HomeUttarakhandDehradunउत्तराखंड : आयुर्वेद विवि में हुए भ्रष्टाचार-गड़बड़ियों की जांच के लिए समिति...

उत्तराखंड : आयुर्वेद विवि में हुए भ्रष्टाचार-गड़बड़ियों की जांच के लिए समिति का गठन

क्वारब-चौसली लिंक मार्ग खुशखबरी
LIVE UPDATE

बड़ी खुशखबरी: क्वॉरब-चौसली लिंक मार्ग को मिली हरी झंडी, कल से खुल सकता है रास्ता!

अल्मोड़ा प्रशासन की टीम ने किया मुआयना, देखिए ग्राउंड रिपोर्ट और गाड़ियों का लाइव ट्रायल...

यहाँ क्लिक कर के पूरा वीडियो देखें ➔

देहरादून। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, देहरादून में वर्ष 2017 से 2022 तक हुए नियुक्तियों, भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं की शासन ने जांच बैठा दी है। इसके लिए अपर सचिव की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है, जो 15 दिन में अपनी रिपोर्ट शासन को देगी।

ADVERTISEMENTSAd

Uttarakhand Ayurved University, Dehradun
आयुर्वेद विवि पिछले कई सालों से वित्तीय अनियमितताओं, भ्रष्टाचार, नियुक्तियों में गड़बड़ियों के लिए चर्चाओं में है। पिछले साल अगस्त में अपर सचिव राजेंद्र सिंह ने विवि के कुलसचिव से बिंदुवार सभी आरोपों की जांच रिपोर्ट मांगी थी। अब मामले में अपर सचिव राजेंद्र सिंह ने अपर सचिव कार्मिक एसएस वल्दिया की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है।

इस जांच समिति में अपर सचिव वित्त अमिता जोशी, संयुक्त निदेशक आयुर्वेदिक एवं यूनानी कृष्ण सिंह नपलच्याल और ऑडिट अधिकारी रजत मेहरा भी सदस्य होंगे। उन्होंने समिति को निर्देश दिए हैं कि वह 15 दिन के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराएं।

इस तरह की गड़बड़ियों के आरोप
योग अनुदेशकों के पदों पर जारी रोस्टर को बदलने, माइक्रोबायोलॉजिस्ट के पदों पर भर्ती में नियमों का अनुपालन न करने, बायोमेडिकल संकाय व संस्कृत में असिस्टेंट प्रोफेसर एवं पंचकर्म सहायक के पदों पर विज्ञप्ति प्रकाशित करने और फिर रद्द करने, विवि में पद न होते हुए भी संस्कृत शिक्षकों को प्रमोशन एवं एसीपी का भुगतान करने, बिना शासन की अनुमति बार-बार विवि की ओर से विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकालने और रोक लगाने, विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए विवि की ओर से गठित समितियों के गठन की विस्तृत सूचना शासन को न देने के साथ ही पीआरडी के माध्यम से 60 से अधिक युवाओं को भर्ती करने का आरोप है।

बधाई : चंपावत की गुंजन कुंवर के सिर सजा मिस उत्तराखंड का ताज, काशीपुर की शिखा उपविजेता

पूर्व कुलपति, कुलसचिव भी आ सकते हैं शिकंजे में
आयुर्वेद विवि में वर्ष 2017 से 2022 के बीच विवि में पूर्व कुलपति और कुलसचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं देने वाले अधिकारी भी इस जांच की जद में आ सकते हैं।

हरक तक पहुंच सकती है जांच की आंच
आयुर्वेद विश्वविद्यालय में शुरू हुई जांच की आंच पांच साल तक विभाग के मंत्री रहे डॉ. हरक सिंह रावत तक भी पहुंच सकती है। सूत्रों के मुताबिक, उनके कार्यकाल में विभाग में तमाम नियुक्तियां हुईं। आयुर्वेद विवि में भी उनके कार्यकाल में नियुक्तियां हुई हैं। अब यह जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि कब कौन सी भर्ती सही हुई कौन सी नियमों के विपरीत।

उत्तराखंड में महंगा हुआ हवाई सफर, हल्द्वानी-देहरादून और पिथौरागढ़ के लिए देना होगा इतना किराया

UPCL Recruitment 2022 : उत्तराखंड पावर ​​कॉर्पोरेशन लिमिटेड में कई पदों पर भर्ती, जल्द करें आवेदन

ADVERTISEMENTS
RELATED ARTICLES

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments