पर्वतीय​कृषि के क्षेत्र में संस्थान के शोध कार्यों तथा विकसित तकनीकों का ब्यौरा प्रस्तुत किया। संस्थान की 100 सालों की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि यह संस्थान अभी तक 200 से अधिक उन्नतशील प्रजातियां विकसित कर चुका है। विगत वर्ष संस्थान ने 14 उन्नतशील प्रजातियां विकसित कीं, जिनमें मक्का की वीएल त्रिपोशी, वीएल पोशिका, वीएल शिखर, धान की वीएल बोसी धान, मंडुवा की वीएल मंडुवा 402 व 409, मादिरा की वीएल मादिरा 254 एवं चुआ की वीएल चुआ 140 प्रमुख हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष संस्थान द्वारा विकसित तीन तकनीकों का पेटेंट के लिए आवेदन किया है तथा विभिन्न निजी संस्थानों से विकसित 11 तकनीकियों के लिए समझौता किया गया है। उन्होंने बताया कि संस्थान के कृषक प्रक्षेत्र में अग्रिम पंक्ति प्रदर्शनों में 23 से 52 प्रतिशत तक उपज वृद्धि प्राप्त की गई है। संस्थान द्वारा जनजातीय उप-योजना के अन्तर्गत चार जिलों में करीब 43 गांवों में तकनीकों का प्रसार किया गया है। उन्होंने संस्थान के नये क्षेत्रों में हो रहे शोधों की जानकारी भी दी।

समारोह में गोविन्द बल्लभ पन्त राष्ट्रीय पर्यावरण संस्थान, कोसी—कटारमल के निदेशक प्रो. सुनील नौटियाल ने उत्कृष्ट शोध एवं विकास कार्यों के लिए संस्थान की प्रशंसा करते हुए कहा कि कृषक इस संस्थान की नई कृषि तकनीकों का लाभ लेकर कृषि तंत्र को आर्थिक रुप से सुदृढ़ बना सकते हैं। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा के कुलपति डा. सतपाल सिंह बिष्ट ने संस्थान की उपलब्धियों पर हर्ष व्यक्त करते हुए संस्थान की समस्त टीम को बधाई दी। आकाशवाणी अल्मोड़ा के कार्यक्रम प्रमुख रमेश चन्द्रा ने कृषकों से इस संस्थान द्वारा विकसित तकनीकों अपनाने का आह्वान किया। उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद के निदेशक डा. संजय कुमार ने कृषकों के महत्व को बताते हुए कहा कि किसान हैं, तो अन्न है और अन्न है, तो जीवन है तथा जीवन है, तो समृद्धि है। उन्होंने कहा कि इस संस्थान की तीन प्रजातियां प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र को समर्पित की गयी हैं। अल्मोड़ा नगर के निवर्तमान नगरपालिका अध्यक्ष प्रकाश चन्द्र जोशी ने अपने सम्बोधन में संस्थान के 100 वर्ष पूर्ण करने पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसकी उपलब्धियों के लिए बधाई दी। संस्थान के पूर्व निदेशक डा. जगदीश चन्द्र भट्ट ने प्रयोगशाला से खेत तक कार्यक्रम का जिक्र करते हुए संस्थान के कृषकों की आय में वृद्धि करने के प्रयासों की सराहना की।
नई प्रजातियों का लोकार्पण

इस मौके पर मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों ने संस्थान की प्रजातियों मक्का की वीएल त्रिपोशी, सब्जी मटर की वीएल उपहार, मादिरा की वीएल मादिरा 254 तथा चुआ की वीएल चुआ 140 का लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही संस्थान के प्रकाशन पर्वतीय कृषि दर्पण का विमोचन किया गया। मेले के दौरान प्रगतिशील किसान नैन सिंह खेतवाल, नवीन चन्द्र आर्या, बसन्त लाल, खीम सिंह, हर सिंह, नारायणी देवी एवं दीपा लोशाली को पुरस्कृत किया गया। साथ ही संस्थान में चल रही जनजातीय उपयोजना के अन्तर्गत लखनी गांव के कृषकों को पावर वीडर का वितरण किया गया।
मेले में लगी प्रदर्शनी, 25 स्टाल

किसान मेले में आयोजित प्रदर्शनी में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अनेक संस्थानों, कृषि विज्ञान केन्द्रों एवं सरकारी तथा गैर सरकारी संस्थानों ने हिस्सा लिया। जिसमें लगभग 25 स्टाल लगाए गए। इस मौके पर विभिन्न संस्थानों एवं विभागों के वैज्ञानिक एवं अधिकारी के अलावा विभिन्न क्षेत्रों से करीब 834 कृषक शामिल हुए। मेले में आयोजित कृषक गोष्ठी में पर्वतीय कृषि से सम्बन्धित विभिन्न पहलुओं पर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गयी। साथ ही कृषकों की विभिन्न समस्याओं का कृषि वैज्ञानिकों ने त्वरित समाधान किया। विभिन्न कृषकों द्वारा अपने अनुभव साझा किये। किसान मेले में कृषक गोष्ठी का संचालन डा. कमल कुमार पाण्डे किया जबकि कार्यक्रम का संचालन डा. आशीष कुमार सिंह व निधि सिंह ने संयुक्त रुप से किया जबकि विभागाध्यक्ष, फसल सुधार डा. निर्मल कुमार हेडाऊ ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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