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करोड़ों खर्च, पर आवारा कुत्तों से निजात नही, पांच सालों में 2 लाख लोगों हुए डॉग बायट के शिकार

देहरादून। उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद राज्य सरकार आवारा कुत्तों से विभिन्न जनपदों को निजात दिलाने में नाकाम साबित हुई है। प्रदेश के तमाम जनपदों ने आवार कुत्तों की बढ़ती संख्या परेशानी का कारण बन रही है। आरटीआई में मांगी गई जानकारी के अनुसार विगत पांच सालों में दो लाख लोग आवारा कुत्तों द्वारा काटे गए हैं। वही, राज्य सरकार 1 लाख 31 हजार 150 रैबीज बेक्सीन के वायल की खरीद 2014 से लेकर इस साल के सितंबर माह तक कर चुकी है। सिर्फ एंटी रैबीज बेक्सीन की खरीद पर दो करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। यह खुलासा हल्द्वानी के एक आरटीआई कार्यकर्ता हेम चंद्र कपिल ने किया है। उनका कहना है कि आवारा कुत्तों द्वारा काटे गए लागों की संख्या दर्ज रिकार्ड से भी काफी अधिक हो सकती है, क्योंकि बहुत से लोग सरकारी अस्पतालों में जाने के बजाय पाईवेट अस्पतालों का रूख करते हैं। वहीं, राज्य पशु कल्याण बोर्ड से जुड़े अधिकारियों का कहना है ​कि उनके पास प्रदेश में अवारा कुत्तों की संख्या का कोई डाटा नही है। अधिकारियों का कहना है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की सर्वे के अनुसार ऐसा मना जा सकता है कि प्रदेश में अवारा कुत्तों की संख्या तीन लाख के करीब है। संबंधित विभाग के अधिकारियों का कहना है आवारा कुत्तों के बंधियाकरण के लिए काफी बजट खर्च किया जा रहा है। उत्तराखंड में हजारों कुत्तों का बंधियाकरण किया जा चुका है और यह अभियान भविष्य में भी जारी रहेगा। ज्ञात रहे कि जून माह में उत्तराखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आवारा कुत्तों की जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून लागू करने के लिए निर्देश दिए थे। ​

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