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देखिए… बास्ती गांव में सबसे पहले पहुंचा सीएनई, क्या है असल दर्द और क्या है फूड प्वायजनिंग की कहानी

बागेश्वर । जिला मुख्यालय से 73 किमी दूर बास्ती गांव से उत्तराखंड का कोई भी व्यक्ति अब अंजान नहीं होगा। विवाह समारोह में भोजन करने के बाद सैकड़ों घराती और बारातियों को फूड प्वायजनिंग होने की घटना ने इस गांव को रातों रात चर्चा में ला दिया। गांव लगभग खाली हो गया था इसलिए न तो नेता और ना ही अधिकारी गांव की ओर गए। जाते भी तो पांच किमी लंबी गड्ढों से भरपूर सड़क पर गाड़ी से चलने के बाद शायद उन्हें भी चिकित्सालय में भर्ती होना पड़ता। 12 साल पहले ग्रामीणों के लंबे आंदोलन के बाद सड़क बनी, तब ग्रामीण जेसीबी पर एसडीएम को बिठाकर यहां तक लाए थे, सड़क तो बन गई लेकिन इस पर 12 साल बाद भी डामर नहीं डाला जा सका है। सीएनई जब गांव में पहुंचा तो ग्रामीणों ने मीडिया के प्रति भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि कोई भी मीडिया कर्मी  फूड प्वायजनिंग की घटना के बाद गांव में नहीं पहुंचा। खैर ऐसा नहीं है कि फूड प्वायजनिंग से पूरा गांव ही खाली हो गया। लेकिन अधिकांश लोग या तो बीमार होने के कारण चिकित्सालय में हैं या फिर तीमारदार के रूप में वहां डटें हैं। गांव उदास है, एक अनजाना भय उनके दिमाग व चेहरों पर छाया हुआ है। फूड प्वायजनिंग से अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है। जिस परिवार में शादी थी, उसके मुखिया इस भावना से ग्रस्त हो गए हैं कि उनके यहां दावत खाकर लेागों की जान पर बन आई। हालांकि अभी पुलिस ने किसी के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया है, लेकिन मोहन सिंह मेहर मानवीय आधार पर अपने आप को दोषी मान रहे हैं। खैर हमें यहां आकर पता चला कि गांव में उस दिन दो पूजाएं थीं, जहां मांस की भेंट चढ़ी थी। गांव के कई लोगोंने वहां भी भोजन किया था, इस वजह से गांव के कई लोग फूड प्वायजनिंग से बच गए। वर्ना पीड़ितों की संख्या कहीं अधिक होती।
खैर मोहन सिंह मेहर समझ नहीं पा रहे हैं कि उन्होंने जिस दावत के लिए इतने मेहनत करके इंतजाम किए थे,उनमें कहां चूक रह गई, जो उनके घर की दावत ग्रामीणों के लिए जहर बन गई।
गैर इस हिला देेने वाले हादसे  ने प्रदेश सरकार के किसी भी आपदा के  लिए तैयार उत्तराखंड के दावों की पोल भी खोल कर रख दी है। सरकारी चिकित्सालयों की क्षमता और वहां उपलब्ध सुविधाओं के बारे में भी दुनिया जान गई है। हम तो यही दुआकरेंगे कि ईश्वर ऐसी विपत्ति भविष्य में किसी गांव में न आए

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