अल्मोड़ा। उच्च न्यायालय नैनीताल के निर्देशानुसार जिला प्रशासन ने चितई गोलू देवता मन्दिर प्रबन्धन समिति का विधिवत पंजीकरण कर दिया है। इस मामले पर मंदिर के पुजारियों ने आपत्ति जताते हुए जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया है। उनकी आपत्ति है कि ट्रस्ट के पंजीकरण के वक्त उन्हें पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। अवगत कराया है कि उनके पक्ष का मामला उच्च न्यायालय के विचाराधीन है और उच्च न्यायालय के निर्णय के आने तक ट्रस्ट की कार्रवाई स्थगित रखी जाए।
गौरतलब है कि 4 जुलाई, 2020 को उच्च न्यायालय उत्तराखण्ड, नैनीताल द्वारा पारित आदेश एवं जिलाधिकारी अल्मोड़ा के निर्देशानुसार चितई गोलू देवता मन्दिर प्रबन्धन समिति का विधिवत पंजीकरण कर दिया गया है। इस समिति में जिलाधिकारी अल्मोड़ा अध्यक्ष, उप जिलाधिकारी सदर उपाध्यक्ष तथा मुख्य कोषाधिकारी अल्मोड़ा व जिला पर्यटन विकास अधिकारी पदेन सदस्य हैं जबकि प्रबन्धक चितई मन्दिर समिति सदस्य, पुजारी प्रतिनिधि सदस्य और एक विशेष आमंत्रित सदस्य प्रबन्धन समिति के सदस्य होंगे।
दूसरी तरफ 6 जुलाई 2020 को समिति के पंजीकरण को लेकर कुछ पुजारियों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। जिसमें पुजारियों का कहना है कि मंदिर को ट्रस्ट बनाया गया, लेकिन पुजारियों को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया। ऐसे में यह निर्णय एकतरफा प्रतीत होता है। उनका अनुरोध है कि इसी मसले पर उनका मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इसलिए मामले पर उच्च न्यायालय के निर्णय का इंतजार किया जाए और तब तक ट्रस्ट की कार्रवाई स्थगित रखी जाए। ज्ञापन देने वालों में प्रधान पुजारी संध्या पंत समेत संतोष कुमार पंत, हरिविनोद पंत, प्रकाश चंद्र पंत, किरण कुमार पंत आदि शामिल थे।
ट्रस्ट पर 8 जुलाई को लोग देंगे विचार:- उप जिलाधिकारी सदर सीमा विश्वकर्मा ने बताया है कि 08 जुलाई, 2020 को चितई गोलू देवता मंदिर परिसर में दोपहर 12 बजे से जनसभा आयोजित होगी। उन्होंने बताया कि इस जनसभा में मंदिर के पुजारियों एवं अन्य व्यक्तियों द्वारा ट्रस्ट के सम्बन्ध में विचार रखे जायेंगे।
अल्मोड़ा: चितई गोलू मंदिर ट्रस्ट बना, मगर पुजारियों ने जताई आपत्ति, डीएम से मिले पुजारी
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