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उद्योगों में महिलाएं अब रात की पारी में भी काम कर सकेंगी, कैबिनेट में अहम प्रस्ताव को मिली मंजूरी

देहरादून। प्रदेश में कम छात्र संख्या वाले सरकारी स्कूलों पर तालाबंदी का दायरा और व्यापक होने जा रहा है। सरकार ने पहले प्राथमिक स्कूलों पर ही इस नई व्यवस्था को लागू किया था। इसी कड़ी में आगे बढ़ते हुए सरकार ने अब कम छात्रा संख्या वाले हाई स्कूल और इंटर कालेज भी बंद करने का मन बना लिया है। सचिवालय में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस बाबत प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। हालांकि, विधानसभा का सत्र आहूत होने के कारण बैठक में लिए गए फैसलों की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी। बैठक के बाद सरकार के प्रवक्ता कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने विधान सभा सत्रा आहूत होने के कारण औपचारिक रूप से कैबिनेट के फैसलों के संबंध में जानकारी देने में असमर्थता व्यक्त की। हालांकि उन्होंने बताया कि कैबिनेट बैठक में करीब दो दर्जन विषयों पर चर्चा हुई, जिसमें से कुछ पर फैसला हुआ और कुछ स्थगित कर दिए गए। इस बीच, सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार औद्योगिक क्षेत्रों में महिला कामगारों को लेकर भी कैबिनेट में अहम प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। जानकारी के अनुसार उद्योगों में महिलाएं अब रात की पारी में भी काम कर सकेंगी। इसके लिए कारखाना अधिनियम में संशोधन का निर्णय लिया गया है। अदालत के निर्देशानुसार व्यवस्था की गई है। महिला सुपरवाइजर के निर्देशन में महिलाएं रात की पारी में काम करेंगी, लेकिन प्रबंधन असमर्थता की स्थिति में किसी महिला को नौकरी से नहीं निकाल पाएगा। कैबिनेट ने कम छात्र संख्या वाले 11 इंटर कालेजों व 23 हाई स्कूलों को बंद करने के प्रस्ताव का मंजूरी दी है। ऐसे विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को निकटवर्ती विद्यालयों में भेजा जाएगा। बंद होने वाले विद्यालयों के शिक्षकों के पद मृत घोषित नहीं किए जाएंगे। ऐसे शिक्षक फिलहाल रिजर्व में रहेंगे और आवश्यकतानुसार उन्हें अन्य विद्यालयों में तैनाती दी जाएगी।
इसके अलावा हर ब्लाॅक स्तर पर विकसित होने वाले ग्रोथ सेंटर योजना को एकीकृत किए जाने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। एकीकृत होने के बाद विभिन्न विभागों की इससे संबंधित योजनाएं एक छत्री के नीचे एमएसएमई के अन्तर्गत संचालित होंगी। राज्य स्तर पर ग्रोथ सेंटर के चयन को मुख्य सचिव एवं जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी बनेगी। इसके अलावा 66 न्याय पंचायतों में अटल आदर्श ग्राम योजना के संचालन के लिए जिला स्तर का नोडल अधिकारी बनाया जाएगा। उत्तराखंड के जंगलों में बहुतायत पाई जाने वाली औषधी गुणों से भरपूर कीड़ा जड़ी को ग्रामीणों की आर्थिकी से जोड़ने के लिए लिए भी सरकार ने अहम कदम उठाया है। जानकारी के अनुसार कैबिनेट बैठक में कीड़ा जड़ी के दोहन के लिए नीति को भी मंजूरी दी गई है। अब मई के बजाए अप्रैल माह से कीड़ा जड़ी का चुगान किया जा सकेगा। तय प्रक्रिया के अनुसार वन पंचायत क्षेत्रों व वनों से जड़ी का दोहन किया जाएगा। इसके लिए बकायदा चुगान करने वालों का पंजीकरण होगा और प्रति सौ ग्राम पर एक हजार रुपए शुल्क लिया जाएगा। सचिवालय के पंचम तल में स्थित सभागार को वीरचन्द्र सिंह गढ़वाली के नाम को समर्पित करने का निर्णय भी लिया गया है। एनएच-74 के लिए हरिद्वार-नगीना के बीच उत्तराखंड की सीमा में 64.74 हेक्टेअर वन भूमि राजमार्ग प्राधिकरण को निःशुल्क उपलब्ध कराने का निर्णय भी लिया गया है। भूमि की कीमत लगभग 847.98 करोड़ आंकी गई है। सचिवालय सेवा के किसी भी संवर्ग के अधिकारी अब 10 हजार ग्रेड पे के समकक्ष वेतनमान नहीं पा सकेंगे। कैबिनेट ने पूर्व सरकार द्वारा दो अधिकारियों को यह वेतनमान देने के आदेश को निरस्त करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने का भी निर्णय लिया गया है। उत्तराखंड पावर कार्पोरेशन में सतर्कता प्रकोष्ठ में प्रतिनियुक्ति के 8 पदों के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है। प्रकोष्ठ में डीआईजी/एसएसपी का एक, उपाधीक्षक का एक, निरीक्षक के 2 तथा उप निरीक्षक 4 पद प्रतिनियुक्ति से भरे जा सकेंगे। सौर उर्जा नीति में परिवर्तन कर पहाड़ में 5 मेगावाट तक की परियोजना स्थानीय लोगों को ही आवंटित करने का निर्णय लिया गया है। आयुष नीति को भी एमएसएमई से जोड़ते हुए प्ररियोजना लागत के हिसाब से अनुदान देने का निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश नगर निगम अध्निियम 1961 में संशोधन को भी मंजूरी दी है। इससे राज्य सरकार अब किसी भी नगर निगम में नए क्षेत्र जोड़ या हटा सकेगी। मोबाइल टावर व भूमिगत कैबिल को बिछाने के लिए दिशा-निर्देश भी तय कर दिए गए हैं। इसके लिए जिलाधिकारी को प्राधिकृत किया गया है। इसके अलावा ओबीसी के संबंध में क्रीमीलेयर की आय सीमा केन्द्र सरकार के क्रम में 6 लाख से बढ़ाकर 8 लाख करने का भी निर्णय लिया गया है।

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