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स्वामी सानंद के मौत के दोषियों के खिलाफ हो कार्रवाई, चौघानपाटा में हुई शोक सभा

अल्मोड़ा। निर्मल व अविरल गंगा के लिए आमरण अनशन के बाद स्वामी सानंद के निधन पर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शोक व्यक्त करते हुए सरकार द्वारा समाजिक आंदोलनों की उपेक्षा पर दु:ख व्यक्त किया। चौघानपाटा में आयोजित एक कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि खनन माफियाओं के खिलाफ आंदोलन में स्वामी निगमानंद के बाद अब स्वामी सानंदा की मृत्यु हो चुकी है। वरिष्ठ समाजिक कार्यकर्ता पूरन चंद्र तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में वक्ताओं ने कहा कि स्वामी सानंद के आंदोलन जीडी अग्रवाल 2008 में अल्मोड़ा में आयोजित नदी बचाओ अभियान में रामनगर में शामिल रहे। गढ़वाल में नदियों में प्रस्तावित बांधों के विरोध में स्थानीय जनता आंदोलन कर रही थी। तब देश से पर्यावरण विदों ने पहाड़ के साथ छेड़छाड़ का विरोध किया था। कलांतर में प्रो. जीडी अग्रवाल ने अपने को नदी घाटियों की जैव विविधता के लिए समर्पित कर दिया तथा स्वामी सानंद बनकर मातृ सदन के नेतृत्व में आंदोलन में शामिल हो गए। वक्ताओं ने कहा ​मांग की कि स्वामी सानंद की मृत्यु सरकार की उपेक्षा का परिणाम है। उनकी मृत्यु के लिए दोषी लोगों पर कार्यवाही होनी चाहिए। बैठक में उत्तराखंड लोक वाहिनी के प्रांतीय सचिव पूरन चंद्र तिवारी, दयाकृष्ण कांडपाल, अजय बिष्ट, जंग बहादुर थापा, स्वच्छ अल्मोड़ा की ओर से मनोज गुप्ता, आशीष जोशी, वैभव जोशी, महिला हाट की ओर से संजय कुमार, गीता पांडे, पुष्पा टम्टा, राजू कांडपाल, सामाजिक कार्यकर्ता मनोज सनवाल, पूर्व ग्राम प्रधान खत्याड़ी हर्ष कनवाल आदि शामिल है। अंत में 2 मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की। तथा स्वामी सानंद की मृत्यु की न्यायिक जांच तथा उनके द्धारा उठाई गई मांग तत्काल पूर्ण करने की मांग की गई।

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