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व्यंग्य : मी टू वर्सेज यू टू

इं. ललित शौर्य
प्रदेश मंत्री अखिल भारतीय साहित्य परिषद
ग्राम+पोस्ट-मुवानी
जिला-पिथौरागढ़
पिन-262572
फोन-7351467702
उत्तराखंड

चारों ओर मी टू का हाहाकार मचा हुआ है। किसी से भी पूछ लो, बच्चा तक बता डालेगा मी टू चल रिया है। फोक-वोग दूर-दूर तक नहीँ दिखाई दे रिया। पुरुष जाति दशहत में है। कब किधर से किसके पुराने पाप उघड़ जाएं कोई नहीँ जानता। कब मी टू का राफेल बम बरसा दे, कब धज्जियां उड़ा दे, कब स्टेट्स लेबल को उखाड़ फेंके किसको पता। हॉलीवुड से आई इस हवा ने बॉलीवुड को पूरी तरह अपने आगोश में ले लिया है। मी टू का धाँसू सीन देखा जा रहा है। बड़ी-बड़ी हस्तियों की कस्तीयां डूब रही हैं। मी टू बॉलीवुड, राजनीति और पत्रकारिता से जुड़े कई लोगों की लुटिया गोल कर चुका है। आगे किसका नम्बर आएगा देखना दिलचस्प होगा। संस्कार बांटने वाले, भजन गाने वाले, खबरें छापने वाले सभी मी टू के लपेटे में हैं।
अपने यहाँ तो यू टू का चलन रहा है। मी टू इधर के लिए नया है। यहां हर बात पर यू टू का बुखार सब पर छाया रहता है। किसी को किसी गलतियां बता दो तो बिदग पड़ता है। वो बोलता है यू टू मतलब तुम भी क्या कम हो। पहले अपने गिरेबाँ में झाकों फिर बात करना। बड़ा आया मेरी गलतियां बताने वाला। राजनीति में अपने यहां यू टू बड़ा फल फूल रहा है। यहां दशकों से यू टू का खूब खेल खेला जा रा है। राजनीतिक पार्टियां एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए तू-तू, यू टू करते रहती हैं। एक कहता है तुम भ्रष्टाचार में लिप्त हो अगला बोलता है यू टू, एक बोलता है तुम निकम्मे हो अगला उगलता है यू टू, एक बोलता है तुम्हारी सरकार सोई हुयी है अगला बोलता सेम तुम्हारी तरह। जब तुम सरकार में थे सेम ऐसे ही सोते थे। यू टू का खेल हर क्षेत्र में खेला जाता है। साहित्य में यू टू का खेल बड़ी चतुराई से खेला जाता है। कोई भी साहित्यकार अगले साहित्यकार की रचना को तभी उम्दा बोलता है जब अगला उसकी रचना को शानदार शब्द से नवाजता है। ये साहित्य का यू टू है। ऐसे ही आजकल शोसल मीडिया में यू टू का ही दौर है।किसी के भी उंगलियों से तारीफ का फूल तभी हिलोरे खाता है, जब अगले के द्वारा उसके पोस्ट पर प्रसंसा का बांध बाधा गया हो।
इंडियां में मी टू वर्सेज यू टू देखा जा सकता है। मी टू सनसनी खेज खुलासे कर रिया है तो, यू टू सभी को एक ही कटघरे में खींच रिया है। और वो हमाम में सब… वाले मुहावरे को सच साबित कर रहा है।
मी टू की भयंकर सुनामी ने बड़े-बड़े महलों को जर्जर कर डाला है। बॉलीवुड की चूलें हिल रही हैं। चूल हिलने से बड़े-बड़े औहधों पर चढ़े औधें मुँह लुढ़क रहे हैं। यू टू का आतंक इतना भयंकर है की लोग मुँह छिपाये खूम रहे हैं। कब किसके उजले मुखड़े पर यू टू के छींटे पड़ जाएं। दशकों पहले के पाप उघड़ने से बन्दा दशकों बाद हलकान है।वो अपना चालान कटने से डर रिया है। कई बंदे तो ये सोच रहे हैं उन्होंने जो तब किया था वो अब यू टू की श्रेणी में आता है या नहीँ। यू टू की स्टैंडर्ड परिभाषा के लिए लोग गूगल बाबा की दाड़ी नोंच रहे हैं।
खैर मी टू के आरोपों से बचने के लिए बन्दा यू टू का शिगुफा छोड़ रहा है। कई बार तब की सहमति का गुलाब, अबका बबूल बनकर निकल रिया है। खैर यू टू वाले इस देश में मी टू का जलवा लाजवाब देखने को मिल रिया है। मी टू वर्सेज यू टू जारी है। आगे-आगे देखते हैं,होता है क्या।

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