Wednesday , November 21 2018
Breaking News
Home / Kalamkaar / बच्चों को नशाखोरी से बचाने के लिए दोस्त की भूमिका निभाएं अभिभावक

बच्चों को नशाखोरी से बचाने के लिए दोस्त की भूमिका निभाएं अभिभावक

विनीत बिष्ट, अल्मोड़ा

नशा वर्तमान युवा पीढ़ी के लिए सबसे बड़ी समस्या है। आजकल अनेक युवा इस व्यसन में फंस चुके हैं और अगर वो बाहर निकलना भी चाहें तो चाहकर भी बाहर नही आ पाते …. आज से कुछ समय पूर्व तक नशे के रूप शराब, सिगरेट, बीड़ी आदि का प्रयोग ही किया जाता था और वो भी काफी कम मात्रा पर, लेकिन जैसे समाज ने पाश्चात्य सभ्यता की और देखना प्रारंभ किया। उनकी बुरी चीजों को तुरन्त स्वीकार करना शुरू कर दिया और उनके देशों से आये हुए नशों को तो भारत के युवा इतनी जल्दी स्वीकार करने लगे हैं कि पंजाब राज्य के लिए उड़ता पंजाब जैसी मूवी बनानी पड़ी.. उत्तराखण्ड राज्य भी उड़ता उत्तराखण्ड बनने की और तेजी से अग्रसर है, क्योंकि ये राज्य अधिकतर नौकरी पेशा लोगो से भरा हुआ है तो माँ ,पिताजी अपनी संतानों को उनकी जरूरतों से ज्यादा धन देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ लेते हैं। उन्हें समय देना, उनकी समस्याओं को मिलकर दूर करना, उनका दोस्त बनना आजकल के माँ बाप नही बन पा रहे हैं और इस कारण संतान एकाकी जीवन की और चली जाती है… ओर फिर धीरे—धीरे नशे की गिरफ्त में, जहाँ से वापस आ पाना उसके लिए काफी कठिन हो जाता है। क्योंकि स्मैक ,कोकीन, अफीम, ड्रग्स आदि का नशा एक ऐसा नशा है अगर किसी को इसकी आदत एक हफ्ता भी लग गयी तो फिर इसका छूटना मुश्किल हो जाता है.. और जो युवा भविष्य में देश को खड़ा करने के लिए कार्य करता वो अपने पांवों में भी खड़ा नही हो पाता… इसके लिए वो युवा तो जिम्मेदार है ही जो इस दिशा में जा रहा है इसके लिए हम ज्यादा जिम्मेदार हैं। हम अपनी जिम्मेदारियों से भागते हैं अगर किसी युवा को नशे में देखते है तो उसके घर बताने या उसे समझाने के बदले हम ये बोलकर इतिश्री कर लेते हैं कि कौन सा अपना बच्चा है लेकिन, ये आग जंगल की आग है आज नही तो कल हमारे घर भी आएगी ही… वर्तमान समय की शिक्षा व्यवस्था केवल ओर केवल युवाओं को व्यस्त रखने का कार्य करती है क्योंकि सुबह 5 बजे से शाम 6 बजे तक बच्चों को केवल टयूशन ओर स्कूल के लिए दौड़ता हुआ देखा जा सकता है… शिक्षक केवल अपने विषय तक सीमित है कोई शिक्षक की छात्र का मित्र बनकर उससे उसकी समस्याओं के बारे में नही पूछता तो युवा जाएगा ही किसी ऐसे गलत व्यसन की और जिससे उसे तत्कालिक शांति मिल सके और फिर वो नशे के फेर में ऐसा फंस जाता है कि उसकी वापसी कठिन हो जाती है.. लेकिन युवाओं को खेल के प्रति जागरूक करके खेल मैदान की और ले जाने से भी इस परवर्ती से बचाया जा सकता है तो गाने, नाच के शौकीन युवाओं से उनकी रुचि के अनुसार कार्य करा कर हम अपनी आने वाली पीढ़ी बचा सकते हैं। उसके लिए सरकार को इस विषय मे जरूर सोचना होगा कि पुलिस अकसर एक ग्राम दो ग्राम स्मैक के साथ तो युवाओं को पकड़ लेती है लेकिन, जो उन्हें ये स्मैक उपलब्ध करा रहा है उसे क्यों नही पकड़ पाती ये भी एक यक्ष प्रश्न है..लेकिन इस लेख के माध्यम से मैं युवाओं से अनुरोध करूँगा की आप लोगो से आपके खुद के सपने ही नही जुड़े है बल्कि आपके परिवार ओर समाज के सपने भी जुड़े है..कल आप लोगो मे से ही कोई देश चलाएगा, कोई देश के लिए पदक लाएगा, कोई चाँद में जायेगा, ओर विश्व विजय कहलायेगा… इस लिए इस प्रवर्ति से बचे ओर जो साथी इस ओर जा रहा है उसे भी रोकें…

About admin

Check Also

डॉ गणेश उपाध्याय की कलम से…..

किच्छा -आजादी के बाद 1952 से लेकर 21वीं सदी के पहले डेढ़ दशक तक राजनीति …

One comment

  1. Nice thought

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *