Wednesday , December 12 2018
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खोदा पहाड़ निकलीं ऊषा

प्रदेश सरकार बने सवा साल के आसपास हो गया है। इस बीच सरकार में दायित्वों को लेकर जोड़तोड़ कभी अपने अंतिम मुकाम तक नहीं पहुंच सकी। कुछ दिन पहले अचानक सरकार में भाजपा कार्यकर्ताओं को एडजस्ट करने की कवायद की चर्चा को फिर पंख लगे लेकिन सारी की सारी चर्चा खोदा पहाड़ निकला चूहा वाली कहावत के साथ अचानक थम सी गई। सरकार ने बाल संरक्षण आयोग में अध्यक्ष पद को ऊषा नेगी को सौंप कर कार्यकर्ताओं को निराशा के बीहड़ में धकेल दिया। दरअसल ऊषा नेगी नेगी भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं के लिए विवादित नाम है। नारायण दत्त तिवारी के मुख्यमंत्रित्व काल में राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद की अध्यक्ष रह चुकीं ऊषा नेगी ठेठ भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए अस्वीकार्य हैं। हालांकि यह बात सही है कि ऊषा नेगी की राजनीति यात्रा भाजपा के बैनर तले ही शुरू हुई थी, लेकिन समय के साथ उन पर अवसरवादी होने का ठप्पा लग गया। अब जब त्रिवेंद्र सरकार ने पूरे सवा साल बाद एक मात्र पद पर नियुक्ति की है वह भी ऊषा नेगी की तो भाजपा के कार्यकर्ताओं में असंतोष फैलना स्वाभाविक ही है। ऊषा नेगी राजनीति में बहुत ज्यादा सक्रिय भी नहीं रही हैं ऐसे में त्रिवेंद्र से उनकी ही पार्टी के कार्यकर्ता सवाल करें तो गलत नहीं का जा सकता है। दरअसल विकास योजनाओं और अपने ही निर्णयों पर लगातार बैकफुट पर आने के कारण त्रिवेंद्र सरकार की लगातार आलोचना भी होती रही है। भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के मोर्चे पर भी प्रदेश सरकार सवा साल में कोई खास काम नहीं कर सकी। ऐसे में जैसी पिछली सरकार थी वैसी ही सरकार चलाते हुए पांच साल काटना वर्तमान सरकार का उद्देश्य दिखता महसूस हो रहा है। इस बीच सीएम बदलने की अफवाहों ने भी राज्य के भाजपा नेताओं की नाक में दम कर रखा है। विपक्ष (कांग्रेस) भी तीन- तीन मोर्चे बनाकर सरकार को परेशान करता आ रहा है। भाजपा कार्यकर्ताओं में उपज रहा अपनी ही सरकार के प्रति गुस्सा त्रिवेंद्र को कही भारी न पड़ जाए।