CNE REPORTER, अल्मोड़ा। पहाड़ की कठिन परिस्थितियों के बीच एक परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अल्मोड़ा जिले के एक युवक की मामूली चोट अब जानलेवा संकट बन चुकी है। सीढ़ियों से गिरने के बाद लगी गंभीर चोट और फिर गलत इलाज या लापरवाही के चलते शरीर में चिपकी यूरिनरी ट्यूब ने युवक की स्थिति को अत्यंत नाजुक बना दिया है। अब ऑपरेशन ही एकमात्र रास्ता है, लेकिन गरीबी की दीवार इलाज के आड़े आ रही है।
हादसे ने छीनी खुशियां, अब संक्रमण का खतरा
मामला तहसील व जिला अल्मोड़ा के ग्राम भौरगधेरा (ग्राम सभा हटौला) का है। यहाँ के निवासी स्वर्गीय राम सिंह के पुत्र हीरा सिंह कुछ माह पूर्व अपने घर की सीढ़ियों से गिर गए थे। इस हादसे में उनकी कमर के नीचे गहरी चोट आई। आनन-फानन में उन्हें हल्द्वानी के अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें पेशाब की नली (यूरिनरी ट्यूब) लगाई और कुछ दवाइयां देकर घर भेज दिया।
दुर्भाग्यवश, हीरा सिंह की स्थिति में सुधार होने के बजाय वह और बिगड़ गई। लंबे समय तक नली लगे रहने के कारण वह अब शरीर के अंदरूनी हिस्सों से चिपक गई है। विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि अब बिना बड़े ऑपरेशन के इसे ठीक करना संभव नहीं है।
आर्थिक तंगी और लाचारी: कौन चलाएगा घर?
हीरा सिंह के परिवार की स्थिति पहले से ही अत्यंत दयनीय है। घर में वह अकेले कमाने वाले थे, लेकिन अब बिस्तर पर होने के कारण आय का कोई जरिया नहीं बचा है। परिवार में बुजुर्ग माता और छोटे बच्चे हैं, जिनके सामने अब दो जून की रोटी का संकट भी खड़ा हो गया है। ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने चंदा इकट्ठा कर प्राथमिक उपचार तो करा दिया, लेकिन ऑपरेशन के भारी-भरकम खर्च को उठा पाना परिवार के बस की बात नहीं है।
“हीरा सिंह का परिवार न केवल स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है, बल्कि आर्थिक तंगी ने उनकी जीने की उम्मीदों को भी कमजोर कर दिया है। प्रशासन को इस ओर तुरंत ध्यान देना चाहिए।” — शैलजा चम्याल, जिला पंचायत सदस्य
जिलाधिकारी से गुहार: मदद की अपील
युवक की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला पंचायत सदस्य शैलजा चम्याल ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर मुख्यमंत्री राहत कोष या अन्य सरकारी योजनाओं से त्वरित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि परिवार के पास अब इलाज के लिए कोई संसाधन शेष नहीं है। पत्र के साथ बैंक विवरण भी साझा किए गए हैं ताकि सहायता सीधे पीड़ित तक पहुँच सके।
पहाड़ की चुनौती: प्रशासन और समाज पर टिकी उम्मीदें
यह मामला एक बार फिर उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की लाचारी को उजागर करता है। ऐसे समय में जब एक युवा जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है, समाज और प्रशासन की सक्रियता ही उसे नई जिंदगी दे सकती है।
मदद के लिए संपर्क करें: यदि आप इस पीड़ित परिवार की किसी भी रूप में सहायता करना चाहते हैं, तो पीड़ित के भाई से इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं: 📞 संपर्क नंबर: 9717662601
निवेदक : शैलजा चम्याल (जिला पंचायत सदस्य, सल्ला भाटकोट, भैसियाछाना, अल्मोड़ा)
मो. — 8958722306, 9411542508, 7248673965


