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धर्मगुरू बोले : मजहब और समाज के खिलाफ है कानून, प्रधानमंत्री से अध्यादेश ला सुप्रीम कोर्ट के समलैंगिता कानून पर रोक लगाने की मांग

नई दिल्ली। अब सड़कों पर भौंडा नाच होगा, आदर्श संस्कृति टूट जायेगी और पारिवारिक विघटनों का दायरा पश्चिमी देशों की तर्ज पर हमारे देश में भी होने लगेगा। यह कहना है भारत के तमाम धर्मगुरूओं का जो समलैंगिता को अपराध से श्रेणी से बाहर किये गये सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले से बेहद आहत हैं। जामा मस्जिद एडवाइजरी कमेटी के महासचिव तारीक बुखारी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अफसोसजनक बताते हुए कहा कि यह समाज व मजहब दोनों के लिए खराब है। भारत का कोई धर्म इसकी इजाजत नहीं देगा। विज्ञान भी इसे अप्राकृतिक मानता है। इधर अन्य धर्मगुरू भी एक स्वर में इसका विरोध कर रहे हैं। उनके मुताबिक इस फैसले से देश का माहौल भी खराब होगा। इधर हिंदू महासभा ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अध्यादेश लाकर कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग की। इसके अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणी ने कहा कि इससे न सिर्फ अराजकता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देश का चारित्रिक पतन भी होगा। केंद्र सरकार इस पर तत्काल सख्त कदम उठाए। फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम अहमद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से मजहबी लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। इससे देश का माहौल खराब होगा। अब पार्क व सार्वजनिक स्थानों पर भौंडा प्रदर्शन होगा। हजारों वर्षों की सांस्कृतिक-धार्मिक परंपरा को ठेस पहुंचेगी। यह रिश्ता पारिवारिक रूप को विघटित करेगा। दिल्ली जैन समाज के अध्यक्ष चक्रेश जैन ने कहा कि इससे सामाजिक ढांचा बिगड़ जाएगा। धर्म में कहीं भी इसे स्वीकार नहीं किया गया है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमेटी के प्रवक्ता परमिंदर पाल सिंह ने कहा कि इस फैसले से दिक्कतें बढ़ेंगी, क्योंकि समलैंगिकता धार्मिक व सामाजिक रूप से मान्य नहीं है। जामा मस्जिद एडवाइजरी कमेटी के महासचिव तारीक बुखारी ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अफसोसजनक बताते हुए इसे विज्ञान की दृष्टि से भी आप्राकृतिक बताया है।

विश्व के 8 देशों में समलैंलिगता पर है सजा—ए—मौत का प्रावधान
समलैंगिकता के खिलाफ 8 देशों में सजा-ए-मौत की व्यवस्था की गई है। बड़े अरब देशों में समलैंगिकता को लेकर बेहद सख्त प्रावधान हैं। ईराक और सूडान के अलावा ईरान और सऊदी अरब जैसे देशों में समलैंगिकता के दोषियों के लिए मौत की सजा की व्यवस्था की गई है। पाकिस्तान, अफगानिस्तान और मौरीतानिया में भी तकनीकी तौर पर (शरिया कानून की व्याख्या के अनुसार) इस अपराध के लिए मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है। हालांकि, विश्व के विकसित देशों में समलैंगिक संबंधों को कानूनी तौर पर स्वीकार कर लिया गया है। अमेरिका, इंग्लैंड और कनाडा जैसे देशों में समलैंगिक वैवाहिक संबंधों को कानूनी मान्यता दे दी गई है। लैटिन अमरीकी देशों ब्राजील और अर्जेंटिना जैसे देशों में भी समलैंगिक संबंध को कानूनी बना दिया गया है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया में पार्टनरशिप को मान्यता दे दी गई है।

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