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राजकुमार ठुकराल : इन्हें दुआ की नहीं दवा की जरूरत है

इस वीडियो क्लिप को यहां लगाने का उदृदेश्य विधायक राजकुमार ठुकराल के व्यवहार को लोगों को समझाना है


रजनीश तपन

पिछले कुछ दिनों के भीतर उत्तराखंड के रूद्रपुर इलाके से वहां के विधायक राजकुमार ठुकराल के तीन वीडियो क्लिप जारी हुए हैं। दो क्लिपों में तो वे छात्रों को संबोधित करते हुए अपना यशोगान कर रहे हैं और एक में सीपीयू की महिला उपनिरीक्षक को हड़का रहे हैं। हालांकि मामले की जांच एसएसपी ने शुरू करवा दी है, लेकिन नतीजा क्या निकलेगा यह सबको पता है। पहली दो क्लिपों को विधायक के समर्थकों ने यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि वह कुछ साल पुराने हैं, लेकिन महिला सब इंस्पेक्टर को हड़काने वाले वीडियो पर विधायक जी के समर्थकों को कोई जवाब नहीं सूझ रहा है। यहां आप को याद दिला दें कि विधायक की इससे पहले भी कई वीडियो जारी हो चुकी हैं। इनमें से एक महिलाओं के साथ हाथापायी की थी, जिससे भाजपा की किरकिरी भी हो चुकी है। विधायक ने बाद में माफी भी मांग ली थी। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि विधायक इस तरह की आक्रामकता पर बार बार क्यों उतर आते हैं। इस गुत्थी को मनोवैज्ञानिकों ने सुलझा लिया है और आपको इसका जवाब विधायक के छात्रसंघ चुनाव को लेकर छात्रों को संबोधित करते हुए जारी हुए दो वीडियो क्लिपों से ही मिल जाएगा। इन क्लिपों में विधायक बार बार यह साबित करते दिख रहे हैं कि रूद्रपुर के अधिकारी रिमोट से चलना छोड़ दें, हमारे कार्यकर्ताओं के साथ सभ्यता से पेश आएं। सवाल यह है कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों आई कि विधायक को अपने कार्यकर्ताओं के सामने ही अधिकारियों (जो कि वहां थे ही नहीं) को चेतावनी देने की जरूरत पड़ गई। वे इन वीडियोज में यह भी कह रहे हैं कि वे भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं।
मनोविज्ञान कहता है कि जब कोई व्यक्ति बार बार अपने पद के बारे में लोगों को बताता है तो यह उसके अंतरमन में छिपी असुरक्षा की भावना को जाहिर करता है। उसे यह लगता है कि उसके पद को लेकर लोग गंभीर नहीं हैं। इसी भावना को लेकर वह व्यक्ति बार-बार आक्रामक भी हो जाते हैं। विधायक के बारे में भी यही बात कही जा सकती है। पुलिस की महिला उपनिरीक्षक को धमकाना भी विधायक के जेहन में छिपी यही असुरक्षा की भावना को ही जाहिर कर रहा है। बोलते-बोलते वे भूल जाते हैं कि वे विपक्ष में नहीं हैं सत्ता में हैं। वे विपक्ष के नेता जैसा व्यवहार करने लगते हैं। दूसरों पर आरोप मढऩे लगते हैं। माना कि ठुकराल के प्रतिद्वंद्वी तिलकराज बेहड़ रूद्रपुर के कद्दावर नेता हैं, लेकिन जब सरकार में भाजपा है और ठुकराल भाजपा के ही विधायक है तो कद्दावर तो उन्हें होना चाहिए था।
ठुकराल हर बार यही जताने का प्रयास करते हैंं कि अफसर उनकी नहीं सुनते वे बेहड़ के इशारों पर काम करते हैं। यदि कांग्रेस विपक्ष में है तो यह सब संभव कैसे हो रहा है। यहां आपको बता दें कि कभी बेहड़ और ठुकराल दोनों ही भाजपा में थे। दोनों ने एक साथ काम भी किया है। बेहड़ विधायक थे उस वक्त। फिर ठुकराल के मुंह से इस तरह की बातें हास्य ही पैदा करने वाली होती हैं।
नई पीढ़ी के नेताओं में गिने जाने वाले ठुकराल अब सत्ताधारी पार्टी के प्रतिनिधि है। उन्हें अपने व्यवहार में शालीनता लानी ही होगी। दबंगई व दादागिरी से राजनीति नहीं होती बेहड़ ने दबंगई दिखाई तो सत्ता से बाहर होगए। यह बात ठुकराल स्वयं ही कहते हैं। महिलाएं चाहे घरेलू कामकाजी हो या फिर नौकरीपेशे वाली उनके साथ बातचीत में विधायक को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए थी। ताजा प्रकरण में विधायक भवन के बाहर खड़ी महिला सब इंस्पेक्टर पर भड़कने के बजाए अंदर बैठे अफसरों से बात करके मामले को सुलझाते तो विवाद में भी नहीं पड़ते और उनका कद भी पुलिस की नजर में बढ़ता, लेकिन अपनी आदत से मजबूर ठुकराल बाहर आकर महिला सब इन्सपेक्टर से जा उलझे। महिला से उलझने की कीमत क्या हो सकती है यह बात विधायक भी इससे पहले की घटना से समझ सकते हैं यदि समझ न आई हो तो अपने ही मुख्यमंत्री को उज्जवला बहुगुणा विवाद भी देख सकते हैं।
दो बार विधायक रह चुके ठुकराल यह तो जान ही चुके हैं कि रूद्रपुर के अफसर उनकी नहीं सुनते, वे गुस्सा करते करते थक ही चुके होंगे। एक बार नए सिरें से कोशिश करें प्रेम से अधिकारियों -कर्मचारियों के दिल जीतने की। शायद इससे बेहड़ का तोड़ निकल जाए।

 

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