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हिंदी साहित्य जगत में हमेशा याद किये जायेंगे साहित्यकार स्व. बलवंत मनराल

ज़माना बड़े शौक़ से सुन रहा था हमीं सो गए दास्ताँ कहते कहते  ……पिता की मृत्यु नही होती, बल्कि वह अपने अंश अपने पुत्रों के रूप में जीवित रहता है। यह परंपरा सदियों से चली आयी है। वास्तव में जब पूज्य पिताजी को याद करता हूं आज भी आंखे नम हो उठती हैं। सत्य तो यह है …

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10 अगस्त, मनराल जयंती पर विशेष : ‘पहाड़ के एक अपराजेय साहित्यकार थे बलवंत मनराल’

आज 10 अगस्त अपराजेय साहित्यकार बलवंत मनराल की जन्मतिथि है। हिंदी के साठोत्तरी युग के सुप्रसिद्ध साहित्यकार उवं चर्चित कथाकार मनराल जी पक्षाघात के कारण अस्वस्थता की स्थिति में भी अपने जीवन के अंत तक अपनी कलम चलाते रहे। यहां मनराल जी को आत्मीयता से याद कर रहे हैं उनके …

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विनम्र श्रद्धांजलि : ..नही रहीं उत्तराखंड की तीजन बाई कबूतरी देवी

देहरादून। प्रसिद्ध लोक गायिका कबूतरी देवी अब हमारे बीच नहीं रहीं। शनिवार को उनका बीमारी के बाद निधन हो गया है। वह भले ही आज हमारे बीच नही रहीं, लेकिन अपने लोकप्रिय गीतों के माध्यम से हमेशा याद की जायेंगी। उत्तराखंड की संगीत कला का इतिहास में उनका नाम हमेशा …

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