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कविता : मेरी तरफ से युग पुरुष को श्रद्धा सुमन….

आपकी मृत्यु पर मैं कुछ भी लिख नही पाया मुझे मालूम है आप मर नही सकते आपकी मौत की सच्ची खबर जिसने उड़ाई थी वो झूठा था वो आप कब थे अटल कभी मरा करते है क्या मेरी स्मृति में आपका 96 का वो पहला भाषण तैर रहा है जो …

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कविता : यादों में रहोगे अटल जी !

जो है अटल पर्वत पहाड़ जैसा, मां भारती का सच्चा सेवक। विशाल व्यक्तित्व बरगद के पेड़ जैसा, यादों में रहोगे अटल जी, न होगा कोई तुम जैसा। जो है अटल… बोलने से पहले सोचते थे कि कोई ना नाराज मुझसे, हृदय में समा जाते थे अटल हर व्यक्ति के, अटल …

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आलेख : राजनीति के अजातशत्रु का महाप्रयाण

पिथौरागढ़। भारत रत्न, भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष, अजातशत्रु, महाकवि का महाप्रयाण सम्पूर्ण राष्ट्र को विचलित करने वाला है। अटल जी का न होना एक महान राजनेता का न होना है, एक महाकवि का न होना है, एक आदर्श पत्रकार का न होना है, एक प्रखर वक्ता का न होना …

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युवा दिवस पर विशेष : कहीं सोशल मीडिया में क्रांति लाने तक सीमित न रह जाये आज का युवा

आज अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस है और हम एक ऐसे देश के युवा हैं, जिसकी लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम है। तो हम एक युवा देश हैं ऐसा भी हम कह सकते है… लेकिन मुझे खुद को युवा कहने में एक कुढ़न सी हो रही है। ऐसा क्यों …

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हिंदी साहित्य जगत में हमेशा याद किये जायेंगे साहित्यकार स्व. बलवंत मनराल

ज़माना बड़े शौक़ से सुन रहा था हमीं सो गए दास्ताँ कहते कहते  ……पिता की मृत्यु नही होती, बल्कि वह अपने अंश अपने पुत्रों के रूप में जीवित रहता है। यह परंपरा सदियों से चली आयी है। वास्तव में जब पूज्य पिताजी को याद करता हूं आज भी आंखे नम हो उठती हैं। सत्य तो यह है …

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10 अगस्त, मनराल जयंती पर विशेष : ‘पहाड़ के एक अपराजेय साहित्यकार थे बलवंत मनराल’

आज 10 अगस्त अपराजेय साहित्यकार बलवंत मनराल की जन्मतिथि है। हिंदी के साठोत्तरी युग के सुप्रसिद्ध साहित्यकार उवं चर्चित कथाकार मनराल जी पक्षाघात के कारण अस्वस्थता की स्थिति में भी अपने जीवन के अंत तक अपनी कलम चलाते रहे। यहां मनराल जी को आत्मीयता से याद कर रहे हैं उनके …

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डाॅ. दीपा की ‘स्मृतियों में मोहन उप्रेती’ पुस्तक एक महत्वपूर्ण दस्तावेज

उत्तराखण्ड के लोकसाहित्य ने यहां के जनमानस पर गहरा प्रभाव छोड़ा है। इसीलिए इस भूमि में बड़े-बड़े व्यक्ति आकर रहने का मन बना लेते हैं। इस पर्वतीय राज्य के कुमाऊँ मंडल की अल्मोड़ा नगरी इस दृष्टि से समृद्ध है। इस नगरी का गौरवमयी सांस्कृति इतिहास रहा है। हर क्षेत्र में …

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पुस्तक समीक्षा — कैंसर ट्रेन

मूल पंजाबी उपन्यास:- लेखक आदरणीय नछत्तर साहब हिन्दी के लिये पुनर्सृजन-आदरणीय सुभाष नीरव जी “फ़िक्रहो,और हो दिशा,गुस्सा ये नहीं तो,ग़ज़ल भी क्या होगी।” — नूर मुहम्मद नूर साहब वैसे यह बात हर विधा पर लागू होती है। लिखने के लिए बहुत सारे ऐसे सब्जेक्ट हैं जिन्हें रेखांकित करना होगा और …

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बच्चों को नशाखोरी से बचाने के लिए दोस्त की भूमिका निभाएं अभिभावक

नशा वर्तमान युवा पीढ़ी के लिए सबसे बड़ी समस्या है। आजकल अनेक युवा इस व्यसन में फंस चुके हैं और अगर वो बाहर निकलना भी चाहें तो चाहकर भी बाहर नही आ पाते …. आज से कुछ समय पूर्व तक नशे के रूप शराब, सिगरेट, बीड़ी आदि का प्रयोग ही …

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…दोस्ती किसी एक दिन की मोहताज तो नही

दोस्त क्या है, दोस्ती क्या है एक दिन विशेष से शायद समझ मे न आये.. लेकिन फिर भी अपने मित्रों को अच्छे अच्छे संदेश भेज कर उनके प्रति कृतज्ञता जाहिर करने के लिए इस दिन विशेष का बहुत महत्व है लेकिन, दोस्ती किसी दिन विशेष की मोहताज नही है…आजकल दोस्ती …

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